Explainer: मोदी के तीसरे कार्यकाल में भारत तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था, जापान-जर्मनी छूट पाएंगे पीछे?
Will India be 3rd largest economy in 3rd Modi term: बुधवार को नई दिल्ली में आयोजित इंटरनेशनल एग्जिबिशन-कम कन्वेंशन सेंटर (IECC) का उद्घाटन करते हुए, प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, कि जब उन्होंने 2014 में देश का कार्यभार संभाला था, तो भारत दुनिया की दसवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था थी।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा, कि उनके दूसरे कार्यकाल के दौरान भारत, दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है और आगे प्रधानमंत्री मोदी ने दावा करते हुए कहा, कि "मैं आश्वस्त करना चाहता हूं, कि हमारी सरकार के तीसरे कार्यकाल के दौरान भारत दुनिया की शीर्ष तीन अर्थव्यवस्थाओं में से एक होगा।"
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का ये दावा, कि उनके तीसरे कार्यकाल में भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा, इसमें कितना दम है, आइये जानने की कोशिश करते हैं।

भारत बन पाएगा तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था?
किसी भी देश की अर्थव्यवस्था का आकार, सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) से मापा जाता है, जो किसी देश की भौगोलिक सीमाओं के भीतर उत्पादित सभी वस्तुओं और सेवाओं का बाजार मूल्य होता है।
दुनिया की पांच सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की बात करें,
अमेरिका की अर्थव्यवस्था 2023 में 26 हजार 855 अरब डॉलर है, जो साल 2027 में बढ़कर 31 हजार 92 अरब डॉलर तक पहुंच सकती है।
चीन की अर्थव्यवस्था साल 2923 में 19 हजार 374 अरब डॉलर है, जो 2027 में बढ़कर 25 हजार 722 अरब डॉलर तक पहुंच सकती है
तीसरे नंबर पर अभी जापान है, जिसकी अभी की अर्थव्यवस्था 4 हजार 510 अरब डॉलर है, जो 2027 तक 5 हजार 77 अरब डॉलर तक जा सकती है
वहीं, चौथे नंबर पर अभी जर्मनी है, जिसकी मौजूदा अर्थव्यवस्था 4 हजार 309 अरब डॉलर है, जिसके साल 2027 तक 4 हजार 947 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान लगाया गया है।
वहीं, भारत की अर्थव्यवस्था इस वक्त 3 हजार 737 अरब डॉलर है, जिसके साल 2027 तक 5 हजार 153 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान लगाया गया है और इस हिसाब से, भारत 2027 में दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का ये दावा बिल्कुल ठीक है।
ये आंकड़े अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष यानि आईएमएफ के अनुमानित आंकड़े हैं, जिसमें भारतीय अर्थव्यवस्था के साल 2027 तक तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने का अनुमान लगाया गयाहै। जो कि पीएम के रूप में मोदी के तीसरे कार्यकाल के बीच में हो सकता है और इस दरम्यान भारत के, जर्मनी (वर्तमान में चौथा सबसे बड़ा) और जापान (वर्तमान में तीसरा सबसे बड़ा) दोनों से आगे निकलने की उम्मीद है।

भारत कैसे तेजी से आगे निकल रहा है?
भारत कैसे तेजी से इतने सारे देशों से आगे निकल रहा है, इसको लेकर दो तरह बातें हैं।
2014 से 2023 के बीच भारत की जीडीपी 83% बढ़ी है। वहीं इस दौरान चीन की अर्थव्यवस्था में 84 प्रतिशत का इजाफा हुआ है, यानि भारत का विकास चीन से थोड़ा ही कम रहा है।।
जबकि, इस अवधि के दौरान अमेरिका की जीडीपी में 54% की वृद्धि हुई है। हालांकि, अमेरिका, चीन और भारत को छोड़ दिया जाए, तो दुनिया की टॉप-10 अर्थव्यवस्थाओं वाले देशों में सात देश की अर्थव्यवस्था इस अवधि में या तो स्थिर बनी हुई है, या फिर उनमें गिरावट देखी गई है।
साल 2014 में जब नरेन्द्र मोदी भारत के प्रधानमंत्री बने थे, उसके बाद के 9 सालों में भारत ने जिन पांच देशों को जीडीपी के मामले में पीछे छोड़ा है, उनमें से ब्रिटेन की कुल जीडीपी में पिछले 9 सालों में सिर्फ 3% की वृद्धि हुई है, जबकि फ्रांस की 2%, रूस की 1% की वृद्धि हुई है।
वहीं, इटली की जीडीपी बिल्कुल भी नहीं बढ़ी है, जबकि ब्राज़ील की जीडीपी में 15% की गिरावट आई है।
यानि, भारत की अर्थव्यवस्था में जो तेजी है, वो इन देशों के मुकाबले कई गुना ज्यादा है। जबकि, बाकी देशों की अर्थव्यवस्था ठहरी रही है। इस ठहराव की सबसे प्रमुख वजह है, साल 2008-09 का ग्लोबल फाइनेंशियल क्राइसिस (जीएफसी) था।
जीएफसी ने भारत की अर्थव्यवस्था को भी प्रभावित किया था, लेकिन यह प्रभाव उतना विनाशकारी नहीं था जितंना यूरोपीय देशों के लिए था।
लिहाजा, जीएफसी का प्रभाव और अर्थव्यवस्था की यह कहानी आने वाले सालों में भी जारी रहने की संभावना है।
पिछले 9 सालों में भारत का विकास 83 प्रतिशत हुआ है, इसके बावजूद, कि भारत की अर्थव्यवस्था उतनी तेजी से नहीं बढ़ रही है, जितना खुद भारत सरकार का अनुमान रहा है। भारत सरकार की कोशिश अर्थव्यवस्था की तेजी को 8 प्रतिशत से 9 प्रतिशत तक ले जाना है।
वहीं, गणित के मुताबिक, अगर भारत सिर्फ 6 प्रतिशत कि दर से भी अपनी अर्थव्यवस्था का विकास करता है, तो साल 2027 तक भारत की जीडीपी, जर्मनी और जापान से आगे निकलने के लिए पर्याप्त होगी।
साल 2027 में भारत की जीडीपी 2023 की तुलना में लगभग 38% ज्यादा होगी, जबकि जापान और जर्मनी की जीडीपी उनके 2023 के स्तर से सिर्फ 15% ज्यादा होगी। यह अपेक्षाकृत तेज़ वृद्धि भारत को इन देशों से आगे निकलने और 2027 तक तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने में मदद करेगी।

भारत की विकास की रफ्तार में धीमापन
आईएमएफ के इस आंकड़े में एक और बेहद दिलचस्प बात है और वो ये, कि साल 2014 से 2023 के बीच जहां भारत की जीडीपी में 83 प्रतिशत का इजाफा हुआ है, वहीं साल 2004 से 2014 के बीच, जब मनमोहन सिंह भारत के प्रधानमंत्री थे, उस अवधि में भारत की जीडीपी का विकास 183 प्रतिशत था।
लिहाजा, 2014 से 2024 के बीच भारत की विकास की रफ्तार काफी कम रही है।
वहीं, भारत के विकास की रफ्तार का दूसरा पहलू ये है, कि रैंक 10 से रैंक 5 तक जाना अपेक्षाकृत आसान था, क्योंकि पांचवें से 10वें रैंक वाले देशों की जीडीपी 1 ट्रिलियन डॉलर के अंदर सिमट रही थी।
लेकिन, तीसरी रैंक और पहले दो रैंक के बीच का अंतर काफी ज्यादा है। 2027 में, भारत की जीडीपी चीन की जीडीपी का पांचवां हिस्सा (20 ट्रिलियन डॉलर कम) और अमेरिका का छठा हिस्सा (26 ट्रिलियन डॉलर कम) होगी।
लेकिन, अगर इस जीडीपी के आंकड़े को थोड़ा सा साइड में रखकर प्रति व्यक्ति इनकम से इसकी तुलना करें, तो भारत कतार में काफी पीछे चला जाएगा।
प्रति व्यक्ति इनकम के मामले में भारत टॉप-10 जीडीपी आंकड़े वाले देशों से बाहर चला जाता है। भारत में प्रति व्यक्ति इनकम 2600 डॉलर प्रति वर्ष है, जबकि ब्रिटेन में 47,000 डॉलर और ब्राजील में 10,000 डॉलर और इटली में 37,000 डॉलर प्रति व्यक्ति इनकम है।












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