ताइवान को 'शांति' से चीन का हिस्सा बनाएंगे, शी जिनपिंग ने अमेरिका को इशारों में दी चेतावनी

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा है कि ताइवान के सवाल का हम शांति समाधान करेंगे और विदेशी हस्तक्षेप की जरूरत नहीं है।

बीजिंग, अक्टूबर 09: इस महीने चीन और ताइवान के बीच काफी ज्यादा तनाव बढ़ा हुआ है और चीन डेढ़ सौ से ज्यादा लड़ाकू जहाजों को ताइवान के हवाई क्षेत्र में भेज चुका है। ऐसा लग रहा था कि कभी भी चीन ताइवान के ऊपर हमला कर सकता है और ताइवान की रक्षा के लिए अमेरिका ने अपने एयरक्राफ्ट कैरियर को भी तैनात कर दिया था। इन सबके बीच चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने ताइवान को चीन में फिर से शामिल कराने की बात कही है। हालांकि, इस बार उन्होंने कहा कि, ताइवान को शांति के साथ चीन का हिस्सा बनाया जाएगा।

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    ताइवान पर बोले चीनी राष्ट्रपति

    ताइवान पर बोले चीनी राष्ट्रपति

    चीन के राष्ट्रपति ने कहा कि, 'ताइवान के सवाल' को शांति के साथ सुलझाएंगे। शी जिनपिंग की ये टिप्पणी चीन द्वारा ताइवान के वायु रक्षा क्षेत्र में लगातार चार दिनों तक सार्वजनिक बल प्रदर्शन के तहत लड़ाकू विमानों को भेजने के बाद आई है। ताइवान खुद को एक संप्रभु राज्य मानता है, लेकिन चीन स्व-शासित द्वीप को चीन का ही एक अलग प्रांत के रूप में देखता है। बीजिंग ने ताइवान को चीन से मिलाने के लिए बल प्रयोग की बात से इनकार नहीं किया है। देश के अंतिम शाही वंश को समाप्त करने वाली क्रांति की 110वीं वर्षगांठ मनाने के लिए बीजिंग में 'ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल' में बोलते हुए शी जिनपिंग ने कहा कि चीन के पुनर्मिलन में सबसे बड़ी बाधा "ताइवान स्वतंत्रता" बल थी।

    'अराजकता से बना है ताइवान'

    'अराजकता से बना है ताइवान'

    चीन की सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीसी) के महासचिव शी जिनपिंग ने कहा कि ताइवान का सवाल चीनी राष्ट्र की 'कमजोरी' और 'अराजकता' से उत्पन्न हुआ है और इसे राष्ट्रीय कायाकल्प के रूप में हल किया जाएगा। शी जिनपिंग ने ताइवान को चीन का हिस्सा बनाने की बात पर कहा कि, "यह चीनी इतिहास की सामान्य प्रवृत्ति से निर्धारित होता है, लेकिन इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि यह सभी चीनी लोगों की सामान्य इच्छा है।"

    कैसे बना ताइवान?

    कैसे बना ताइवान?

    आपको बता दें कि, जब माओ के नेतृत्व में कम्यूनिस्ट पार्टी ने चीन की लोकतांत्रिक पार्टी के नेताओं की हत्या करनी शुरू कर दी, तो लोकतांत्रिक नेता अपनी जान बचाकर ताइवान भागने लगे थे। 1911 में डॉ. सन-यात सेन के नेतृत्व में लोकतांत्रिक राष्ट्रवादी पार्टी ने चीन में क्रांति लाने की कोशिश की थी और 2 हजार 136 सालों से चीन में चली आ रही राजशाही सत्ता को उखाड़ फेंका था और फिर चीन रिपब्लिकन युग की शुरूआत की थी। लेकिन चीन में माओ जेदांग ने 1949 में पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चायना की स्थापना की और डॉ. सन-यात सेन को अपने समर्थकों के साथ चीन छोड़कर भागना पड़ा। कम्यूनिस्ट माओ पर आरोप है कि उन्होंने लाखों लोगों को मरवा दिया था। चीन से भागने के बाद डॉ. सन-यात सेन ने 1949 में एक स्वतंत्र देश ताइवान की स्थापना की, जो पहले चीन का ही एक द्वीप था, जिसपर एक बार फिर से चीन कब्जा करने की कोशिश कर रहा है।

    शी जिनपिंग की महत्वाकांक्षा

    शी जिनपिंग की महत्वाकांक्षा

    2012 में सत्ता संभालने के बाद शी जिनपिंग ने चीन के सभी प्रमुख पदों पर अपने खास लोगों को बिठा दिया और खुद को मरते दम तक चीन का राष्ट्रपति घोषित कर दिया। वहीं, शी जिनपिंग ने खुद को पीएलए का प्रमुख तो बनाया ही, साथ ही उन्होंने पार्टी के अंदर अपने विरोधियों को रास्ते से हटाते हुए खुद को कम्यूनिस्ट पार्टी का प्रमुख भी घोषित कर दिया। शी जिनपिंग के शासनकाल में चीन में जनता में बगावत की भावना बढ़ती जा रही है और पार्टी के अंदर भी शी जिनपिंग को लेकर गुस्सा बढ़ता जा रहा है। जिसके लिए शी जिनपिंग लगातार अलग अलग देशों से विवाद करते रहते हैं, ताकि देश के लोगों में देश के मामलों को लेकर सवाल ना उठे। शी जिनपिंग को डर लगा रहता है, कि अगर वो विदेश यात्रा पर देश से बाहर जाते हैं, तो उनके खिलाफ बगावत हो सकती है, इसीलिए वो काफी कम विदेश यात्रा पर जाते हैं।

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