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Super Flower Moon of 2020: विश्व ने किया साल के आखिरी 'सुपरमून' का दीदार, देखें तस्वीरें

नई दिल्ली। आज का दिन बेहद खास है क्योंकि आज दुनिया ने साल का आखिरी 'सुपरमून' का दीदार किया, अब अगला 'सुपरमून' 27 अप्रैल 2021 को दिखाई देगा, वैज्ञानिकों ने इस 'सुपरमून' को 'सुपर फ्लावर मून', नाम दिया था ,'सुपरमून' ग्लोबल टाइम पर सुबह 6 बजकर 45 मिनट पर यानि की भारतीय समयानुसार शाम 4 बजकर 15 मिनट पर दिखाई दिया लेकिन धूप की वजह से भारतीय लोग इसका साक्षात दीदार नहीं कर पाए।

'सुपरमून' के दौरान चांद काफी सुंदर और चमकीला नजर आया

'सुपरमून' के दौरान चांद काफी सुंदर और चमकीला नजर आया

आपको बता दें कि 'सुपरमून' के दौरान चांद काफी सुंदर और चमकीला नजर आया और इस वक्त पृथ्वी से इसकी दूरी 361,184 किमी रह गई, गौरतलब है कि पृथ्वी की कक्षा में घूमते हुए चंद्रमा जब धरती के सबसे नजदीक आ जाता है तो उस स्थिति को 'पेरीजी' और कक्षा में जब सबसे दूर होता है तो उस स्थिति को 'अपोजी' कहते हैं, आज चांद 'पेरीजी' है और इस कारण वो बड़ा दिखाई दिया।

साल का दूसरा चंद्र ग्रहण अगले महीने

आज से करीब एक माह बात साल का दूसरा चंद्र ग्रहण लगने वाला है, ये साल का दूसरा ग्रहण होगा, चंद्रग्रहण 5 जून 2020 को लगेगा, इस साल जून के महीने में ही सूर्य और चंद्र दोनों ही ग्रहण लगने वाले हैं।

6 जून से 5 जुलाई के मध्य ही तीन ग्रहण

6 जून से 5 जुलाई के मध्य ही तीन ग्रहण

5 जून को चंद्र ग्रहण लगने के बाद 21 जून को सूर्य ग्रहण लगेगा, इन दोनों ही ग्रहणों को भारत में देखा जा सकेगा, इस साल पड़ने वाले ग्रहणों की बात करें तो इस वर्ष 6 ग्रहण लगेंगे, इस वर्ष 6 जून से 5 जुलाई के मध्य ही तीन ग्रहण लगने जा रहे हैं।

चांद का ज्यादातर हिस्सा रेगोलिथ से ढंका है

चांद का ज्यादातर हिस्सा रेगोलिथ से ढंका है


अपोलो अभियानों से प्राप्त कुछ तस्वीरों से पता चला था कि चांद का ज्यादातर हिस्सा रेगोलिथ से ढंका है जो एक प्रकार की धूल है, लेकिन ब्राउन यूनिवर्सिटी के ताजा अध्ययन से पता चला है कि चंद्रमा की सतह पर कुछ जगहों पर बड़े पत्थर हैं जो यह बताते हैं कि वहां कुछ दरारें बनी हैं।

धर्मों में चांद का खास महत्व

अलग अलग धर्मों में चांद का अपना एक महत्व होता है। हिंदू धर्म में चांद को चंद्र देवता के रूप में मानते है। वहीं मुस्लिम धर्म में ईद का त्योहार चांद पर आधारित होता है। भारत में कई ऐसे त्योहार है जो चांद पर आधारित है। इन व्रत त्योहारों की पूजा चांद के दर्शन करने के बाद ही संपन्न मानी जाती है।

चंद्रमा से आसमान नीला नहीं बल्कि काला दिखायी देता है

चंद्रमा से आसमान नीला नहीं बल्कि काला दिखायी देता है

  • चंद्रमा से आसमान नीला नहीं बल्कि काला दिखायी देता है क्योंकि वहां प्रकाश का प्रकीर्णन नहीं है।
  • चन्द्रमा की कक्षीय दूरी, पृथ्वी के व्यास का 30 गुना है इसीलिए आसमान में सूर्य और चन्द्रमा का आकार हमेशा एक जैसा नजर आता है।
  • कहते हैं आज से 4.5 अरब साल पहले पृथ्वी से हुई एक टक्कर के बाद चंद्रमा का जन्म हुआ था।

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