सर्दियों में क्या रूस पर भारी पड़ेगी यूक्रेन की सेना?

बर्फभरी खाई में यूक्रेन के सैनिक
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बर्फभरी खाई में यूक्रेन के सैनिक

लगभग एक महीने बाद, यूक्रेन में सर्दियां आ जाएंगी और ये रूस के क़ब्ज़े से अपने इलाक़ों को छुड़ाने की कोशिश कर रहे यूक्रेन के सैन्य बलों की राह में रुकावट बन सकती है.

रूस बिजली संयंत्रों और तेल डीपो पर हमले करके यूक्रेन के आम लोगों को ठंड में ठिठुरने के लिए मजबूर भी कर सकता है.


यूक्रेन में कितनी ठंड पड़ती है?

  • दिसंबर से मार्च के बीच यूक्रेन में औसतन तापमान -4.8 डिग्री सेल्सियस से 2 डिग्री सेल्सियस तक होता है.
  • औसतन दिसंबर में 14 दिन बर्फ़ पड़ती है. जनवरी में 17 दिन बर्फ़ पड़ती है और फ़रवरी में 15 दिन बर्फ़ पड़ती है.
  • हर महीने औसतन 1.5 मीटर बर्फ़ यूक्रेन में पड़ती है.
  • हालांकि, देश के दक्षिणी हिस्से में और काला सागर के तटीय इलाक़ों में उत्तरी इलाक़ों की तुलना में कम ठंड पड़ती है.

सर्दियों का लड़ाई पर क्या असर हो सकता है?

राजधानी कीएव में, तापमान अभी भी जमा देने वाला है, जनवरी में यहां औसतन तापमान -3.8 डिग्री सेल्सियस होता है और रात में ये औसतन -6.1 सेल्सियस तक गिर जाता है.

हालांकि, दक्षिणी इलाक़े खेरसोन में, जनवरी में औसतन तापमान इससे कहीं अधिक -0.9 डिग्री सेल्सियस तक होता है. यहां औसतन न्यूनतम तापमान -3.7 डिग्री रहता है.

इसका मतलब ये है कि देश के उत्तर-पूर्वी इलाक़े के मोर्चों पर तापमान इतना कम होगा कि मैदान बर्फ़ से जम जाएंगे.

हालांकि, खेरसोन के पास के मोर्चों पर, सर्दियों में होने वाली बर्फ़बारी और बारिश मैदान को कीचड़ में बदल सकती है.


लड़ने वाले सैनिकों के लिए सर्दी के क्या मायने होंगे?

कीचड़ भरे मैदान और भारी बर्फ़ की वजह से सैनिकों और उनके वाहनों को आगे बढ़ने में मुश्किलें होंगी.

मैकेंज़ी इंटेलिजेंस सर्विस के मुख्य अधिकारी फ़ोर्ब्स मैकेंज़ी कहते हैं कि इससे यूक्रेन को नुक़सान हो सकता है क्योंकि ये उनके आगे बढ़ने की तेज़ गति को रोक सकता है.

वो कहते हैं, "यूक्रेन के लोग चाहेंगे की सर्दी बहुत ज़्यादा पड़े ताकि मैदान जम जाएं और वो यहां तेज़ी से आगे बढ़ सकें और रूसी सैन्यबलों को पछाड़ सकें."

"वहीं रूसी ये चाहेंगे कि सर्दी कम पड़े और बारिश हो ताकि यूक्रेन के सैनिक और वाहन फंस जाएं."

अक्तूबर में हुई भारी बारिश की वजह से खेरसोन में यूक्रेन का अभियान पहले से ही प्रभावित है.

रूस और यूक्रेन दोनों के लिए ही सबसे बड़ी समस्या होगी अपनी सेनाओं के लिए रसद भेजते रहना.

इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रैटेजिक स्टडीज़ के सीनियर फेलो बेन बेरी कहते हैं, "सेना को सर्दियों में अधिक भोजन की ज़रूरत होती है और गर्म रखने के लिए अधिक ईंधन भी चाहिए होता है."

वो कहते हैं, "हालांकि दोनों ही पक्ष सर्दियों के आदी हैं और उनके हथियार और उपकरण भी सर्दियों को ध्यान में रखकर डिज़ाइन किए गए हैं, ऐसे में सर्दियां सैनिकों को पूरी तरह से लड़ने से नहीं रोक पाएंगी."

सर्दियों का लड़ाई पर क्या असर हो सकता है?

कई सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि सर्दियों के दौरान, दोनों ही देशों की सेनाएं ज़मीन पर लड़ाई के बजाए तोपों से बमबारी पर अधिक ध्यान देंगी.

किंग्स कॉलेज लंदन की डिफेंस रिसर्चर मारिना मिरोन कहती हैं, "सर्दियों में रसद पहुंचाना मुश्किल होता है और सेनाएं कमी का सामना कर सकती हैं."

"दोनों ही पक्ष सप्लाई लाइन को तोड़ने और रसद को बर्बाद करने के लिए सप्लाई डीपो और वाहनों पर लंबी दूरी की तोपों और ड्रोन से हमला कर सकते हैं ताकि दुश्मन के संसाधनों को नष्ट किया जा सके."

इन सर्दियों में दोनों ही पक्ष तोपों से हमला करके एक-दूसरे की सप्लाई लाइनों को बर्बाद करने के प्रयास कर सकते हैं.
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इन सर्दियों में दोनों ही पक्ष तोपों से हमला करके एक-दूसरे की सप्लाई लाइनों को बर्बाद करने के प्रयास कर सकते हैं.

हालांकि, कोहरा और बर्फबारी दोनों ही पक्षों की एक-दूसरे की तोपों और निशानों को देखने की क्षमता को प्रभावित करेंगे, अगर वो इंफ्रा रेड इमेजिंग उपकरणों का इस्तेमाल नहीं कर रहे होंगे तो.

रूस और यूक्रेन दोनों के ही सैन्यबल ड्रोन पर बहुत हद तक निर्भर हैं और इनमें से कई ऐसे हैं जिनमें सामान्य कैमरा ही लगे होते हैं.

क्या इन सर्दियों में रूस यूक्रेन के नागरिकों को निशाना बनाएगा?

रूस पहले ही नागरिक ठिकानों और संसाधनों पर कई हमले कर चुका है. रूस ने यूक्रेन की जल आपूर्ति और बिजली उत्पादन को निशाना बनाया है.

थिंक टैंक चैटहैम हाउस में यूक्रेन फोरम की प्रमुख ओर्सिया लुत्सेविच कहती हैं कि रूस सर्दियों में भी इस तरह के हमले जारी रखेगा.

"यूक्रेन के नागरिकों को आशंका है कि यूक्रेन के इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमले जारी रहेंगे ताकि उन्हें गर्मी से दूर रखा जाए."

ओर्सिया कहती हैं, "अब लोग ईंधन इकट्ठा कर रहे हैं जैसे कि लकड़ी. वो स्टोव और अलाव ख़रीद रहे हैं. अस्पताल जैसे स्थान अपने स्वयं के जेनरेटर ख़रीद रहे हैं."

रूस की यूक्रेन से निपटने की रणनीति इस समय जनरल सर्गेई सुरोविकीन बना रहे हैं. जनरल सर्गेई यूक्रेन में रूसी सैन्य बलों के नए कमांडर हैं.

उन्हेंने 'तबाही का जनरल' भी कहा जाता है क्योंकि सीरिया और दूसरे हिस्से में जब उन्होंने ऑपरेशन की कमान संभाली थी तो जमकर तबाही हुई थी.

जनरल सर्गेई सुरोविकीन राष्ट्रपति पुतिन के नए कमांडर इन चीफ़ हैं.
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जनरल सर्गेई सुरोविकीन राष्ट्रपति पुतिन के नए कमांडर इन चीफ़ हैं.

मिरोन कहती हैं, उनका मक़सद संभवतः यूक्रेन के लोगों के हौसले तोड़ना होगा.

वो कहती हैं, "रूस को लगता है कि अगर लोग ठंड में ठिठुर रहे होंगे और भूखे मर रहे होंगे तो हो सकता है वो अपनी सरकार के ख़िलाफ़ ही विद्रोह कर दें."

वगीं लुत्सेविच कहती हैं, "यूक्रेन सर्दियों के लिए पूरी तरह तैयार है."

"गैस भंडार भरे हुए हैं और यूक्रेन के पास डीज़ल जैसे ईंधन की पर्याप्त आपूर्ति है."

"लोगों को लगता है कि रूस ये युद्ध नहीं जीत रहा है और अगर वो किसी तरह सर्दियां काट लेते हैं तो आगे के मौसम में उन्हें रूस के ख़िलाफ़ और अधिक कामयाबी मिल सकती है."

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