चीन में डॉक्टर, मोरक्को में मरीज: हजारों किलोमीटर की दूरी के बीच दुनिया की सबसे लंबी रिमोट सर्जरी कैसे की गई?
World's Longest Remote Surgery: चीन में बैठे एक फ्रांसीसी डॉक्टर ने 12,000 किलोमीटर दूर मोरक्को में एक मरीज पर प्रोस्टेट कैंसर की सर्जरी की। लेकिन उन्होंने ऐसा कैसे कर दिया?
डॉक्टर ने सर्जरी करने के लिए चीन में बने रोबोट का इस्तेमाल किया है। 16 नवंबर को, यूनेस अहलल ने दो घंटे से भी कम समय में सर्जरी पूरी की है, जिसमें देरी सिर्फ 100 मिलीसेकंड थी। सिन्हुआ समाचार एजेंसी के मुताबिक, इस अंतरमहाद्वीपीय सर्जरी ने दुनिया की अब तक की सबसे लंबी रिमोट सर्जरी का रिकॉर्ड बनाया है, जिसकी राउंड-ट्रिप ट्रांसमिशन दूरी 30,000 किलोमीटर से ज्यादा है।

हजारों किलोमीटर की दूरी से सर्जरी कैसे की गई?
सर्जरी को तौमाई रोबोट की मदद से अंजाम दिया गया, जिससे वास्तविक समय में दूर से ही सटीक कंट्रोल और हाई-डेफिनिशन इमेजिंग की सुविधा मिली।
यह अभूतपूर्व प्रक्रिया अक्टूबर में गुर्दे की सिस्ट के लिए की गई सर्जरी के बाद आई है, जिसमें तौमाई रोबोट ने शंघाई और बेनिन के कोटोनौ के बीच 27,000 किलोमीटर की राउंड-ट्रिप दूरी के साथ न्यूनतम इनवेसिव ऑपरेशन में मदद की थी।
इस सर्जरी के दौरान मोरक्कों में रोबोट के हाथ चीन के शंघाई में बैठे डॉक्टर के निर्देश को फॉलो कर रहे थे और उस आधार पर मरीज का ऑपरेशन कर रहे थे। इस दौरान रोबोट ने प्रोस्टेट ट्यूमर को हटाने से लेकर टांके लगाने तक का काम असाधारण सटीकता के साथ किया, जबकि संवहनी-तंत्रिका बंडल के संरक्षण और मूत्रमार्ग की लंबाई को बनाए रखना भी सुनिश्चित किया।
5G टेक्नोलॉजी के बजाय स्टैंडर्ड ब्रॉडबैंड कनेक्शन पर निर्भर होने के बावजूद, वीडियो फीड बिल्कुल सही चल रही थी। अहल्ला ने समाचार एजेंसी को बताया, कि काफी ज्यादा कठिन और मुश्किल सर्जरी थी, लेकिन रोबोट ने बेहतरीन और सटीक तरीके से ऑपरेशन किया।
सबसे महत्वपूर्ण बात ये है, कि इस सफल ऑपरेशन के बाद, रिमोट सर्जरी का यह रूप दुनिया भर में कुशल सर्जनों तक पहुंच बढ़ा सकता है, जिससे रोगियों को विदेश यात्रा करने की जरूरत खत्म हो सकती है। यह वरिष्ठ सर्जनों को जटिल प्रक्रियाओं को संभालने में जूनियर सहयोगियों को दूर से गाइडलाइंस देने के लिए एक मंच भी प्रदान करता है।

क्या रिमोट सर्जरी एक सामान्य प्रोसेस होगा?
टौमाई रोबोट बनाने वाली कंपनी माइक्रोपोर्ट मेडबॉट के अध्यक्ष हे चाओ ने सिन्हुआ समाचार एजेंसी को बताया, कि यह रिमोट टेक्नोलॉजी "भविष्य की चिकित्सा सेवाओं में क्रांतिकारी बदलाव लाने के लिए तैयार है।"
उन्होंने कहा, कि "हमारा लक्ष्य रिमोट सर्जरी को एक नियमित अभ्यास बनाना है।"
हाल के वर्षों में सर्जिकल रोबोट, चीनी टेक्नोलॉजी स्टार्टअप के लिए फोकस का एक प्रमुख क्षेत्र बनकर उभरे हैं। हाल ही में आई एक इंडस्ट्री रिपोर्ट के मुताबिक, चीन का सर्जिकल रोबोट बाजार 2026 तक 38.4 बिलियन डॉलर तक बढ़ने का अनुमान है, जिसकी वार्षिक वृद्धि दर वैश्विक औसत के मुकाबले ज्यादा होगी।
चीन में 5G नेटवर्क के तेजी से विस्तार से रिमोट सर्जरी कॉमन होने की संभावना है, जिससे यह स्वास्थ्य सेवाओं के लिए काफी व्यावहारिक होने की उम्मीद है। ही चाओ ने खुलासा किया, कि तौमाई रोबोट पहले से ही 250 से ज्यादा कामयाब 5G अल्ट्रा-लॉन्ग-डिस्टेंस सर्जरी में शामिल रहा है, जिसकी सफलता दर 100% है और कुल ट्रांसमिशन दूरी 400,000 किलोमीटर से ज्यादा है।
चीन के इंडस्ट्री और इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी के मुताबिक, अगस्त तक चीन में 4 मिलियन से ज्यादा 5G बेस स्टेशन थे।
मई में इस रोबोट को EU CE का सर्टिफिकेशन मिल गया है,जिसके बाद तौमाई रोबोट को अब यूरोलॉजी, सामान्य सर्जरी, थोरैसिक सर्जरी और स्त्री रोग संबंधी एंडोस्कोपी सहित विभिन्न सर्जरी में इस्तेमाल किया जा सकता है।
दुनिया की पहली ट्रांसकॉन्टिनेंटल रिमोट सर्जरी
इस साल की शुरुआत में, एक चीनी सर्जन ने दुनिया का पहला लाइव ट्रांसकॉन्टिनेंटल रिमोट रोबोटिक प्रोस्टेट रिमूवल करके इतिहास रच दिया था, यह ऑपरेशन बीजिंग में रहने वाले एक मरीज पर रोम में किया गया था।
साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, यह अभूतपूर्व टेलीसर्जरी, जिसमें 8,000 किमी की दूरी से सर्जरी की गई, वो इटली में सर्जिकल कंसोल को चीन में रोबोटिक आर्म्स से जोड़ने वाले 5G नेटवर्क और फाइबर-ऑप्टिक कनेक्शन के माध्यम से की गई। इस दौरान, सर्जन झांग जू ने इटली से प्रोस्टेटेक्टॉमी ऑपरेशन किया और एक मेडिकल टीम और एक बैकअप सर्जन, मरीज की मदद के लिए चीन में मौजूद थे। चीन में रोबोटिक भुजाओं ने कैंसरग्रस्त ऊतक को हटाने के लिए झांग द्वारा की गई हर मूवमेंट को फॉलो किया।
भारत में सर्जिकल सिस्टम ऑपरेशन
भारत ने भी अपना स्वदेशी सर्जिकल रोबोट सिस्टम, SSI मंत्र विकसित किया है, जिसे सुधीर श्रीवास्तव ने डिजाइन किया है। यह सिस्टम सर्जनों को रोबोटिक सर्जरी करने की अनुमति देता है, भले ही वे शारीरिक रूप से मरीज के करीब न हों। SSI मंत्र में पांच से ज्यादा अलग-अलग भुजाओं वाला एक मॉड्यूलर डिजाइन है, जो इसे हृदय शल्य चिकित्सा सहित जटिल प्रक्रियाओं के लिए बहुमुखी बनाता है।
श्रीवास्तव, जिन्होंने पहले दा विंची रोबोटिक सिस्टम पर काम किया था, वो एक ऐसा उपकरण बनाना चाहते थे जो भारत में किफायती और सुलभ दोनों हो, क्योंकि मौजूदा 90% सिस्टम अमेरिका और जापान में इस्तेमाल किए जाते हैं।
सुधीर श्रीवास्तव ने साल 2012 में भारत में पहला सर्जिकल रोबोट, एसएसआई मंत्र विकसित करना शुरू किया था और कामयाब रहे थे।
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