21 महीने से चीन छोड़कर बाहर नहीं निकले हैं शी जिनपिंग, सता रहा है तख्तापलट का डर?
पिछले 21 महीनों से राष्ट्रति शी जिनपिंग ने विदेश यात्रा नहीं की, उन्होंने चीन को नहीं छोड़ा है, क्या उन्हें तख्तापलट का डर सता रहा है?
बीजिंग, अक्टूबर 31: इस हफ्ते विश्व में दो बड़े और महत्वपूर्ण वैश्विक सम्मेलन हो रहे हैं, जिनमें एक जी-20 शिखर सम्मेलन शनिवार को खत्म हुआ है और दूसरा सम्मेलन जलवायु परिवर्तन को लेकर है, जिसका नाम सीओपी-26 है, जिसका आयोजना स्कॉटलैंड के ग्लासको शहर में यूनाइटेड नेशंस की तरफ से करवाया जा रहा है, जिसमें विश्व के तमाम देशों के राष्ट्राध्यक्ष शामिल होंगे, सिवाय चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने यूएस के राष्ट्रपति जो बाइडेन से व्यक्तिगत रूप से अभी तक मुलाकात नहीं की है और जल्द ही किसी भी समय की संभावना नहीं है। ऐसे में सवाल ये उठ रहे हैं, कि आखिर शी जिनपिंग देश से बाहर क्यों नहीं निकल रहे हैं?

21 महीनों से नहीं निकले बाहर
शी जिनपिंग ने 21 महीनों में चीन नहीं छोड़ा है और ये इंतजार अभी और लंबा होने वाला है। पहली नजर में देखने पर साफ जाहिर पड़ता है कि, शी जिनपिंग के देश से बाहर नहीं निकलने के पीछ कोरोना वायरस है, लेकिन गहराई से देखने पर इसके पीछे कई और कारण नजर आते हैं। सबसे बड़ी वजह जो देखने में मिल रही है, उसमें चीन की विदेश और घरेलू नीति में एक गहरे बदलाव को मजबूती के तौर पर महसूस किया जा सकता है। ऐसी रिपोर्ट है कि, शी जिनपिंग के नेतृत्व को अब चीन में वो सहयोग नहीं मिल रहा है, जो पहले मिवकी थी और कई रिपोर्ट्स में कहा गया है कि, शी जिनपिंग को उनके शर्तों के आधार पर अमेरिका या अमेरिका के सहयोगी देशों के खिलाफ कदम उठाने को लेकर देश में अब पहले जैसा समर्थन नहीं मिल रहा है।

अमेरिका का विकल्प नहीं बन पाया चीन
वैश्विक मंच से चीन ने लगातार दुनिया के सामने खुद को अमेरिका के विकल्प के तौर पर प्रोजेक्ट करने की कोशिश की, लेकिन शी जिनपिंग की इस महत्वाकांक्षा ने चीन की समस्याओं को काफी मुश्किल बना दिया। चीन अपने आप को अमेरिका का विकल्प तो नहीं ही बनाया पाया, इसके साथ ही दुनिया के बाकी देशों के साथ चीन के संबंध काफी खराब होते चले गये। इसके साथ ही चीन और अपने में ही और सिमटता चला गया और चीन के अधिकारी शी जिनपिंग की राजनीति, घरेलू राजनीति और शी जिनपिंग की रक्षा करने में व्यस्त हैं, जिसमें कम्यूनिस्ट पार्टी कांग्रेस की अगले साल होने वाली मीटिंग भी शामिल है, जिसमें शी जिनपिंग अगले पांच सालों तक और शासन करने के लिए दावा ठोकने वाले हैं, लेकिन शी जिनपिंग की विदेश नीति की चीन के अंदर काफी आलोचना की जा रही है।

'चीन की बंकर मानसिकता'
रोडियम ग्रुप से रिसर्चर और चीन पर रिसर्च करने वाले नूह बार्किन ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा कि, ''चीन में अभी बंकर मानसिकता है,"। शी जिनपिंग की वापसी के बाद देश में उनकी प्रतिष्ठा लगातार कम होती चली गई है और देश के अदर उनके राजनीतिक अवसरों को भी काफी कम कर दिया है। इसके साथ ही व्यापार, ताइवान और दूसरे मुद्दों पर भी शी जिनपिंग लगातार तनाव का सामना कर रहे हैं, जबकि, देश के बाहर चीन के खिलाफ अलग अलग गुटों का निर्माण किया जा रहा है। पिछले महीने ही अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया ने मिलकर 'ऑकस' का निर्माण किया है, जो सीधे तौर पर चीन के खिलाफ है। इसके साथ ही पिछले साल शी जिनपिंग ने यूरोपीय संघ से रिश्ते में सुधार करने के लिए रियायतों का ऐलान किया था, जिसका मकसद अमेरिका के साथ राजनीतिक टक्कर लेना था, लेकिन इसके बाद भी यूरोपीय संघ की तरफ से इस साल शी जिनपिंग को यूरोपीय संघ के नेताओं से मुलाकात करने का न्योता नहीं मिला।
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अंतर्राष्ट्रीय साख में जबरदस्त गिरावट
पांच साल पहले स्विट्जरलैंड के दावोस में 'वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम' के मंच पर जब तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और शी जिनपिंग ने एक मंच से दुनिया को संबोधित किया, तो एक बात की काफी चर्चा की गई थी। उस वक्त शी जिनपिंग ने खुद को बहुराष्ट्रीय व्यवस्था के संरक्षक के तौर पर पेश किया था, जबकि डोनाल्ड ट्रंप ने 'अमेरिका फर्स्ट' की बात की थी, लेकिन अब फिर से उस भाषण पर ध्यान दें, तो पता चलता है कि, अमेरिका एक बार फिर से खुद को वैश्विक नेता के तौर पर प्रोजेक्ट कर रहा है, तो चीन अपने पड़ोसियों से लड़ाई-झगड़ा करने, दुनिया में कोरोना वायरस फैलाने, घमंडी होने के आरोप झेल रहा है और वैश्विक मंच पर चीन की प्रतिष्ठा में जबरदस्त गिरावट आई है। वहीं, विश्लेषक एक बात का जिक्र और करते हैं। विश्लेषकों का कहना है कि, अगर शी जिनपिंग देश से बाहर जाते हैं, तो फिर वापसी में उन्हें 14 दिनों तक क्वारंटाइम में रहना होगा और अगर वो ऐसा नहीं करते हैं, तो फिर संदेश यही जाएगा, कि वो खुद को देश के हर कानून से खुद को उपर समझते हैं।

''अजेय नहीं हैं शी जिनपिंग''
कुछ दिन पहले भारत के रक्षा मामलों के विशेषज्ञ ब्रह्मा चेलानी ने एक ट्वीट कर चीन को लेकर दावा करते हुए कहा था कि, चीन के अंदर सत्तारूढ़ कम्यूनिस्ट पार्टी के अंदर संघर्ष चल रहा है। उन्होंने कहा था कि, ''अगर ये दावे सच हैं तो इसका मतलब ये हुआ कि, चीन में 'एक व्यक्ति शासन युग' की वापसी के बावजूद इस दावे में दम नहीं रहा है कि, शी जिनपिंग 'अजेय' और 'सर्वशक्तिमान' हैं। उन्होंने कहा था कि, ''इसका मतलब ये हुआ कि, घर में ही शी जिनपिंग के 'दुश्मन' मौजूद हैं''। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन चाहते हैं कि शी जिनपिंग के साथ उनकी व्यक्तिगत मुलाकात हो, लेकिन जिनपिंग ऑनलाइन मीटिंग करने के लिए तैयार हुए हैं, जिसकी तारीख अभी तक तय नहीं हुई है। ऐसे में सवाल प्रबल यही हैं, कि शी जिनपिंग को देश से बाहर निकलने में तख्तापलट का डर सता रहा है।

चीन की आर्थिक स्थिति में उथल-पुथल
इसके साथ ही चीन में पिछले कुछ महीनों से आर्थिक स्थिति में बुरी तरह से उथल पुथल मचा हुआ है और विश्लेषकों का कहना है कि, चीन की आर्थिक स्थिति गोता लगाने जा रही है और जिस तरह देश के अंदर रियल स्टेट कारोबारियों को परेशान किया गया है, उससे देश में रियल स्टेट कारोबार बुरी तरह से प्रभावित हुआ है और इसका असर सीधे तौर पर चीन की अर्थव्यवस्था पर पड़ना तय है। चीन की जीडीपी में करीब 25 से 30 प्रतिशत तक रियल स्टेट की हिस्सेदारी है। इसके साथ ही चीन के कई और कारोबरियों को बुरी तरह से सरकार प्रताड़ित कर रही है, जिसमें सबसे बड़ा नाम जैक मा का है। इसके साथ ही पार्टी के अंदर आंतरिक अनुशासन के नाम पर पार्टी के कई बड़े नेताओं को या तो बाहर का रास्ता दिखाया जा चुका है या फिर उनके पर कतरे जा चुके हैं, जिससे पार्टी के अंदर भी शी जिनपिंग को लेकर भारी असंतुष्टि फैली हुई है, लिहाजा ऐसा माना जाता है कि, देश में शक्ति संतुलन फिर से बनाने और तख्तापलट रोकने के लिए शी जिनपिंग ने फिलहाल विदेश यात्राएं बंद कर रखी हैं।
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