Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

अफ़ग़ानिस्तान के किन-किन इलाकों तक फैल गया है तालिबान?

अफ़गानिस्तान में तालिबान का क़ब्ज़ा
SAJJAD HUSSAIN/AFP via Getty Images
अफ़गानिस्तान में तालिबान का क़ब्ज़ा

साल 2001 में सत्ता से बेदखल होने के बाद से यह पहला मौक़ा है जब अफ़ग़ानिस्तान में इतने बड़े क्षेत्र पर तालिबान का कब्ज़ा है. यह कब्ज़ा भी महज़ दो महीनों की गतिविधियों का नतीजा है.

महज़ दो महीने में तालिबान ने अफ़ग़ानिस्तान के एक बड़े इलाक़े को अपने कब्ज़े में ले लिया है. साल 2001 के बाद से तालिबान के कब्ज़े में इतना बड़ा इलाक़ा कभी नहीं रहा है.

पिछले 20 वर्षों में अफ़ग़ानिस्तान पर तालिबान के नियंत्रण का नक्शा देखें तो यह लगातार बदलता रहा है.

https://www.youtube.com/watch?v=Ms9llCKt5bM

अमेरिकी सैनिकों की वापसी ने अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान के कब्ज़े को निश्चित तौर पर बढ़ावा दिया है. अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने घोषणा की है कि अगस्त के आख़िर तक अफ़ग़ानिस्तान की धरती पर मौजूद सभी विदेशी सैनिकों की वापसी हो जाएगी.

बीबीसी अफ़ग़ान सेवा ने इस संबंध में जो शोध किया है उससे पता चलता है कि उत्तर, उत्तर-पूर्व और मध्य प्रांतों जैसे ग़ज़नी और मैदान वर्दक सहित पूरे देश में अब तालिबानी चरमपंथियों की स्थिति मज़बूत हुई है. वे कुंदूज़, हेरात, कंधार और लश्कर गाह जैसे प्रमुख शहरों पर भी कब्ज़ा करने के बेहद क़रीब हैं.

तालिबान
EPA
तालिबान

नियंत्रण से हमारा तात्पर्य उन ज़िलों से है जहां प्रशासनिक केंद्र, पुलिस मुख्यालय और अन्य सभी सरकारी संस्थान को तालिबान नियंत्रित करता है.

अमेरिकी सैनिकों और उनके नेटो और क्षेत्रीय सहयोगियों ने नवंबर 2001 में तालिबान को सत्ता से बेदख़ल कर दिया था.

इस समूह ने अमेरिका में 11 सितंबर 2001 को हुए हमलों के मास्टर माइंड ओसामा बिन लादेन और अल-क़ायदा के अन्य लड़ाकों को पनाह दी थी.

लेकिन इस क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सैनिकों की मौजूदगी, अफ़ग़ान सुरक्षा बलों के लिए अरबों डॉलर के समर्थन और प्रशिक्षण के बावजूद तालिबान एकबार फिर संगठित हुआ और अब तो उसने धीरे-धीरे ही सही, लेकिन दूरदराज के भी कई क्षेत्रों में अपनी खोई ताक़त हासिल कर ली है.

तालिबान पारंपरिक तौर पर अपने मज़बूत गढ़ रहे दक्षिणी और दक्षिण पश्चिमी इलाक़ों कंधार, उत्तरी हेलमंड, उरूज़गान और जाबुल प्रांतों में ही प्रभावी था. लेकिन वो दक्षिणी फ़रयाब के पहाड़ी इलाक़ों और उत्तर-पूर्व में बदख़शां की पर्वत श्रंखला में भी मज़बूत था.

2017 में बीबीसी के एक शोध में कई ज़िलों में तालिबान के पूर्ण नियंत्रण का पता चला था. उस शोध से ये भी पता चला था कि तालिबान देश के कई दसूरे हिस्सों में भी सक्रिय है और कुछ इलाक़ों में हर सप्ताह हमले कर रहा था. इससे पूर्व के अनुमानों के मुताबिक तालिबान के कहीं अधिक ताक़तवर होने के संकेत मिले थे.

क्या तालिबान अपनी पकड़ मज़बूत कर रहा है?

आज तालिबान के नियंत्रण में 2001 के बाद से सबसे बड़ा इलाक़ा है, लेकिन ज़मीन पर हालात बहुत नाज़ुक हैं.

अफ़ग़ानिस्तान की सरकार कई ऐसे ज़िलों से स्वयं ही पीछे हट गई जहां वो तालिबान के दबाव को झेलने की स्थिति में नहीं थी. वहीं दूसरे ज़िलों पर तालिबान ने ताक़त के दम पर क़ब्ज़ा किया है.

कुछ इलाक़ों में जहां सरकारी बल फिर से संगठित हो सके हैं या स्थानीय मिलीशिया को संगठित किया है वहां सरकार ने गंवाए गए इलाक़े अपने नियंत्रण में लिए हैं या वहां भीषण लड़ाई चल रही है.

अफ़गानिस्तान में तालिबान का क़ब्ज़ा
BBC
अफ़गानिस्तान में तालिबान का क़ब्ज़ा

हालांकि अफ़ग़ानिस्तान से अधिकतर अमेरिकी सैनिक वापस लौट चुके हैं, कुछ सीमित संख्या में सैनिक काबुल में मौजूद हैं और अमेरिकी लड़ाकू विमानों ने हाल के दिनों में तालिबान के ठिकानों पर हवाई हमले भी किए हैं.

अफ़ग़ानिस्तान के सरकारी सैन्यबलों के नियंत्रण में वही शहर और ज़िले हैं जो या तो मैदनी इलाक़ों में है या फिर नदियों की घाटियों में है. यही वो इलाक़े भी हैं जहां देश की अधिकतर आबादी रहती है.

जिन इलाक़ों पर तालिबान का नियंत्रण है वहां आबादी बहुत कम है. कई जगह तो एक वर्ग किलोमीटर में पचास तक लोग ही रहते हैं.

अफ़गानिस्तान में तालिबान का क़ब्ज़ा
BBC
अफ़गानिस्तान में तालिबान का क़ब्ज़ा

सरकार का कहना है कि उन सभी शहरों में सैनिक भेजे गए हैं जहां तालिबान के आने का ख़तरा है. इसके अलावा देशभर में एक महीने का नाइट कर्फ्यू भी लगा दिया गया है ताकि तालिबान को आगे बढ़ने से रोका जा सके.

हालांकि तालिबान हेरात और कंधार जैसे शहरों के नज़दीक आ गए हैं, लेकिन वो अभी तक इनमें से एक पर भी नियंत्रण नहीं कर सके हैं, पर जिन इलाक़ों पर उन्होंने क़ब्ज़ा किया है उनके दम पर वो शांतिवार्ता में अपनी स्थिति को मज़बूत कर सकते हैं. यहां से उन्हें टैक्स भी मिल सकता है और अन्य ज़रिए भी हासिल हो सकते हैं.

तालिबान
Getty Images
तालिबान

इस साल अब तक हिंसा की वजह से रिकॉर्ड संख्या में आम नागरिक मारे गए हैं. संयुक्त राष्ट्र अब तक मारे गए 1600 नागरिकों के लिए तालिबान और दूसरे सरकार विरोधी तत्वों को ही ज़िम्मेदार मानता है. हिंसा की वजह से बड़ी तादाद में लोगों को घर भी छोड़ना पड़ रहा है. इस साल की शुरुआत से ही तीन लाख से अधिक लोग अपना घर छोड़ चुके हैं.

संयुक्त राष्ट्र की शरणार्थी मामलों की संस्था यूएनएचसीआर के मुताबिक बदख़शां, कुंदूज़, बल्ख़, बाग़लान और ताख़र में बड़ी तादाद में लोग विस्थापित हो रहे हैं. यहां बड़े इलाक़ों पर तालिबान ने नियंत्रण कर लिया है.

अफ़गानिस्तान
BBC
अफ़गानिस्तान

कुछ लोग पास के गांवों या ज़िलों की तरफ़ भाग जाते हैं और कुछ दिन बाद लौट आते हैं. हालांकि बहुत से ऐसे हैं जो लंबे समय तक विस्थापित रह रहे हैं.

समाचार एजेंसी एएफ़पी की रिपोर्टों के मतुबाकि तालिबान के हमलों की वजह से अफ़ग़ानिस्तान के सैनिकों और नागरिकों ने पड़ोसी देश ताजिकिस्तान में शरण ली है.

अफ़गानिस्तान में तालिबान का क़ब्ज़ा
BBC
अफ़गानिस्तान में तालिबान का क़ब्ज़ा

तालिबान ने जिन सीमा चौकियों पर क़ब्ज़ा किया है वहां से हो रहे व्यापार पर वही टैक्स वसूल रहे हैं.

हालांकि ये टैक्स कितना है इसका अंदाज़ा लगाना मुश्किल है क्योंकि युद्ध की स्थिति की वजह से कारोबार भी कम हुआ है, लेकिन एक अनुमान के मुताबिक ईरान की सीमा पर स्थित इस्लाम क़ला से ही हर महीने 2 करोड़ डॉलर तक का टैक्स जुटाया जा सकता है.

अफ़गानिस्तान में तालिबान का क़ब्ज़ा
BBC
अफ़गानिस्तान में तालिबान का क़ब्ज़ा

आयात-निर्यात पर हुए असर की वजह से बाज़ार में चीज़ों के दाम भी बढ़ रहे हैं ख़ासकर ईंधन और रोज़मर्रा की ज़रूरतों की चीज़ें महंगी हो रही हैं.

ये भी पढ़ें:-

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+