डोनाल्ड ट्रंप और किम जोंग उन की मीटिंग के लिए सिंगापुर ही क्यों है सही जगह?

नई दिल्ली। सिंगापुर को ना सिर्फ एशिया में बल्कि इस शहर को डिप्लोमेटिक मीटिंग और सिक्योरिटी की वजह से पूरी दुनिया में सम्मान की नजर से देखा जाता रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और नॉर्थ कोरियाई सुप्रीम लीडर किम जोंग उन एतिहासिक मुलाकात के लिए सिंगापुर पहुंच चुके हैं। दोनों नेताओं के बीच मंगलवार (12 जून) को अहम मीटिंग होने वाली है और पूरे सिंगापुर को हाई अलर्ट कर दिया है। सिंगापुर पिछले कई दशकों से बड़े स्तर पर दक्षिण एशियाई देशों के क्षेत्रीय सम्मेलन और दुनिया के कई अधिकारियों के बीच होने वाली मीटिंग की मेजबानी करता आया है। दुनिया में मीटिंग्स आयोजन के लिए सिंगापुर का लंबा और सकारात्मक इतिहास रहा है। दुनिया की निगाहें एक बार फिर सिंगापुर में टिकी है, जहा लोकतांत्रिक मुल्क के राष्ट्रपति और तानाशाह शासन के सुप्रीम लीडर के बीच अहम मुलाकात होने वाली है। आइए जानते हैं, अमेरिका और नॉर्थ कोरिया ने मीटिंग के लिए आखिर सिंगापुर को ही क्यों चुना।

साउथ ईस्ट एशिया में अमेरिका का खास है सिंगापुर

साउथ ईस्ट एशिया में अमेरिका का खास है सिंगापुर

जॉर्ज डब्ल्यू के वक्त अमेरिका और सिंगापुर के फ्री-ट्रेड एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर हुए थे। उसके बाद ओबामा के दौर में अमेरिका ने सिंगापुर को स्ट्रेटजिक पार्टनर के रूप मे अपग्रेड करने के लिए सहमति जताई और उसके तीन साल बाद अमेरिका और सिंगापुर के बीच सिक्योरिटी एग्रीमेंट को लेकर महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर हुए। दोनों ही देश बड़े व्यापारिक साझेदार मु्ल्क होने के साथ-साथ एक दूसरे की नीतियों पर भी बहुत विश्वास करते आए हैं। अमेरिका शुरू से सिंगापुर के इंटेलिजेंस, वहां के पॉलिटिकल लीडर्स और डिप्लोमेट्स के अलावा कई बड़े रणनीतिक मुद्दों पर भरोसा करता आया है।

नॉर्थ कोरिया और सिंगापुर की दशकों पुरानी दोस्ती

नॉर्थ कोरिया और सिंगापुर की दशकों पुरानी दोस्ती

सिंगापुर के साथ नॉर्थ कोरिया के दशकों पुराने रणनीतिक संबंध है। दोनों देशों ने 1975 में रणनीतिक रिश्तों को स्थापित किया था, वहीं सिंगापुर में नॉर्थ कोरिया का एक दूतावास भी है। हालांकि, किम जोंग नाम (किम जोंग उन का चचेरा भाई) की हत्या के बाद नॉर्थ कोरिया और सिंगापुर के रिश्तों में खराब हुए और उसके बाद अमेरिका द्वारा प्योंगयांग पर लगाए प्रतिबंधों का भी सिंगापुर ने समर्थन किया। 2016 से पहले नॉर्थ कोरिया और सिंगापुर ना सिर्फ व्यापार के मामलों में एक दूसरे के सहयोगी थे, बल्कि नॉर्थ कोरियाई लोगों के लिए वीजा फ्री सिंगापुर की यात्रा करने की अनुमति थी। सिंगापुर शुरू से ही नॉर्थ कोरिया की मेडिकल से लेकर शॉपिंग में मदद करता रहा है। पिछले साल नवंबर में सिंगापुर ने नॉर्थ कोरिया के साथ ट्रेड रिलेशन खत्म कर दिए थे, लेकिन दोनों देशों का इतिहास हमेशा शानदार रहा है।

नॉर्थ कोरिया के लिए सिंगापुर बन सकता है प्रेरणा

नॉर्थ कोरिया के लिए सिंगापुर बन सकता है प्रेरणा

कई विशेषज्ञों का तो यह भी मानना है कि किम खुद अपना मुल्क नहीं छोड़ना चाहते थे और समिट के लिए वे ट्रंप को प्योंगयांग ही आमंत्रित करने का मन बना रहे थे। किम को हमेशा अपनी हत्या और तख्तापलट का भय सताता रहता है। वैसे किम परिवार का कोई भी सुप्रीम लीडर नॉर्थ कोरिया से बाहर कदम रखने से हमेशा डरता रहा है। यह पहली बार है, जब किम जोंग उन किसी अमेरिकी राष्ट्रपति से सीधी मुलाकात करेंगे। वहीं, सिंगापुर एक ऐसा देश है, जिसने पिछले दशकों में शानदार काम कर अपने मुल्क से तेजी से गरीबी को खत्म किया है। आधुनिकता, टेक्नॉलोजी और चमचमाते सिंगापुर की खासियत है कि यह तेजी के साथ आर्थिक विकास कर रहा है। अपने इकनॉमिक रिफॉर्म के मामले में नॉर्थ कोरिया के लिए सिंगापुर किसी प्रेरणा से कम नहीं है।

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