G20 में शी जिनपिंग की मेजबानी के लिए भारत तैयार, बीजिंग ने अब तक नहीं की पुष्टि, क्या आएंगे चीनी राष्ट्रपति?
अगले कुछ दिनों में भारत की राजधानी नई दिल्ली में भारत में दुनियाभर के सबसे शक्तिशाली नेता जी-20 सम्मेलन में शिरकत करने के लिए इकट्ठा होने वाले हैं। यह पहली बार है जब भारत को शिखर सम्मेलन की मेजबानी मिली है। 18 देशों के एक विशाल सम्मेलन में नेताओं की भागीदारी प्रतिनिधित्व किया जाएगा।
अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन से लेकर तुर्की के रेसेप तैयप एर्दोगन समेत कई शक्तिशाली नेता भारत आने वाले हैं। हालांकि अभी तक बीजिंग ने अभी तक जी20 शिखर सम्मेलन के लिए चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की नई दिल्ली यात्रा की पुष्टि नहीं की है।

हालांकि, भारत को उम्मीद है कि चीनी राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मेजबानी में होने वाले सम्मेलन में भाग लेंगे। इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक की 9 और 10 सितंबर को दिल्ली में जी20 शिखर सम्मेलन के मौके पर शी के साथ अलग-अलग द्विपक्षीय बैठकें होने की अटकलों की खबरें भी तैर आ रही है।
बीते शुक्रवार को भारत के विदेश सचिव विनय क्वात्रा ने भी शी जिनपिंग के जी20 समिट में हिस्सा लेने के सवाल पर भी स्पष्ट जवाब नहीं दिया था।
G20 में 19 देश और यूरोपीय संघ (EU) शामिल हैं। नई दिल्ली ने भारत में होने वाले वार्षिक सम्मेलन में भाग लेने के लिए सभी 18 देशों के नेताओं को निमंत्रण भेजा था। इसके अलावा, यूरोपीय संघ के दो नेताओं - यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष चार्ल्स मिशेल और यूरोपीय आयोग के अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन को भी निमंत्रण भेजा गया था।
सोमवार को पीएम मोदी से फोन पर बातचीत के दौरान रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने शिखर सम्मेलन में शामिल होने में असमर्थता जताई थी। उन्होंने मोदी को यह भी बताया कि रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव सम्मेलन में रूस के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे। इसके साथ ही मैक्सिकन राष्ट्रपति आंद्रेस मैनुअल लोपेज ओब्रेडोर ने भी बताया कि वह शिखर सम्मेलन में भाग नहीं लेंगे।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडेन, यूके पीएम सुनक, ऑस्ट्रेलियाई पीएम अल्बनीस, फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन, जापानी पीएम फुमियो किशिदा, कनाडाई पीएम जस्टिन ट्रूडो और दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति यूं सुक येओल जी20 नेताओं में से हैं, जिन्होंने शिखर सम्मेलन में अपनी व्यक्तिगत भागीदारी की पुष्टि की है।
डेक्कन हेराल्ड की रिपोर्ट के मुताबिक जी20 सचिवालय नई दिल्ली में पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना के दूतावास के संपर्क में है और शी की यात्रा के लिए आवश्यक व्यवस्था पहले ही कर ली गई है। हालांकि, शिखर सम्मेलन की तैयारी से अवगत सूत्र ने कहा है कि बीजिंग ने अभी तक उनकी नई दिल्ली यात्रा के बारे में कोई पुष्टि नहीं भेजी है।
मोदी और शी ने हाल ही में दक्षिण अफ्रीका के जोहान्सबर्ग में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के मौके पर बातचीत की थी। यदि जिनपिंग जी20 शिखर सम्मेलन के लिए नई दिल्ली की यात्रा करते हैं, तो पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर तीन साल से अधिक समय से चले आ रहे सैन्य गतिरोध के कारण भारत और चीन के बीच संबंधों में आई खटास के बाद यह उनकी पहली यात्रा होगी।
शी ने आखिरी बार पीएम मोदी के साथ दूसरे अनौपचारिक शिखर सम्मेलन के लिए अक्टूबर 2019 में चेन्नई के पास मामल्लापुरम का दौरा किया था। जी20 देशों के अलावा, नई दिल्ली ने नौ अन्य मित्र देशों- बांग्लादेश, मॉरीशस, सिंगापुर, ओमान, नीदरलैंड, मिस्र, स्पेन, नाइजीरिया और संयुक्त अरब अमीरात के नेताओं को भी शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया है। इन सभी देशों के प्रतिनिधियों के आने की उम्मीद है।
इसके साथ ही भारत ने संयुक्त राष्ट्र, अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष, विश्व बैंक, विश्व स्वास्थ्य संगठन, विश्व व्यापार संगठन, अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन, वित्तीय स्थिरता बोर्ड और आर्थिक सहयोग और विकास संगठन के शीर्ष अधिकारियों के साथ-साथ अफ्रीकी संघ के अध्यक्षों के अलावा, नेपैड और आसियान, आईएसए, सीडीआरआई और एडीबी को भी प्रतिनिधि भेजने के लिए आमंत्रित किया है।












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