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क्यों नहीं सामने आ रहा तालिबान प्रमुख हिबतुल्लाह अखुंदजादा ? ये हैं कारण

काबुल, 30 अगस्त: अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे को दो हफ्ते बीत चुके हैं, लेकिन उसका प्रमुख हिबतुल्लाह अखुंदजादा दुनिया की नजरों से अब भी गायब है। आजतक उसे कभी भी सार्वजनिक रूप से नहीं देखा गया। सिर्फ तालिबान ने उसकी एक तस्वीर जारी की हुई है, वही दुनियाभर में घूम रही है। वैसे तालिबान का दावा है कि हिबतुल्लाह अखुंदजादा जल्द ही दुनिया के सामने होगा। लेकिन, इस दावे के सच होने तक या उसके बाद भी यह सवाल बरकरार रहेगा कि आखिर तालिबान चीफ दुनिया के सामने क्यों नहीं आता ? यहां हम उन्हीं संभावनाओं के बारे में बता रहे हैं, जो उसके गायब रहने का कारण हो सकता है।

अखुंदजादा जल्द ही सबके सामने आएंगे- तालिबान

अखुंदजादा जल्द ही सबके सामने आएंगे- तालिबान

15 अगस्त को काबुल पर कब्जे के बाद से तालिबान के कई नेता, सैकड़ों कमांडो, अत्याधुनिक हथियारों से लैस मदरसों से निकले आतंकी वर्षों का निर्वासित जीवन छोड़कर काबुल में घुस चुके हैं। लेकिन, तालिबान चीफ हिबतुल्लाह अखुंदजादा को अबतक किसी ने नहीं देखा है। हालांकि, तालिबान के प्रवक्ता जबिहुल्लाह मुजाहिद ने रविवार को यह दावा जरूर किया है कि 'वे कंधार में मौजूद हैं। वह शुरू से ही वहीं रह रहे हैं।' तालिबान के उप प्रवक्ता बिलाल करिमी ने उससे आगे कहा कि 'वे जल्द ही सबके सामने आएंगे।' अखुंदजादा को 2016 में तब तालिबान की कमान सौंपी गई थी, जब यह जिहादी संगठन मुश्किल दौर से गुजर रहा था। तालिबान की बागडोर संभालने के बाद इसकी सबसे बड़ी जिम्मेदारी संगठन को एकजुट रखने की थी। लेकिन, पांच साल बाद भी उसके बारे में कोई ज्यादा जानकारी सामने नहीं है। न ही यह पता है कि तालिबान के रोजाना के मसलों को वह किस तरह से हैंडल करता है। सिर्फ इस्लामिक छुट्टियों के मौके पर ही उसका संदेश जारी होता है।(ऊपर की तस्वीर- अमेरिकनयूनिट्स के ट्विटर हैंडल से)

अपने सरगनाओं को छिपाकर रखता है तालिबान

अपने सरगनाओं को छिपाकर रखता है तालिबान

आज की तारीख तक तालिबान चीफ की एक तस्वीर के अलावा उसके बारे में किसी को भी सार्वजनिक तौर पर कुछ भी पता नहीं है और न ही यह पुख्ता जानकारी है कि उसका असल ठिकाना कहां है। पिछले हफ्ते तालिबान के प्रवक्ता मुजाहिद ने मीडिया से कहा था कि 'आप उन्हें जल्द ही देखेंगे, खुदा ने चाहा तो...' तालिबान अपने सुप्रीम सरगना के बारे में यह गोपनीयता तब बरत रहा है, जब उसके कई धड़ों के नेता खुलेआम काबुल के मस्जिदों में जा रहे हैं, विरोधियों से मिल रहे हैं और अफगान क्रिकेट के अधिकारियों से भी बात कर चुके हैं। अगर तालिबान के इतिहास को टटोलें तो अपने सरगनाओं को गोपनीय रखने की उसकी स्टाइल पुरानी है।

मुल्ला उमर की शैली में काम कर रहा है अखुंदजादा!

मुल्ला उमर की शैली में काम कर रहा है अखुंदजादा!

तालिबान का संस्थापक मुल्ला उमर भी सीन से गायब रहने के लिए कुख्यात था। जब 1990 के दशक में तालिबान अफगानिस्तान पर हुकूमत कर रहा था, तब भी शायद ही उसने काबुल की यात्रा की हो। वह जल्द किसी से मिलता-जुलता भी नहीं था और कंधार में अपने ठिकाने में ही छिपा रहा रहता था। तालिबान मूवमेंट की शुरुआत भी कंधार से ही हुई थी और दो दशक पहले तालिबान सत्ता में था तो वही सत्ता का केंद्र भी था। मुल्ला उमर कभी सामने आकर हुकूमत करता नहीं दिखा, लेकिन उसके इशारे के बिना इस आतंकी संगठन में पत्ता भी हिलना नाममुकिन था। इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप में एशिया प्रोग्राम के हेड लैयुरल मिलर ने अखुंदजादा के बारे में कहा है, 'ऐसा लगता है कि उसी तरह (मुल्ला उमर) की जैसी शैली को अपनाया है।'(ऊपर की तस्वीर फाइल)

सुरक्षा भी हो सकती है गोपनीयता की वजह

सुरक्षा भी हो सकती है गोपनीयता की वजह

मिलर इस गोपनीयता का एक कारण सुरक्षा भी बताते हैं। वह इसके लिए अखुंदजादा के पूर्ववर्ती तालिबान सरगना मुल्ला अख्तर मंसूर के अमेरिकी ड्रोन हमले में मारे जाने का हवाला भी देते हैं। मिलर ने एएफपी से कहा है, 'तालिबान के प्रवक्ता ने संकेत दिया है कि उसका नेता जल्द सामने आएगा और इसका कारण यह भी हो सकता है कि उसकी मौत के संदेह को खारिज किया जा सके।' उनके मुताबिक, 'लेकिन, यह भी संभव है कि सामने आने के बाद वह फिर से गायब हो जाए और मुल्ला उमर की तरह ही दूर रहकर ही अपने अधिकारों का इस्तेमाल करे।' उसके गायब रहने की वजह से उसके स्वास्थ्य को लेकर भी वर्षों से अफवाहें उड़ती रही हैं। कभी कहा गया कि वह कोविड की चपेट में आ गया तो कभी उसके बम हमले में मारे जाने की बात भी कही गई। लेकिन, इन अफवाहों की कभी पुष्टि नहीं हुई।

पाकिस्तानी एक्सपर्ट को लगता है कि जिहाद है कारण

पाकिस्तानी एक्सपर्ट को लगता है कि जिहाद है कारण

तालिबान में तमाम गुट हैं और यह अफगानिस्तान के अलग-अलग समूहों का प्रतिनिधित्व करते हैं। जब 2015 में यह खुलासा हुआ कि तालिबान के नेताओं ने मुल्ला उमर की मौत को वर्षों तक छिपाए रखा, उसमें सत्ता के लिए कुछ समय तक खूनी संघर्ष छिड़ गया तो कम से कम एक बड़ा धड़ा उससे अलग हो गया। ऐसे समय में जब जंग के बाद सत्ता पर काबिज होने का समय आया है, सभी गुटों के हितों का ख्याल रखना अहम है। इस समय गुट के अंदर किसी तरह का गंभीर संघर्ष होने पर तालिबान का पूरा खेल ही खराब हो सकता है। वहीं पाकिस्तान के एक सुरक्षा विश्लेषक इम्तियाज गुल को लगता है कि जबतक अमेरिकी सेना अफगानिस्तान की जमीन पर है, तालिबान खुद को जिहाद की स्थिति में ही पा रहा है। उन्होंने कहा है कि 'इसलिए सुप्रीम लीडर सामने नहीं आ रहे हैं।'

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