UK की 'भारत विरोधी' पार्टी ने बदला स्टैंड, चुनाव से पहले लेबर पार्टी की इंडिया के करीब आने की कोशिश?
UK Labour Party on India: ब्रिटेन की विपक्षी लेबर पार्टी के नेता कीर स्टार्मर ने भारत और ब्रिटिश भारतीयों के साथ घनिष्ठ संबंध विकसित करने की अपनी पार्टी की कोशिश को हाइलाइट करते हुए कहा है, कि चुनाव के बाद फिर से लेबर पार्टी की सरकार बनाने के लिए "भारत के साथ रणनीतिक साझेदारी महत्वपूर्ण होगी"।
यूनाइटेड किंगडम में जनवरी 2025 के आसपास चुनाव होंगे और उससे पहले लेबर पार्टी का भारत को लेकर रवैया बदल गया है। भारत विरोधी बयानबाजी में माहिर लेबर पार्टी का रूख अचानक चुनाव से पहले क्यों बदल गया है और लेबर पार्टी को अचानक भारत के साथ मजबूत संबंध विकसित करने का ख्याल क्यों आने लगा है, आइये समझते हैं...

लेबर पार्टी के बयान का मतलब क्या है?
सोमवार (26 जून) को लंदन में सहयोग के लिए भारतीय और ब्रिटिश प्रतिनिधियों के एक सम्मेलन, इंडिया ग्लोबल फोरम के यूके-इंडिया वीक 2023 में बोलते हुए, ब्रिटिश सांसद कीर स्टार्मर ने कहा, कि "लेबर पार्टी में बहुत सारे मुद्दे हैं, पिछले कुछ समय से दो साल बाद, हमने खुले तौर पर दुनिया को एक अलग तरीके से देखने के लिए अपनी पार्टी का रूख बदलने का फैसला लिया है।"
द गार्डियन की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने आगे कहा, कि "और जब भारत की बात आती है, तो यह पहचानने के लिए, कि भारत कितना अविश्वसनीय, शक्तिशाली, महत्वपूर्ण देश है ... और यह सुनिश्चित करने के लिए काम कर रहे हैं, किहम जैसे-जैसे हम आगे बढ़ेंगे, सही रिश्ते बनेंगे।"
ब्रिटिश भारतीय, ब्रिटेन में सबसे बड़ा अल्पसंख्यक जातीय समूह है और परंपरागत रूप से उन्हें केंद्र की वामपंथी लेबर पार्टी का समर्थक माना जाता था। लेकिन, बाद में ब्रिटिश भारतीयों ने सत्तारूढ़ कंजर्वेटिव पार्टी को वोट देना शुरू कर दिया और पिछले आम चुनावों में कंजर्वेटिव पार्टी विशालकाय बहुमत के साथ सत्ता में आ गई। जिसके बाद कंजर्वेटिव पार्टी ने सरकार में बड़े पदों पर ब्रिटिश भारतीयों को स्थान दिया।
बोरिस जॉनसन जब पिछले चुनाव में जीतकर प्रधानमंत्री बने, तो उन्होंने ब्रिटिश भारतीय ऋषि सुनक को देश का वित्त मंत्री बनाया, जबकि प्रीति पटेल यूके की गृहमंत्री बनीं।
लिहाजा, अब माना जा रहा है, कि लेबर पार्टी ब्रिटिश भारतीयों के बीच अपनी खोई हुई जमीन को फिर से हासिल करने की कोशिश कर रही है।
ब्रिटेन में भारतीय मूल का समुदाय
इंग्लैंड और वेल्स की 2011 की जनगणना के अनुसार, ब्रिटेन में भारतीय मूल के 14 लाख लोग रहते थे, जो कुल जनसंख्या का 2.5 प्रतिशत है।
जैसा कि 2021 में कार्नेगी एंडोमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस स्टडी रिपोर्ट में जिक्र किया गया है, कि जब प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने 2015 में यूके का दौरा किया था, उस समय ब्रिटेन में रहने वाले भारतीयों का राजनीतिक कद बढ़ रहा था।
पहले ब्रिटिश भारतीय, वामपंथी माने जाने वाली लेबर पार्टी का कट्टर समर्थक माना जाता था, लेकिन अब इसमें बदलाव आ गया है। साल 2010 के चुनाव में ब्रिटिश भारतीयों में से 68 प्रतिशत ने लेबर पार्टी को वोट डाला था। यह यूनाइटेड किंगडम में जातीय अल्पसंख्यक मतदाताओं के 2010 के सर्वेक्षण का हवाला देता है, जहां उनमें से 68 प्रतिशत ने लेबर पार्टी का समर्थन किया था। लिहाजा, लेबर पार्टी अपने कट्टर वोटरों को फिर से साधने में जुट गई है।
कंजर्वेटिव पार्टी की तरफ क्यों गया भारतीय समुदाय
कार्नेगी स्टडी रिपोर्ट में कहा गया है, कि हाल के वर्षों में मौजूदा सर्वेक्षण डेटा बताता है, कि भारतीय समुदाय अब कंजर्वेटिव पार्टी की तरफ झुक गया है, खासकर हिन्दू समुदाय ने कंजर्वेटिव पार्टी को वोट देना शुरू कर दिया है।
स्टरी रिपोर्ट में पाया गया है, कि भारतीय समुदाय के मुस्लिम वोटर्स लेबर पार्टी के अभी भी कट्टर समर्थक बने हुए हैं। पाकिस्तानी समुदाय के वोटर भी लेबर पार्टी को ही वोट करते हैं। लेकिन, अब भारत के सिख और हिन्दू समुदाय के वोटरों ने कंजर्वेटिव पार्टी को वोट करना शुरू कर दिया है। इसके पीछे की सबसे बड़ी वजह, लेबर पार्टी के नेताओं की भारत विरोधी बयानबाजी रही है।
वहीं, कंजर्वेटिव पार्टी ने भारतीय मूल के उम्मीदवारों को काफी स्पष्ट रूप से मैदान में उतारा है, जिसमें प्रधानमंत्री के रूप में ऋषि सुनक की पदोन्नति भारतीय समुदाय के लिए राजनीतिक प्रतिनिधित्व में सर्वोच्च ऊंचाई है।
लंदन के रॉयल होलोवे विश्वविद्यालय में राजनीति विज्ञान में डॉक्टरेट शोधकर्ता रकीब एहसान ने द कन्वर्सेशन में 2017 के एक लेख में उल्लेख किया है, कि भारतीय समुयाद के लोग काफी ज्यादा इनकम वाले हैं और वो काफी पढ़े-लिखे हैं, जो अब उच्च वर्गों का प्रतिनिधित्व करते हैं। लिहाजा, लेबर पार्टी की विचारधारा से हिन्दू समुदाय के हित उतने मेल नहीं खाते हैं।
इसके अलावा, ब्रिटिश भारतीयों के बीच हिंदू वोट भारत के घरेलू मामलों पर लेबर पार्टी के कुछ राजनीतिक फैसलों से प्रभावित हुए हैं। जैसे, अगस्त 2019 में जब भारत सरकार ने कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटा दिया था, तो लेबर पार्टी ने एक प्रस्ताव पारित किया था, जिसमें जम्मू-कश्मीर को विवादित क्षेत्र बताते हुए, उस क्षेत्र में मानवीय संकट का प्रस्ताव पारित किया था।
लेबर पार्टी ने कहा था, कि जम्मू-कश्मीर के लोगों को आत्मनिर्णय का अधिकार दिया जाना चाहिए। इसके अलावा, लेबर पार्टी ने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से भी कश्मीर के मुद्दे पर दखल देने की मांग की थी, जिसने भारतीय, खासकर हिन्दू समुदाय को लेबर पार्टी से पूरी तरह अलग कर दिया।
लिहाजा, अब देखना होगा, कि क्या लेबर पार्टी का भारत को लेकर बदला रूख, क्या उसे 2025 में होने वाले चुनाव में फायदा दिलाता है या नहीं।












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