Jabalpur News: बच्चों की तरह मोर खा रहे थे चिप्स-लड्डू, बीमार हुए तो पब्लिक करने लगी ट्रीटमेंट
(Peacock) मोर हमारे देश का राष्ट्रीय पक्षी है, लेकिन एमपी के जबलपुर के एक इलाके में लोगों ने उसे खिलौना समझ लिया है। इंसानों की तरह जो जी में आ रहा वह खिलाया जा रहा है। जिससे मोरों की सेहत बिगड़ती जा रही है। शहर की पाटबाबा पहाड़ी पर अक्सर नजर आने वाले मोरों को चिप्स और लड्डू खिला दिए, जिससे कई मोरों की हालत बिगड़ गई। जब मोर अचानक बेसुध होकर गिरने लगे तो वहां मौजूद पब्लिक ने उन्हें ट्रीटमेंट दिया। लेकिन इस बीच वन विभाग की बड़ी लापरवाही उजागर हुई है।

बच्चों की तरह मोर खाने लगे चिप्स-लड्डू
जबलपुर में प्रसिद्द पाटबाबा के नाम से एक पहाड़ी मशहूर है। यहां मंदिर है, जहां बड़ी संख्या में हर रोज श्रद्धालु दर्शन करने पहुंचते है। आसपास एक सैकड़ा से ज्यादा मोर है। जिनका दीदार करने लोग भी ठहर जाते है। हर किसी का मन होता है कि मोर पंख फैलाकर नृत्य करते दिखे। इसी लालच में मंदिर आए कुछ लोगों ने मोरों को खाने के लिए चिप्स और लड्डू डाल दिए। बच्चों की तरह मोरों ने भी यह खाना शुरू कर दिया और लोग उनके साथ सैल्फी लेने लगे।

कुछ देर बाद बेसुध होने लगे मोर
एक की देखा सीखी करते दूसरे लोग भी बाजार से चिप्स और लड्डू खरीद लाए। जिसे खाकर कुछ देर बाद मोरों की हालत बिगड़ने लगी। मंदिर परिसर से वापस पहाड़ी पर लौटते वक्त कई मोर बेसुध होकर गिर गए। जिससे हड़कंप मच गया। कुछ मोरों को उल्टियां भी हुई। तभी वहां मौजूद अन्य लोगों ने बीमार मोरों की सुध ली। उन्हें प्राथमिक उपचार दिया। तब कही जाकर कुछ मोर चैतन्य अवस्था में आए।

कई घंटों बाद पहुंचा वन विभाग का अमला
एक के बाद एक बीमार होते गए मोरों की खबर वन विभाग को भी दी गई। लेकिन कई घंटों बाद टीम मौके पर पहुंची। तब तक आम पब्लिक ने अपने स्तर पर प्रयास कर बीमार मोरों का उपचार कराया। वन विभाग ने मौके की परिस्थितियों को देखकर बताया कि मोर तेलीय पदार्थ खाकर बीमार हुए है। वेटरनरी डॉक्टर को बुलाया गया और परीक्षण के बाद पता चला कि चिप्स लड्डू खाकर मोर चर्म और लीवर की बीमारी का शिकार हो रहे है।

केवल कच्चा अनाज खाते है मोर
पक्षी विशेषज्ञ राकेश शर्मा ने बताया कि शिकारी पक्षी का गुण होने की वजह से मोर की खुराक कीड़े-मकोड़े, सांप, फल और पेड़ों की पत्तियां होती है। आबादी वाले इलाके के मोरों के लिए कच्चा अनाज और सब्जियां खाने के लिए दी जाती है। लेकिन तेलीय अवस्था के पदार्थ चिप्स-लड्डू जैसी चीजे उनकी सेहत के लिए बेहद खरतनाक है। जरुरी है कि वन विभाग ऐसे पक्षी वाले स्थानों पर नजर रखे और आम लोगों को भी जागरूक करें।

इस इलाके में लगभग एक सैकड़ा मोर होने का दावा
वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक शहर के जिस इलाके में मोर बीमार हुए, वहां लगभग एक सैकड़ा मोर है। पाटबाबा की पहाड़ी झाड़ जंगल से घिरी है। इस वजह से वहां रहने वाले मोर मंदिर के पास तक पहुंच जाते है। इंसानी चहलकदमी के वक्त घूम-फिरकर वह वापस अपने क्षेत्र में चले जाते है। कई सालों से यही सिलसिला चल रहा है। लेकिन यह पहला मौका है, जब यहां के मोरों की सेहत बिगड़ गई। इस स्थिति को रोकने के लिए वन विभाग ने दिशा-निर्देश के साथ बोर्ड लगाने की बात भी कही है।












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