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सुअर का दिल लगाने वाले व्यक्ति की मौत के रहस्य की खुली गुत्थी, ये थी वजह

सुअर का दिल लगाने वाले पहले व्यक्ति डेविड बेनेट की मौत के रहस्य की गुत्थी लगभग खुल चुकी है। डॉक्टरों ने यह दावा किया है कि डेविड बेनेट के मौत की वजह पिग वायरस हो सकता है।

न्यूयॉर्क, 06 मई: सुअर का दिल लगाने वाले पहले व्यक्ति डेविड बेनेट की मौत के रहस्य की गुत्थी लगभग खुल चुकी है। डॉक्टरों ने यह दावा किया है कि डेविड बेनेट के मौत की वजह पिग वायरस हो सकता है। मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी ने अपनी नवीनतम रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट में प्रत्यारोपण विशेषज्ञों के हवाले से कहा गया है कि बेनेट की मौत की वजह संभवतः सुअर के दिल में मौजूद एक पोर्सिन वायरस है।

लंबे वक्त तक चलेगा वायरस मुक्त दिल

लंबे वक्त तक चलेगा वायरस मुक्त दिल

इस मामले पर अपनी रिपोर्ट में एमआईटी ने कहा है कि बेनेट द्वारा प्राप्त हृदय पोर्सिन साइटोमेगालो वायरस से प्रभावित था। प्रत्यारोपण से जुड़े सर्जन बार्टले ग्रिफिथ ने कहा कि हम जानने में लगे हैं कि बेनेट कैसे मरा। संभव है कि इसकी मुख्य वजह वह वायरस था। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर बेनेट की मौत में सुअर के वायरस की भूमिका थी तो इसका सीधा मतलब यह हो सकता है कि वायरस मुक्त हृदय अधिक समय तक चल सकता है। सर्जन ग्रिफिथ ने कहा कि अगर यह एक संक्रमण था तो भविष्य में हम इसे रोक सकते हैं।

महामारी फैलने का भी खतरा

महामारी फैलने का भी खतरा

इस बीच कुछ विशेषज्ञों में इस बात का भी डर है कि सुअर के विषाणुओं को मनुष्य में स्थानांतरिक करने से एक और महामारी शुरू हो सकती है। उन्हें डर है कि यदि एक वायरस रोगी के शरीर के अनुकूल हो जाता है तो फिर यह डॉक्टर तथा अन्य नर्सों में फैल सकता है। डॉक्टरों के मुताबिक मरीजों के लिए आजीवन निगरानी की आवश्यक्ता की चिंता काफी गंभीर साबित हो सकती है। हालांकि कुछ विशेषज्ञों के अनुसार ये वायरस मनुष्यों के लिए खतरनाक साबित नहीं होंगे। उनके मुताबिक ये वायरस मानव शरीर को प्रभावित नहीं कर सकते।

डॉक्टरों ने पहले ही दी थी चेतावनी

डॉक्टरों ने पहले ही दी थी चेतावनी

इससे पहले अमेरिकी डॉक्टरों ने मेडिकल जगत में ऐतिहासिक क्रांति करते हुए एक सुअर का दिल इंसान के शरीर में ट्रांसप्लांट किया था। यह कारनामा अमेरिका के मैरीलैंड अस्पताल में हुआ था। लेकिन सुअर का दिल लगाने वाले इस व्यक्ति की कुछ ही महीने बाद मौत हो गयी थी। यूनिवर्सिटी ऑफ मैरीलैंड मेडिकल स्कूल ने ट्रांसप्लांट के बाद कहा था कि इस ट्रांसप्लांट के बाद भी मरीज की बीमारी का इलाज फिलहाल अभी निश्चित नहीं है, लेकिन जानवरों से इंसानों में ट्रांसप्लांट की यह प्रक्रिया मील का पत्थर साबित होगी।

ट्रांसप्लांट का इंतजार कर रहे हजारों लोग

ट्रांसप्लांट का इंतजार कर रहे हजारों लोग

एपी की एक रिपोर्ट के अनुसार पिछले साल अमेरिका में 41 हजार से अधिक प्रत्यारोपण किए गए। इनमें से लगभग 3800 हृदयों का प्रत्यारोपण हुआ था। फिल्हाल एक लाख से अधिक लोग प्रत्यारोपण का इंतजार कर रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि, आने वाले दिनों में अंगदान की समस्या से बहुत बड़ी राहत मिल सकती है और लोगों के पैसे भी बहुत बचेंगे।

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