इजराइल के पीछे हाथ धोकर क्यों पड़ा दक्षिण अफ्रीका, गाजा से हजारों किमी दूर बसे देश की ऐसी क्या है बेचैनी?

नीदरलैंड के शहर द हेग में इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस में इजराइल के खिलाफ केस पर सुनवाई शुरू है। यह केस साउथ अफ्रीका ने दायर किया है और इसमें इजराइल के खिलाफ नरसंहार के आरोप लगाए गए हैं। सुनवाई के पहले दिन साउथ अफ्रीका के वकीलों ने अदालत में कहा कि जंग को रोका जाना सबसे जरूरी है।

इजराइल ने शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र की सर्वोच्च अदालत में जोर देकर कहा कि हमास नरसंहार का दोषी था और गाजा में उसका युद्ध उसके लोगों की वैध रक्षा थी। इजराइली कानूनी सलाहकार ताल बेकर ने हेग के अलंकृत पैलेस ऑफ पीस में खचाखच भरे सभागार में कहा कि देश एक ऐसा युद्ध लड़ रहा है, जिसे उसने शुरू नहीं किया था और न ही चाहता था।

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उन्होंने कहा, ''इन परिस्थितियों में, इजरायल के खिलाफ नरसंहार के आरोप से अधिक झूठा और अधिक द्वेषपूर्ण कोई आरोप नहीं हो सकता है।'' नरसंहार को लेकर दायर केस पर प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने दक्षिण अफ्रीका की आलोचना की है। उन्होंने अपना पक्ष रखते हुए कहा है कि हम आतंकवादियों से लड़ रहे हैं, और हम झूठ से लड़ रहे हैं।

उन्होंने दक्षिण अफ़्रीका द्वारा लगाए गए आरोपों को पाखंडपूर्ण बताया और कहा कि आज, फिर से, हमने एक उलटी दुनिया देखी, जिसमें इजरायल राज्य पर नरसंहार का आरोप लगाया गया है, जबकि इजरायल खुद नरसंहार से लड़ रहा है।

इजराइली पीएम नेतन्याहू ने कहा, '7 अक्टूबर को हमास ने हमला कर महिलाओं के साथ बलात्कार किया, उन्हें जला दिया, टुकड़े-टुकड़े किये। उन्होंने बच्चों, महिलाओं, बुजुर्गों, युवा पुरुषों और युवा महिलाओं का सिर काट दिए।'

पीएम नेतन्याहू ने कहा कि एक आतंकवादी संगठन ने नरसंहार के बाद से यहूदी लोगों के खिलाफ सबसे खराब अपराध को अंजाम दिया, और अब कोई नरसंहार के नाम पर इसका बचाव करने आया है, यह क्या निर्लज्ज मूर्खता है।

नेतन्याहू ने अपने बयान में कहा कि आईडीएफ, दुनिया की सबसे नैतिक सेना है, जो गैर-लड़ाकों को नुकसान पहुंचाने से बचने के लिए सब कुछ करती है। उन्होंने कहा कि इजराइल 'आतंकवादियों से लड़ना जारी रखेगा' और झूठ का खंडन भी करता रहेगा।

नेतन्याहू ने कहा कि हम अपनी रक्षा करने और अपना भविष्य सुनिश्चित करने के अपने उचित अधिकार को तब तक बरकरार रखेंगे जब तक कि पूरी जीत न हो जाए।

आपको बता दें कि इजराइल पर नरसंहार मामले की सुनवाई दो दिन चलेगी। आपको बता दें कि इजराइल और हमास में जारी संघर्ष को लेकर मुस्लिम देश निंदा करने के अलावा बहुत ज्यादा सक्रिय नहीं हैं।

लेकिन गाजा से करीब 11 हजार किलोमीटर दूर बसा दक्षिण अफ्रीका इस मामले में काफी आक्रामक है। वह लगातार गाजा पर इजराइली हमलों की निंदा कर रहा है। दक्षिण अफ्रीका ने ही इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस में इजराइल के खिलाफ केस भी दायर किया है।

अब यह सवाल उठता है कि आखिर जिस गाजा के लिए मुस्लिम देश भी ज्यादा चिंतित नहीं है, उसे लेकर गैर-मुस्लिम बहुल देश द. अफ्रीका क्यों इतना आक्रामक है? दरअसल इसके पीछे कई दशक पुराना इतिहास है। इसके पीछे नेल्सन मंडेला और यासिर अराफात की घनिष्टता है।

जब द. अफ्रीका में नेल्सन मंडेला रंगभेद के खिलाफ संघर्ष कर रहे थे और फिलिस्तीन में यासिर अराफात नेतृत्व कर रहे थे। दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद के खिलाफ संघर्ष करने वाले नेल्सन मंडेला को 1990 में जेल से रिहा किया गया था। इसके बाद मंडेला ने कहा था कि फिलिस्तीनियों के बिना हमारी आजादी अधूरी है।

नेल्सन मंडेला का मानना था कि दक्षिण अफ्रीका के लोगों की तरह ही फिलिस्तीन के लोग भी परेशान हैं और उन्हें आजादी मिलनी चाहिए। वह अकसर इस मुद्दे को उठाते रहते थे। यही नहीं 1994 में जब नेल्सन मंडेला राष्ट्रपति चुने गए तो उन्होंने मदद के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय को धन्यवाद दिया।

इसके साथ ही उन्होंने जोड़ा, 'हम जानते हैं कि हमारी आजादी फिलिस्तीनियों की स्वतंत्रता के बिना अधूरी है।' तब से ही दक्षिण अफ्रीका और फिलिस्तीनी के बीच अच्छे रिश्ते बने हुए हैं। नेशनल मंडेला के निधन के बाद भी दोनों पक्षों के बीच घनिष्टता बनी हुई है।

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