प्रिगोजिन की मौत के बाद अब वैगनर आर्मी का क्या होगा, क्या प्राइवेट आर्मी को भी 'बर्बाद' कर देंगे पुतिन?
रूस में राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन के खिलाफ 2 महीने पहले विद्रोह छेड़ने वाले वैगनर आर्मी चीफ येवगेनी प्रिगोजिन की बुधवार देर रात एक प्लेन क्रैश में मौत हो गई। प्रिगोजिन की मौत के बाद उसकी प्राइवेट आर्मी के भविष्य को लेकर तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं।
प्रिगोजिन ने रूस की मदद से वैगनर ग्रुप को खड़ा किया था। अब वह मारा जा चुका है। ऐसे में इस बात की आशंका जताई जा रही है कि पुतिन धीरे-धीरे वैगनर ग्रुप को भी खत्म कर सकते हैं।

बीते महीने पुतिन ने एक इंटरव्यू में इसका संकेत भी दिया था। उन्होंने कहा था कि वैगनर ग्रुप अब बीते जमाने की बात हो गई। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने बीते महीने एक रूसी अखबार कोमर्सेंट के साथ एक इंटरव्यू में कहा था कि वैगनर प्राइवेट आर्मी अब 'अस्तित्व में ही नहीं है।'
वैगनर ग्रुप को रूस-यूक्रेन के साथ युद्ध में काफी नुकसान हुआ था। उसके हजारों लड़ाके मारे जा चुके हैं। फिर भी अनुमानतः इस प्राइवेट आर्मी के 25 हजार लड़ाके मौजूद हैं, जो कि किसी भी देश के लिए खतरनाक साबित हो सकते हैं।
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि अब इस ग्रुप का लीडर कोन होने वाला है क्योंकि प्रोगोजिन के साथ मरने वाले कुछ कुछ शीर्ष लेफ्टिनेंट भी विमान में थे, जिससे संगठन के शीर्ष पर एक बड़ा शून्य पैदा हो गया है।
हालांकि प्रिगोजिन की मौत के बाद ये साफ हो चुका है कि वैगनर ग्रुप के लिए अपना अस्तित्व बचाना अब बेहद मुश्किल होगा। कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक अब इसका असर भी दिखने लगा है।
खबर आ रही है कि बगावत के बाद रूस छोड़कर बेलारूस गए वैगनर लड़ाके वहां से भी भागना शुरू कर चुके हैं। कई लड़ाके जो बेलारूस में थे अब पश्चिमी अफ्रीकी देशों में शिफ्ट हो रहे हैं। एक वक्त बेलारूस में 5000 वैगनर लड़ाके थे, जो घटकर 1000 से भी कम रह गए हैं।
ऐसे संकेत मिले हैं कि वैगनर के व्यापारिक साम्राज्य पर अन्य रूसी समूहों या सरकारी एजेंसियों का कब्ज़ा हो सकता है, लेकिन इसकी पुष्टि नहीं हुई है। ऐसा भी दावा किया जा रहा है कि रूस इनका इस्तेमाल एक बार फिर यूक्रेन युद्ध में कर सकता है।












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