China: नए साल के संबोधन में राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने फिर उठाया ताइवान का मुद्दा, कहा- चीन के साथ मिलाकर रहेंगे
ताइवान में 13 जनवरी को राष्ट्रपति चुनाव होने वाला है। इस चुनाव से पहले, राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने रविवार को अपने नए साल के उपलक्ष्य में टेलीविजन पर संबोधन दिया। उन्होंने कड़े लहजे में कहा कि ताइवान को चीन के साथ फिर से एकजुट होना होगा। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि देश 2024 में अपनी आर्थिक बहाली की सकारात्मक प्रवृत्ति को और बढ़ाएगा।
आधिकारिक शिन्हुआ समाचार एजेंसी के अनुसार, शी जिनपिंग ने अपने वार्षिक संबोधन में कहा, शी ने रविवार के संबोधन में कहा कि, ताइवान जलडमरूमध्य के दोनों किनारों पर सभी चीनियों को उद्देश्य की समान भावना से बंधा होना चाहिए और चीनी राष्ट्र के कायाकल्प की महिमा में हिस्सा लेना चाहिए।

हाल के दिनों में ये दूसरी बार है जब शी जिनपिंग ने ताइवान के मुद्दे को उठाया। शी ने मंगलवार को कम्युनिस्ट चीन के संस्थापक माओत्से तुंग के जन्म की 130वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में बीजिंग में एक संगोष्ठी के दौरान ताइवान को फिर से एकजुट करने की भी कसम खाई।
चीन ने ताइवान के 13 जनवरी के राष्ट्रपति और संसदीय चुनावों को युद्ध और शांति के बीच एक विकल्प बताया है। इस बीच, ताइवान में, निवासी चुनाव के लिए तैयारी कर रहे हैं। वर्तमान जनमत सर्वेक्षणों से पता चलता है कि निवासी स्वतंत्रता-झुकाव वाले उम्मीदवार लाई चिंग-ते के पक्ष में हैं।
बता दें कि ताइवान में 13 जनवरी को होने वाले राष्ट्रपति और संसदीय चुनावों के लिए प्रचार अभियान चल रहा है। इन चुनावों में चीन के साथ संबंध और सीमा विवाद का एक प्रमुख मुद्दा है।
ओपिनियन पोल के मुताबिक, सत्तारूढ़ डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी(DPP) की लाइ चिंग-टे ताइवान के अगले राष्ट्रपति बनने की दौड़ में सबसे आगे हैं, जबकि ताइवान की मुख्य विपक्षी पार्टी कुओमितांग पारंपरिक रूप से बीजिंग के प्रति नरम रुख रखने के लिए जानी जाती है।
माई फॉर्मोसा पोर्टल पर राष्ट्रपति पद की दौड़ में नवीनतम सर्वेक्षणों में DPP नेता विलियम लाई को 35.2 प्रतिशत वोट मिले हैं। वहीं, चीन समर्थक कुओमितांग (KMT) पार्टी होउ यू-इह 30.6 प्रतिशत के साथ दूसरे स्थान पर है। हालांकि बीजिंग की ओर झुकाव रखने वाले यूनाइटेड डेली न्यूज ने दोनों उम्मीदवारों को 31 फीसदी वोट दिया है।
कुओमितांग (KMT) पार्टी के नेताओं का कहना है कि अगर वह चुनाव जीतते हैं तो वह चीन के साथ फिर से वार्ता शुरू करेंगे, लेकिन ताइवान के लोग ही अपने भविष्य का फैसला करने का अधिकार है।












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