Jabalpur news: दुश्मनों की जमीन 2 मीटर गहराई तक तबाह करने वाले बम, जबलपुर की OFK-GIF को निर्माण का ऑर्डर
Jabalpur News: मिग वैरियंट के फाइटर प्लेन से गिराकर दुश्मनों के ठिकानों को तबाह करने वाले थाउजेंड पाउंडर बमों का ऑर्डर एमपी जबलपुर की फैक्ट्री को मिला हैं। वायु सेना द्वारा इस्तेमाल होने वाले इन बमों को ऊंचाई से गिराया जाता हैं, जिनकी मारक क्षमता जमीन के दो मीटर अंदर तक रहती हैं।
जबलपुर की सुरक्षा निर्माणी ग्रे आयरन फाउंड्री यानि जीआइएफ इन घातक बमों के खोल बनाएगी फिर विस्फोटक भरने के लिए यह बम खोल का लॉट आयुध निर्माणी खमरिया भेजा जाएगा। उसके बाद कम्प्लीट बम संबंधित सेना को सप्लाई होंगे।
खास बात यह है कि जबलपुर की जीआईएफ के स्थापना दिवस की इस बार स्वर्ण जयंती हैं। लिहाजा वायु सेना के द्वारा बमों के निर्माण का मिला ऑर्डर बड़ी उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा हैं। जीआइएफ में नमूने के तौर पर का निर्माण किया गया था। जो सेना को भेजे गए थे। परीक्षण के बाद वर्क आर्डर जारी किया गया।

जमीन के अंदर दो मीटर तक तबाही
जबलपुर की आयुध निर्माणी को जिन बमों का ऑर्डर मिला हैं। वह युद्ध के दौरान दुश्मनों पर हमले में कई तरह की विशेषता रखते । जानकारी के मुताबिक मिग वैरियंट के फाइटर प्लेन की मदद से ये बम इस्तेमाल नवे, बंकर, बड़ी इमारत, युद्धपोत या बड़ी अधोसंरचना पर गिराया जाता है। इस्तेमाल होने जगह में यह बम दो से ढाई मीटर गहरा गड्ढा कर देता है।
ऑर्डर से GIF के कर्मचारी-अधिकारी गदगद
दरअसल GIF पिछले कुछ वक्त से काम के संकट से जूझ रहा था। 1973 में स्थापित जीआइएफ वीएफजे के शक्तिमान, निशान और जोंगा वाहन के कल पुर्जे ढालने का काम कर चुका हैं। बीच में अचानक VFJ में ऐसे वाहनों का जब उत्पादन बंद हुआ तो जीआईएफ में काम का संकट आ गया। फिर एम्युनिशन बाक्स सारंग गन के साथ रेलवे के पुर्जों को भी बनाया। करीब डेढ़ साल पहले 7हिस्सों में विभक्त निर्माणी बोर्ड के बाद जीआइएफ यंत्र इंडिया लिमिटेड कंपनी के अधीन हो गई। जिससे यह नए स्वरूप में स्थापित हुई हैं। निर्माणी में वर्क आर्डर से प्रबंधन और कर्मचारी- दोनों खुश हैं। उनका कहना है कि जीआइएफ में अन्य फैक्ट्रियों के मुकाबले कम आयु के औसत कर्मचारियों की संख्या ज्यादा है। ऐसे में जोश और जज्बे के साथ काम हो रहा हैं। हालांकि कर्मचारी संगठन भी कुछ कर्मचारियों की डिमांड और कर रहे हैं।
OFK बनाएगा 9 लाख हैंड ग्रेनेड
1000 पाउंडर बमों के अलावा ओएफके को ल्टी मोड हेंड ग्रेनेड "शिवालिक' की सप्लाई का भी ऑर्डर मिला हैं। भारतीय सेना ने इसकी सप्लाई करने अधिकृत निर्देश जारी किए हैं। खास बात यह है जबलपुर की आयुध निर्माणी सेना के भरोसे पर पहले भी खरी उतरी हैं। यही वजह कि एक बार फिर बड़े ऑर्डर जबलपुर की झोली में ही आये। मल्टी मोड हैंड ग्रेनेड शिवालिक को टर्मिनल बैलेस्टिक रिसर्च लेबोरेटरी और डीआरडीओ द्वारा विकसित किया गया है। पहले 36-एम विंटेज नाम से हैंड ग्रेनेड बनाया जाता था, लेकिन सेना द्वारा अति विकसित हैंड ग्रेनेड की मांग की गई। इसमें टीबीआरएल डिफेंस रिसर्च और डीआरडीओ की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। बताया गया कि सप्लाई का लक्ष्य मार्च 2024 तक का निर्धारित किया गया हैं।












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