Jabalpur News: दुनिया को मटर देने वाला जबलपुर खुद फैलाए है हाथ, बीज के लिए किसान परेशान, ये है बड़ी वजह
एमपी का जबलपुर करीब 3 लाख टन मटर का उत्पादन करता है। आपको नहीं मालूम होगा कि इसके लिए यूपी के बीज का इस्तेमाल होता है। लेकिन अब किसान कह रहे है कि वैसे ही बीज की लोकल व्यवस्था हो, वरना खेती ही बंद कर देंगे।

Jabalpur which gives peas to the world:मेहमानबाजी हो या फिर घर के लोगों की महफ़िल लजीज खाने में मटर के लिए हर किसी का दिल मचल जाता है। मध्य प्रदेश के जबलपुर का मटर देश ही नहीं विदेश में भी अपनी पहचान कायम किए है, लेकिन आपको यह बात नहीं मालूम होगी कि यहां जिस मटर का उत्पादन हो रहा है, वह यूपी पर निर्भर है। इसकी बड़ी वजह उत्पादन के लिए जरुरी बीज हैं। जो उत्तर प्रदेश के जालौन और इटावा से मंगाया जाता है। इस साल उत्पादकों को बीज के लिए ख़ासा परेशान होना पड़ा। उनका कहना है कि सरकार मटर के बीज की व्यवस्था करने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखा रही।

जिले में 3 लाख टन से ज्यादा मटर का उत्पादन
देश भर में मटर की सप्लाई करने वाला एमपी का जबलपुर मटर के बीज के लिए आज भी हाथ फ़ैलाने मजबूर है। दशकों से विदेश तक इस मटर को प्रसिद्धि दिलाने वाले यहां के किसान अब परेशान है। जिसकी बड़ी वजह उत्पादन के लिए लगने वाला बीज है। अभी तक किसी तरह उत्तर प्रदेश के सहारे बीज की भरपाई होती आई। लेकिन अन्य हिस्सों में डिमांड बढ़ने से इस बार बीज के लिए किसानों को कई परेशानियों का सामना पड़ा। मटर उत्पादक किसान बताते है कि सीजन में करीब 3 लाख टन से ज्यादा मटर का उत्पादन करते है।

उत्पादन में लोकल बीज फेल, यूपी का बेहतर
किसानों का कहना है कि स्थानीय बीज की गुणवत्ता उतनी बेहतर नहीं है, जितना यूपी के जालौन, उन्नाव और इटावा का है। करीब 75 फीसदी किसान उत्तर प्रदेश के बीज पर ही निर्भर है। जिसके बलबूते अभी तक मटर का बेहतर उत्पादन करते आए। इस बार वक्त पर गुणवत्तायुक्त बीज की उपलब्धता न होने से लोकल बीज का इस्तेमाल भी किया गया, जिससे उत्पादन प्रभावित हुआ। इससे कई किसानों की तो लागत तक नहीं निकली।
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सर्टिफाइड बीज तैयार करने का भी है तरीका
जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय के कृषि विज्ञानी डा. एके सिंह बताते है कि मटर का ब्रीडर-शीड उत्तर प्रदेश में ही तैयार होता है। एक प्रक्रिया के तहत कृषि विभाग, बीज निगम जैसे संस्थानों को ये ब्रीडर-शीड दे दिए जाते है। संबंधित संस्थान अपने प्रक्षेत्रों में ब्रीडर शीड्स का इस्तेमाल कर बीज तैयार करवाते है। फिर बुवाई के लिए किसानों को दिया जाता है। डा. सिंह का दावा है कि सर्टिफाइड-2 बीज से किसान खुद भी दो बार बीज तैयार कर सकता है। इसके लिए किसानों को इसकी पूरी प्रक्रिया से अवगत होना पड़ेगा।

..तो मटर का उत्पादन ही बंद कर देंगे
जिले के कुसमी के किसान चंद्रेश शर्मा ने बताया कि उनके किसान संगठनों ने इस सिलसिले में अपनी समस्या सरकार के समक्ष भी रखी। शासन स्तर पर ऐसी कोई व्यवस्था बनाने की मांग भी की गई कि सीजन के वक्त उन्हें यूपी पर निर्भर न रहना पड़े। सर्टिफाइड बीज तैयार करने की विधि और उसकी सभी तरह की व्यवस्था की डिमांड की गई, लेकिन विभाग कोई दिलचस्पी नहीं दिखा रहा। वही सिवनी के रहने वाले आशीष राजपूत का मटर की खेती का पुस्तैनी काम है। राजपूत बोले कि इस बार तो उनको मटर की बुवाई के वक्त पसीने छूट गए। उन्नत बीज का इंतजार करते बुवाई का वक्त खत्म होने लगा, मज़बूरी में उन्हें छिंदवाड़ा से बीज मंगवाना पड़ा। जिससे उनकी लागत और मुनाफा प्रभावित हुआ।

रिसर्च जारी है किसानों को मिलेगी सौगात
इस बार मटर के सीजन से किसान बेहद खफा है। एक तो बीच में उन्हें मौसम ने साथ नहीं दिया, ऊपर से बीज की किल्लत होने से कई दिक्कतों का सामना करना पड़ा। इधर कृषि उद्यानिकी की उप संचालक ने बताया कि उन्नत श्रेणी के बीज तैयार करने विभाग की ओर से प्रयास जारी है। इस पर कई रिसर्च हो रहे है। बहुत जल्द प्रदेश के किसानों की बीज की समस्या हल हो जाएगी।
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