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सीरिया के एयरपोर्ट्स पर बमबारी क्यों कर रहा है इजरायल?

सीरियाई राज्य मीडिया ने कहा कि, अलेप्पो हवाई अड्डे पर इजरायल के हमलों से काफी नुकसान हुआ है, लेकिन किसी के हताहत होने का उल्लेख नहीं किया।

तेल अवीव, सितंबर 09: सीरिया के एयरपोर्ट्स पर इजरायल लगातार बमबारी कर रहा है और मंगलवार को भी अलेप्पो अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर इजराइल ने दूसरी बार बमबारी की है, जिसे सीरिया के विदेश मंत्रालय ने युद्ध अपराध कहा है। इजरायल के हमले में सीरियाई एयरपोर्ट के रनवे ध्वस्त हो गये और एयरपोर्ट पर भारी तबाही मची है। अलेप्पो एयरपोर्ट पर ये कोई पहली बार हमला नहीं है, जब इजरायल ने सीरिया के हवाई अड्डों को निशाना बनाया हो। पिछले जून में, इजराइली हवाई हमलों ने अस्थायी रूप से दमिश्क अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को ऑपरेशन से बाहर कर दिया था। इजराइल ने पिछले कुछ सालों में सीरिया में लक्ष्यों पर कई हमले किए हैं, जिनमें से कई हमलों को आधिकारिक तौर पर स्वीकार किया गया है। ऐसे में आईये समझते हैं, कि आखिर इजरायल इतना आक्रामक क्यों है और सीरिया पर लगातार हमले क्यों कर रहा है?

ईरान को चेतावनी

ईरान को चेतावनी

ब्रिटेन स्थित सीरियन ऑब्जर्वेटरी फॉर ह्यूमन राइट्स के अनुसार, इजरायल ने सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल-असद के सहयोगियों, ईरान समर्थित लड़ाकों के हवाई अड्डे के परिसर में एक गोदाम पर हमला किया है। ह्यूमन राइट्स ने कहा कि, मंगलवार को हवाईअड्डे को निशाना बनाने में तीन लोगों की मौत हो गई। वहीं, राजनीतिक विश्लेषक सामी हमदी ने कहा कि, इजरायली एयरस्ट्राइक को इस तरह से समझना चाहिए, कि ये ईरान के लिए चेतावनी है, क्योंकि अमेरिका ने ईरान को परमाणु समझौते पर बातचीत आदगे बढ़ाने का ऑफर दिया है, और इजरायल इससे खुश नहीं है। हमदी ने अल जज़ीरा को बताया, "ईरान के लिए एक चेतावनी है, क्योंकि, इजरायल यह प्रदर्शित करना चाहता है कि तेल अवीव वाशिंगटन की सहमकि के बावजूद परमाणु समझौते की नई राजनीतिक गतिशीलता को लागू करने का विरोध करना जारी रखेगा।" यह "अल-असद के लिए भी एक चेतावनी है, क्योंकि, इससे सीरिया के बुनियादी ढांचों को नुकसान पहुंच रहा है और सीरिया को इसके जरिए चेतावनी दी जा रही है, तका वो भविष्य में ईरान को किसी भी तरह से मदद ना कर पाए।

जवाब देने में नाकाम सीरिया

जवाब देने में नाकाम सीरिया

सीरियाई राज्य मीडिया ने कहा कि, अलेप्पो हवाई अड्डे पर इजरायल के हमलों से काफी नुकसान हुआ है, लेकिन किसी के हताहत होने का उल्लेख नहीं किया। स्थानीय मीडिया ने यह भी कहा कि, सीरियाई एयर डिफेंस को कुछ इजरायली मिसाइलों को रोकने में कामयाबी भी मिली है। वहीं, सीरिया के विदेश मंत्रालय ने बुधवार को इजरायली स्ट्राइक को "युद्ध अपराध" बताकर उसकी निंदा की है और इजराइल को जवाबदेह ठहराया है। वहीं, विश्लेषक हमदी ने कहा कि, सीरिया की सरकार अपने हथियारों को लेकर बुरी तरह से ईरान और रूस पर निर्भर है, लिहाजा सीरिया के लिए इजरायल के खिलाफ जवाबी कार्रवाई करना काफी मुश्किल है। उन्होंने कहा कि, "रूस की इजरायल के साथ किसी भी टकराव में कोई दिलचस्पी नहीं है, जबकि ईरान इजरायल के साथ एक खुला संघर्ष नहीं करना चाहता है, क्योंकि ईरान नहीं चाहता है, कि उसे बाइडेन प्रशासन के साथ परमाणु समझौते पर आगे बढ़ने में किसी भी तरह की परेशानी हो। जबकि, ईरान सीरिया पर हो रहे हमले को एक पब्लिक रिलेशन टूल की तरफ इस्तेमाल करना चाहता है, कि ये हमले फिलीस्तीन पर हो रहे हमले का प्रतिरोध करने के लिए किए जा रहे हैं।

अल-असदी को संदेश भेज रहा इसराइल

अल-असदी को संदेश भेज रहा इसराइल

2011 के बाद से इजराइल ने हाल के वर्षों में सीरिया सरकार के नियंत्रित क्षेत्रों के अंदर लक्ष्यों पर सैकड़ों हमले किए हैं, लेकिन इजरायल की तरफ से इन हमलों की चर्चा कभी कभी ही की जाती है। हालांकि, इसने पहले ईरान-संबद्ध सशस्त्र समूहों, जैसे लेबनान के हिज़्बुल्लाह के ठिकानों को निशाना बनाने को इजरायल ने स्वीकार किया है। बुधवार को इजरायली संसद के विदेश मामलों और रक्षा समिति के अध्यक्ष राम बेन-बराक ने यनेट रेडियो को बताया था कि, ये हमले सीरियाई राष्ट्रपति अल-असद के लिए एक संकेत थे। उन्होंने कहा कि, "हमले का मतलब था कि कुछ विमान अब एयरपोर्ट पर नहीं उतर पाएंगे और इससे राष्ट्रपकि अल असद को एक संदेश मिला होगा। और अगर सीरिया का उद्येश्य आतंकवाद को समर्थन देना है, तो फिर सीरिया के परिवहन क्षमता को भारी नुकसान पहुंचेगा। लेकिन, वो ये कहते कहते रूक गये, कि सीरिया में इजरायल ने हमले किए हैं।

सीरिया में ईरान की भूमिका

सीरिया में ईरान की भूमिका

ईरान सीरिया के राष्ट्रपति अल-असद शासन का करीबी सहयोगी है, और शुरू से ही इस संघर्ष में शामिल रहा है। ईरान-सहयोगी मिलिशिया, विशेष रूप से लेबनान के हिज़्बुल्लाह समूह ने विपक्षी सशस्त्र समूहों के खिलाफ सीरियाई सेना के साथ लड़ाई लड़ी है। एक रूसी अंतरराष्ट्रीय मामलों के विश्लेषक व्लादिमीर सोतनिकोव ने कहा कि, सीरियाई संघर्ष में ईरान की स्थिति मुख्य रूप से अपने कट्टर दुश्मन इज़राइल और उसके सहयोगी संयुक्त राज्य अमेरिका से मुकाबला करना है। उन्होंने अलजजीरा को बताया कि, "भू-राजनीतिक रूप से बोलते हुए मेरा मानना ​​​​है कि ईरान की भागीदारी को आम तौर पर इस क्षेत्र में एक प्रमुख शक्ति के रूप में अपनी भूमिका को बनाए रखने और उसे बढ़ाने के इरादे से है, जो अमेरिकी सहयोगी और सीरियाई विपक्षी समर्थक सऊदी अरब के साथ जमकर प्रतिस्पर्धा कर रहा है।"

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