प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अक्टूबर में जाएंगे पाकिस्तान? विदेश मंत्रालय का आया बयान, लेकिन क्या है संभावना?
PM Modi Pakistan: भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) ने शुक्रवार को कहा है, कि उसे इस्लामाबाद में होने वाले शंघाई सहयोग संगठन (SCO Summit) शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए, पाकिस्तान की तरफ से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दिए गए निमंत्रण पर उसके पास कोई अपडेट नहीं है।
हालांकि, विदेश मंत्रालय की साप्ताहिक प्रेस कॉन्फ्रेंस के इस बात की पुष्टि की गई, कि पाकिस्तान ने भारतीय प्रधानमंत्री को न्योता भेजा है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने संवाददाताओं से कहा, कि "हां, हमें एससीओ बैठक के लिए पाकिस्तान से निमंत्रण मिला है। हमारे पास इस पर कोई अपडेट नहीं है। हम आपको बाद में स्थिति से अवगत कराएंगे।" विदेश कार्यालय के प्रवक्ता के एक बयान के अनुसार, पाकिस्तान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस अक्टूबर में इस्लामाबाद में शंघाई सहयोग संगठन के शासनाध्यक्षों की परिषद की बैठक में भाग लेने के लिए आधिकारिक तौर पर निमंत्रण दिया है।
आपको बता दें, कि शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के शासनाध्यक्षों की परिषद (CHG) की रोटेशनल अध्यक्षता के तौर पर इस साल पाकिस्तान, अक्टूबर में दो दिवसीय एससीओ शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है।
पाकिस्तान के विदेश कार्यालय की प्रवक्ता मुमताज जहरा बलूच ने कहा है, कि "15-16 अक्टूबर को होने वाली बैठक में भाग लेने के लिए देशों के प्रमुखों को निमंत्रण भेजा गया है। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी निमंत्रण भेजा गया है।"
भारत, चीन, रूस, पाकिस्तान, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान से मिलकर बना एससीओ एक प्रभावशाली आर्थिक और सुरक्षा ब्लॉक है जो सबसे बड़े अंतर-क्षेत्रीय अंतरराष्ट्रीय संगठनों में से एक के रूप में उभरा है। इस प्रमुख क्षेत्रीय समूह के हिस्से के रूप में, पाकिस्तान और भारत दोनों शिखर बैठकें कर सकते हैं।
भारत ने पिछले साल एससीओ शिखर सम्मेलन की मेजबानी की थी, जिसे वर्चुअल मोड में आयोजित किया गया था और इसमें पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने वीडियो लिंक के जरिए भाग लिया था। हालांकि, उससे पहले जब गोवा में एससीओ विदेश मंत्रियों की बैठक हुई थी, तो उसमें शामिल होने के लिए तत्कालीन पाकिस्तानी विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो भारत आए थे।
पीएम मोदी के पाकिस्तान जाने की क्या है संभावना?
इस्लामाबाद और नई दिल्ली के बीच तनावपूर्ण संबंधों का एक लंबा इतिहास रहा है, जिसका मुख्य कारण कश्मीर मुद्दा और पाकिस्तान से निकलने वाले सीमा पार आतंकवाद है। भारत लगातार कहता रहा है, कि वह पाकिस्तान के साथ सामान्य पड़ोसी संबंध चाहता है, जबकि इस बात पर जोर देता रहा है, कि इस तरह के संबंधों के लिए आतंक और शत्रुता से मुक्त माहौल बनाने की जिम्मेदारी इस्लामाबाद की है। 5 अगस्त 2019 को भारतीय संसद द्वारा अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के बाद पाकिस्तान ने भारत के साथ अपने संबंधों को काफी कम कर दिया है।
वहीं, एक दिन पहले ही भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने दो टूक शब्दों में पाकिस्तान को लेकर कहा है, कि 'लगातार बातचीत का युग खत्म हो चुका है'। और उनका ये बयान इस बात का एक इशारा हो सकता है, कि भारत ने अब पाकिस्तान को महत्व देना बंद कर दिया है। पीएम मोदी साल 2015 में अचानक पाकिस्तान पहुंचे थे और उनका पाकिस्तान जाना इसी बात का संकेत था, कि भारत ने एक बार फिर से कोशिश की थी, कि दोनों देशों के संबंध अच्छे हो जाएं, लेकिन पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद में कोई कमी नहीं आई।
पिछली बार जब एससीओ शिखर सम्मेलन भारत में हुआ था, तो मोदी सरकार ने उसका आयोजन वर्चुअली कराया था और इसके पीछे की वजहों में एक वजह ये बताया गया, कि अगर प्रधानमंत्री शहबाज भारत आते, तो मीडिया फोकस एससीओ से हटकर उनके भारत दौरे पर चला जाता, जैसा की बिलावल भुट्टो के दौरे के समय हुआ था। और माना गया, कि भारत ऐसा तमाशा नहीं करना चाहता था और इसीलिए वर्चुअल बैठक का आयोजन किया गया।
ऐसा माना जा रहा है, कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी शायद ही पाकिस्तान का दौरा करेंगे और ज्यादा उम्मीद इस बात को लेकर है, कि वो वर्चुअल तरीके से इस शिखर सम्मेलन में शामिल हो सकते हैं।












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