चीन की नई चाल, अरुणाचल बॉर्डर पर चरवाहों को बना रहा हथियार
नई दिल्ली। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अरुणाचल प्रदेश की सीमा से सटे तिब्बती चरवाहों को इलाके की रक्षा करने की अपील की है। जिनपिंग ने कहा कि चरवाहों से देख की रक्षा के लिए इलाके में अपनी जड़े जमाने और वहां के विकास पर ध्यान देने के लिए कहा है। जिनपिंग ने यह बातें भारतीय सीमा से सटे एक तिब्बती चरवाहे परिवार को लिखी चिठ्ठी में कहा।

चीन की आधिकारिक मीडिया ने बताया कि अपना दूसरा कार्यकाल शुरू कर रहे शी जिनपिंग ने तिब्वती स्वायत्त इलाके के लुन्झे काउंटी में रहने वाले एक परिवार को चिठ्ठी लिखी है। जिनपिंग ने अपनी चिठ्ठी में कहा कि इस इलाके में शांति के बिना लाखों परिवारों के लिए जीवन शांतिपूर्ण नही होगा। बता दें कि अरुणाचल प्रदेश के पास सीमा लाइन को लेकर भारत और चीन के बीच विवाद है।
चीनी मीडिया ने जो जानकारी दी उसके मुताबिक यह परिवार हिमालय के दक्षिण में बसे एक छोटे से गांव युमाई में रहता है।पहाड़ी इलाके और दुर्जन रास्ते होने के कारण इस गांव की आबादी काफी कम है। भारतीय सीमा के पास इस गांव पर चीन हमेशा से अपना दावा करता है। अभी यह इलाका तिब्बत के स्वायत्त क्षेत्र में आता है। जिनपिंग ने अपने पत्र में इस परिवार की वफादारी की प्रशंसा करते हुए कहा कि इलाके की सुरक्षा के लिए आपके परिवार की सुरक्षा सराहनीय है। जिनपिंन ने कहा कि उम्मीद है कि आप लोग अन्य परिवारों को भी इस इलाके में बसने के लिए प्रेरित करेंगे और चीन की धरती की रक्षा करेंगे।
बता दें कि डोकलाम में जब भारतीय और चीनी सेना के बीच जब दो महीने से अधिक तक टकराव चला था उस वक्त चीन ने इस इलाके में अपनी सेना भेजी थी और युद्धाभ्यास भी किया था। भारत का कहना है कि उसका चीन के साथ 4057 लंबी वास्तविक नियंत्रण रेखा को लेकर विवाद है जबकि चीन इस वास्तविक नियंत्रण रेखा को मानने से इंकार करते हुए अरुणाचल प्रदेश से सटे 2000 किलोमीटर के क्षेत्र को विवादित मानता है।












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