Explain: NordVPN भारत से अपने सर्वरों को क्यों हटा रहा है? भारत सरकार के नियम से नाराजगी
साइबर सुरक्षा मानदंड लागू होने से एक दिन पहले, नॉर्डवीपीएन 26 जून को अपने सर्वरों को हटा देगा। दो और वीपीएन कंपनियों ने भारत से अपने सर्वर को समेट लिया है।
नई दिल्ली, जून 15: नॉर्डवीपीएन भारत का तीसरा सबसे बड़ा वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क (वीपीएन) कंपनी बन गया है, जो भारत में अपने सर्वरों को समेट रहा है। देश की साइबर सुरक्षा निर्देश के बाद नॉर्डवीपीएन ने भारत से अपने सर्वरों को समेटने का फैसला किया है। नॉर्डवीपीएन से पहले एक्सप्रेस वीपीएन और सर्फशार्क भी भारत से अपने सर्वर को समेट चुके हैं। इन तीनों कंपनों ने नये गाइडलाइंस जारी होने के बाद भारत से अपने सर्वरों को हटाने का फैसला किया है।

नॉर्डवीपीएन ने भारत से हटाया सर्वर
भारतीय कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम (सीईआरटी-इन) द्वारा अप्रैल में जारी किए गए मानदंडों में वीपीएन कंपनियों को 180 दिनों के लिए उपयोगकर्ताओं के लॉग को रिकॉर्ड रखने के साथ-साथ पांच साल के लिए तमाम डेटा को कलेक्ट कर रखने के लिए कहा गया था। नॉर्डवीपीएन ने एक बयान में कहा कि, ‘अतीत में, समान नियम आमतौर पर सत्तावादी सरकारों द्वारा अपने नागरिकों पर अधिक नियंत्रण हासिल करने के लिए पेश किए गए थे और अगर लोकतंत्र उसी रास्ते का अनुसरण करता है, तो यह लोगों की गोपनीयता के साथ-साथ उनकी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को प्रभावित करने की क्षमता रखता है। इस कानून का लोगों की गोपनीयता और डिजिटल सुरक्षा पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने की संभावना है।"

नॉर्डवीपीएन ने अपने सर्वरों को क्यों हटाया है?
पनामा की कंपनी नॉर्डवीपीएन ने कहा कि, नियमों की लॉगिंग और स्टोरेज आवश्यकता की वजह से, ‘भारत में सर्वर वाली एक वीपीएन कंपनी अब अपने उपयोगकर्ताओं के लिए गोपनीयता की गारंटी नहीं दे सकती है'। कंपनी की तरफ से जो बयान जारी किया गया है, उसमें कहा गया कि, कंपनी इस बात को लेकर चिंति है, कि इस रेग्यूलेशन की वजह से लोगों के सुरक्षित डेटा पर असर पड़ सकता है। कंपनी ने कहा कि, ‘ऐसा लगता है कि सैकड़ों या हजारों विभिन्न कंपनियों के पास लोगों की निजी जानकारियों की भारी मात्रा में वृद्धि होगी और यह कल्पना करना कठिन है, कि सभी, खासकर छोटे और मध्यम उद्योगों के पास लोगों की निजी जानकारियों की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के उचित साधन होंगे'।

26 जून को नॉर्डवीपीएन हटाएगा सर्वर
साइबर सुरक्षा मानदंड लागू होने से एक दिन पहले, नॉर्डवीपीएन 26 जून को अपने सर्वरों को हटा देगा। आपको बता दें कि, नॉर्डवीपीएन वैश्विक स्तर पर सबसे बड़े वीपीएन प्रदाताओं में से एक है, जिसके वैश्विक स्तर पर 1 करोड़ 4 लाख से अधिक उपयोगकर्ता हैं और 60 देशों में 5,500 से अधिक सर्वर हैं। नॉर्डवीपीएन ने कहा कि, ‘इंडस्ट्री लीडर के तौर पर हम यूजर्स को लेकर सख्त गोपनीयता की नीतियों का पालन करते हैं। जिसका मतलब ये हुआ, कि हम ग्राहकों की जानकारियां अपने पास जमा नहीं रखते हैं। नो-लॉगिंग सुविधाएँ हमारे सर्वर आर्किटेक्चर में उन बिल्ड हैं और हमारे सिद्धांतों और मानकों के मूल में हैं। इसके अलावा, हम अपने ग्राहकों की गोपनीयता की रक्षा करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। इसलिए, हम अब भारत में सर्वर नहीं रख पा रहे हैं'।
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दूसरे वीपीएन प्रोवाइडर्स ने क्या कहा?
पिछले हफ्ते, सुरफशार्क ने अपने सर्वरों को भारत से हटा लिया है और उसने भी यही दलील दी थी, कि साइबर सुरक्षा नियम कंपनी की "नो लॉग्स" नीति के "मूल लोकाचार के खिलाफ जाते हैं"। इससे पहले, एक्सप्रेसवीपीएन ने यह कहते हुए अपने सर्वरों को देश से हटा दिया था कि, यह "इंटरनेट स्वतंत्रता को सीमित करने के भारत सरकार के प्रयासों में भाग लेने से इनकार करता है"।

वीपीएन को लेकर क्या हैं नियम?
सीईआरटी-इन द्वारा 28 अप्रैल को जारी दिशा-निर्देशों में वीपीएन सेवा प्रदाताओं के साथ-साथ डेटा सेंटर और क्लाउड सेवा प्रदाताओं को नाम, ई-मेल आईडी, संपर्क नंबर और आईपी पते जैसी जानकारी संग्रहीत करने के लिए कहा गया है। अन्य बातों के अलावा, अपने ग्राहकों की पांच साल की अवधि के लिए सारी जानकारियों को जमा करके रखने के लिए कहा गया है। वहीं, सरकार ने कहा है कि, वह चाहती है कि इन विवरणों के जरिए साइबर अपराध से लड़ने में मदद मिलेगी। लेकिन, वीपीएन कंपनियों का कहा है कि, ये कदम वीपीएन प्लेटफार्मों द्वारा प्रदान किए गए गोपनीयता कवर का उल्लंघन होगा। हालांकि, इन चिंताओं के बावजूद, इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी राज्य मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने पहले कहा था कि, वैसी वीपीएन कंपनियां, जो देश के नियमों का पालन नहीं कर रही हैं, वो देश से बाहर निकलने के लिए स्वतंत्र हैं। भारत सरकार का नया नियम 27 जून से लागू हो रहा है।

भारतीय यूजर्स के साथ क्या होगा?
नॉर्डवीपीएन ने कहा कि उसके भारतीय सर्वर 26 जून तक रहेंगे, और यह सुनिश्चित करने के लिए कि उसके उपयोगकर्ता इस फैसले से अवगत हैं, नॉर्डवीपीएन 20 जून से अपने ऐप के माध्यम से पूरी जानकारी के साथ सूचनाएं भेजेगा। हालांकि, कंपनी की तरफ से अभी तक इस बात की जानकारी नहीं दी गई है, कि उसके इस कदम से भारत में उसके यूजर्स पर क्या प्रभाव पड़ेगा। वहीं, अन्य वीपीएन कंपनियां, जिन्होंने अपने सर्वर को भारत से हटा दिया है, उन्होंने कहा कि वे अन्य देशों में स्थित वर्चुअल सर्वर के माध्यम से देश में उपयोगकर्ताओं की सेवा करेंगे।
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