बांग्लादेश में शेख हसीना का लगातार चौथी बार PM बनना तय, विपक्षी की किस गलती से एकतरफा हुआ चुनाव?
भारत, अमेरिका, ब्रिटेन, ताइवान सहित दुनिया के 40 से अधिक लोकतांत्रिक देशों में 2024 में चुनाव होने वाले हैं। इन सबमें सबसे पहला चुनाव 7 जनवरी को बांग्लादेश में होने जा रहा है। चुनाव में विभिन्न दलों द्वारा कड़ी प्रतिस्पर्धा की उम्मीद की जाती है, बांग्लादेश के चुनाव में ऐसा बिल्कुल उम्मीद नहीं किया जा रहा है।
बांग्लादेश के चुनाव परिणाम के बारे में पहले से तय हो चुका है कि यहां किस दल की जीत होने जा रही है। देश के 300 सीटों पर होने वाले इस चुनाव में मुख्य विपक्षी पार्टियां चुनाव का बहिष्कार कर रही हैं। इसलिए माना जा रहा है कि शेख हसीना की आवामी लीग लगातार चौथी बार चुनाव जीतने जा रही है।

76 वर्षीय शेख हसीना लगातार 15 वर्षों से सत्ता में हैं। वह बांग्लादेश के इतिहास में सबसे लंबे समय तक शासन करने वाली नेता हैं। हसीना पर ये आरोप लगता रहा है कि वे निरंकुश हो गई हैं और अपने विपक्षियों का क्रूरतापूर्वक दमन करती हैं।
BNP ने किया चुनाव का बहिष्कार
खालिद जिया की पार्टी और सबसे बड़ी विपक्षी दल बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) और उसके सहयोगी दलों का कहना है कि उनका सरकार पर भरोसा नहीं है कि वो स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराएंगी।
आपको बता दें कि बांग्लादेश में विपक्षी पार्टियां काफी लंबे समय से एक तटस्थ कार्यवाहक सरकार द्वारा चुनाव कराए जाने की मांग कर रही है मगर इसके लिए मौजूदा सरकार तैयार नहीं है। गौरतलब है कि बांग्लादेश में कार्यवाहक सरकार का प्रावधान हटा दिया गया था।
बांग्लादेश में कई बार हुए प्रदर्शन
शेख हसीना के तटस्थ सरकार द्वारा चुनाव कराए जाने की मांग के खारिज होने के बाद बांग्लादेश में हाल के कुछ समय में काफी उग्र प्रदर्शन हुए हैं। इसकी वजह से कई वरिष्ठ बीएनपी नेताओं को सरकार विरोधी प्रदर्शनों को लेकर हजारों समर्थकों के साथ गिरफ्तार किया गया है।
खालिदा जिया नजरबंद
विपक्षी नेता खालिदा जिया इस समय भ्रष्टाचार के मामले में नजरबंद हैं और स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रही हैं। विपक्ष के पास दिक्कत ये है कि उसके पास खालिदा जिया के अलावा कोई और करिश्माई नेता नहीं है।
बांग्लादेश में यह पहली बार नहीं है जब विपक्ष ने चुनाव बहिष्कार का आह्वाहन किया है। इससे पहले 2014 में भी विपक्ष ऐसा कर चुका है। तब अवामी लीग को 300 में से 263 सीटों पर सफलता हासिल हुई थी। इस बार भी माना जा रहा है कि अवामी लीग उसी प्रदर्शन को दोहरा सकता है।
बीएनपी की मतदान न करने की अपील
इस बीच विपक्षी पार्टी बीएनपी ने न केवल चुनाव का बहिष्कार किया है बल्कि असहयोग आंदोलन की भी घोषणा की है और लोगों से रविवार को मतदान न करने को कहा है। ऐसे में सत्ताधारी पार्टी के पास उचित मतदान कराने की चुनौती है। कहा जा रहा है कि पार्टी इसके लिए अनुचित उपायों का सहारा ले रही है।
'डमी उम्मीदवार उतार रही सरकार'
इस बार शेख हसीना की अवामी लीग की सरकार पर ये आरोप लग रहा है कि वह चुनाव को निष्पक्ष बनाने के लिए स्वतंत्र या "डमी" उम्मीदवारों को मैदान में उतारने की कोशिश कर रही है।
कई निर्वाचन क्षेत्रों में, सत्तारूढ़ दल के सदस्यों पर चुनाव के दिन मतदान केंद्रों पर उपस्थित नहीं होने पर लोगों को सरकार की सामाजिक लाभ योजनाओं से वंचित करने की धमकी देने का आरोप लगाया गया है।
'मतदाताओं को मिल रही धमकी'
बांग्लादेश में लगभग डेढ़ करोड़ लोग सामाजिक लाभ योजनाओं का फायदा उठाते हैं। ऐसे में लोगों को चिंता है कि यदि वे चुनाव प्रक्रिया में हिस्सा नहीं लेते हैं तो उन्हें लाभ पाने से रोक दिया जाएगा।
बीएनपी के अंतरराष्ट्रीय मामलों के सचिव रुमीन फरहाना ने अल जज़ीरा को बताया कि यह जानते हुए कि इसमें धांधली होगी, चुनाव में भाग लेना उन हजारों लोगों के साथ विश्वासघात होगा जो लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए खुद को कुर्बान कर चुके हैं।
'लोकतंत्र का मजाक बना चुनाव'
उन्होंने कहा, "इस देश के लोग इस चुनाव को अपने इतिहास के सबसे बेतुके और नाजायज चुनाव के रूप में याद रखेंगे।" प्रमुख बांग्लादेशी अधिकार कार्यकर्ता शाहिदुल आलम ने अल जज़ीरा को बताया, "यह चुनाव एक दिखावा है। यह हमारे लोकतंत्र का मज़ाक है - जो अभी थोड़ा बहुत बचा हुआ है।"
अमेरिका में विल्सन सेंटर में दक्षिण एशिया संस्थान के निदेशक माइकल कुगेलमैन ने कहा कि विपक्षी पार्टी बीएनपी का बहिष्कार अवामी लीग पर एक बड़ा उपकार है। इससे पश्चिमी देशों के लिए यह निष्कर्ष निकालना कठिन हो गया है कि चुनाव धोखाधड़ी है।
कुगेलमैन ने अल जज़ीरा को बताया, "अगर अवामी लीग 95 प्रतिशत वोट जीतती है, तो कोई भी पार्टी पर वोट चुराने का आरोप नहीं लगा सकता क्योंकि वह अनिवार्य रूप से अपने ही खिलाफ चल रही होगी।" उन्होंने कहा कि बीएनपी के बहिष्कार के निर्णय के लिए घटनाओं का पैटर्न पश्चिम के लिए चिंता का विषय होना चाहिए।












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