Saudi vs UAE in Yemen: सऊदी और यूएई की जंग के बीच यमन के प्रधानमंत्री ने क्यों दिया इस्तीफा, जानें पूरा मामला?

Yemen Political Crisis 2026: यमन में राजनीतिक संकट एक ऐसे मोड़ पर पहुंच गया है, जहां अपनों की जंग बाहरी दुश्मनों से भी घातक साबित हो रही है। 15 जनवरी 2026 को प्रधानमंत्री सलेम बिन ब्राइक का इस्तीफा और शाय्या मोहसिन जिंदानी की नियुक्ति केवल एक प्रशासनिक फेरबदल नहीं, बल्कि सत्ता पर नियंत्रण की एक बड़ी कोशिश है।

एक तरफ यमन सालों से हूती विद्रोहियों के खिलाफ गृहयुद्ध लड़ रहा है, वहीं दूसरी ओर उसे समर्थन देने वाले दो सबसे बड़े देश सऊदी अरब और यूएई अब वर्चस्व की लड़ाई में एक-दूसरे के सामने खड़े हैं। अदन से मुकल्ला तक बढ़ता सैन्य तनाव यमन के भविष्य को और गहराते संकट में डाल रहा है।

Saudi vs UAE in Yemen

Yemen Civil War Update in Hindi: सरकार में अचानक बदलाव क्यों?

पुराने प्रधानमंत्री के जाने के बाद नए प्रधानमंत्री की नियुक्ति इसलिए की गई ताकि देश का कामकाज ठप न हो। दरअसल, पर्दे के पीछे असली खेल 'पावर' का है। सरकार की काउंसिल में से उन लोगों को हटा दिया गया जो यूएई के करीब थे और उनकी जगह उन लोगों को लाया गया जो सऊदी अरब के वफादार हैं। सीधा मतलब है कि सऊदी अरब अब यमन की सरकार पर अपना पूरा कंट्रोल चाहता है।

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यमन दो हिस्सों में क्यों बंटा है?

यह झगड़ा साल 2014 से चल रहा है। तब ईरान की मदद से हूती विद्रोहियों ने राजधानी सना पर कब्जा कर लिया था। आज स्थिति यह है कि यमन का उत्तरी हिस्सा हूतियों के पास है और दक्षिणी हिस्सा वहां की सरकारी काउंसिल (जिसे सऊदी अरब का साथ मिला है) के पास है। इस लड़ाई की वजह से यमन के लोग गरीबी और भुखमरी से बहुत परेशान हैं।

Saudi Arabia vs UAE in Yemen: दो दोस्तों (सऊदी और यूएई) के बीच झगड़ा

हैरानी की बात यह है कि जो सऊदी अरब और यूएई मिलकर हूतियों से लड़ रहे थे, अब वही एक-दूसरे के आमने-सामने हैं। यूएई एक गुट (STC) की मदद कर रहा है जो दक्षिण यमन पर अपना कब्जा चाहता है। सऊदी अरब को यह बात पसंद नहीं आ रही क्योंकि उसे डर है कि अगर यूएई का प्रभाव बढ़ा, तो उसकी अपनी सीमाओं पर खतरा पैदा हो जाएगा।

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मुकल्ला बंदरगाह पर हमला और तनाव

हालात तब और बिगड़ गए जब 30 दिसंबर को सऊदी अरब के विमानों ने मुकल्ला बंदरगाह पर बम गिराए। सऊदी का कहना था कि वहां यूएई की तरफ से भेजे गए हथियार रखे थे। इसके बाद सऊदी ने यूएई को चेतावनी तक दे दी कि अपनी सेना हटा लो। यूएई ने हथियारों की बात से इनकार किया है, लेकिन इस घटना ने साफ कर दिया है कि यमन अब बाहरी देशों की आपसी खींचतान का अड्डा बन गया है।

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