पीएम मोदी की यात्रा को गेम चेंजर क्यों कहा जा रहा है? जानिए मिस्र के लिए क्यों जरूरी है भारत?
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को मिस्र की दो दिवसीय यात्रा पर पहुंचे हैं। 1997 के बाद यह किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली मिस्र यात्रा है। कुछ विश्लेषकों ने पीएम मोदी की इस यात्रा को गेम चेंजर बताया है।
विश्लेषकों का कहना है कि इस यात्रा से यह भी पता चल सकता है कि आने वाले दिनों में संबंध कैसे आगे बढ़ सकते हैं। ऐसी उम्मीद की जा रही है कि इस यात्रा से भारत-मिस्र को सीधेतौर पर कई फायदे मिलेंगे।

इस यात्रा से भारत को उत्तरी अफ्रीकी देश में निवेश में पर्याप्त वद्धि का मौका मिलेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत, मिस्र के माध्यम से मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका (एमईएनए) क्षेत्र तक गहरी पहुंच चाहता है। वहीं, पीएम मोदी की इस यात्रा से मिस्र की ब्रिक्स के आर्थिक ब्लॉक में एंट्री का रास्ता खुल सकता है।
नई दिल्ली में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में मिडिल इस्ट स्टडीज पढ़ाने वाले आफताब कमाल पाशा ने अल जज़ीरा को बताया कि मिस्र और भारत के बीच ऐतिहासिक रूप से मैत्रीपूर्ण संबंध रहे हैं।
पाशा ने कहा कि खाड़ी देशों से भारत को क्या मिल सकता है इसकी स्पष्ट सीमाएं हैं इसलिए पीएम मोदी ने मिस्र का रुख किया है। पाशा ने कहा कि मिस्र के पीएम भारत के माध्यम से अपने देश को ब्रिक्स में दिलाना चाहते हैं। ब्रिक्स, ब्राजील, रूस, इंडिया, चीन और द. अफ्रीका जैसे दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं का एक शक्तिशाली समूह है।
दीगर बात ये है कि चीन की तीव्र इच्छा है कि पाकिस्तान भी ब्रिक्स का हिस्सा बने। ऐसे में भारत इस तरह से चीन को भी साधना चाहता है। मिस्र के जरिए भारत, पाकिस्तान को ब्रिक्स में एंट्री देने से रोकना चाहता है।
अब यदि मिस्र की ब्रिक्स में एंट्री होती है तो मोदी चाहेंगे कि भारत को मिस्र का समर्थन मिले। पाशा ने कहा, 'मोदी यह दिखाने में सक्षम होंगे कि अरब दुनिया का एक महत्वपूर्ण देश भारत का समर्थन कर रहा है।"
मिस्र पिछले कुछ समय से देश की आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने की कोशिश में जुटा हुआ है। पिछले कुछ सालों में मिस्र के राष्ट्रपति ने भारत में तीन दौरे किए हैं। वे चाहते हैं कि मिस्र में भारत का निवेश बढ़े।
कोरोना महामारी के बाद रूस-यूक्रेन की जंग ने मिस्र की अर्थव्यवस्था को काफी नुकसान पहुंचाया है। इस युद्ध ने मिस्र के विदेशी मुद्रा भंडार पर भी प्रभाव डाला है। 2022 में गेहूं के निर्यात पर रोक के बावजूद भारत ने मिस्र की मदद की है 61,500 मीट्रिक टन गेहूं वहां भेजा है।
रूस के आक्रमण के बाद से मिस्र की मुद्रा का मूल्य लगभग आधा हो गया है। कई विदेशी निवेशकों ने मिस्र के राजकोषीय बाज़ारों से अरबों डॉलर निकाल लिए हैं। संकट से उबरने के लिए, मिस्र अपने विदेशी ऋण को चुकाने के लिए और खाद्य सुरक्षा बनाए रखने के लिए भारत से निवेश पर नजर गड़ाए हुए है।
भारत भी मिस्र को करीब लाने की कोशिश में जुटा हुआ है क्योंकि मिस्र मिडिल ईस्ट-उत्तरी अफ्रीका यानी कि MENA में सबसे अधिक आबादी वाला देश है। मिस्र एक महत्वपूर्ण भू-रणनीतिक महत्व रखता है क्योंकि वैश्विक व्यापार का 12 प्रतिशत स्वेज नहर से होकर गुजरता है। विशेषज्ञों का कहना है कि काहिरा भारत के लिए यूरोप और अफ्रीका दोनों के प्रमुख बाजारों का प्रवेश द्वार हो सकता है।
भारत, मिस्र में चीन के बढ़ते प्रभाव से भी चिंतित है। मिस्र के साथ चीन का द्विपक्षीय व्यापार वर्तमान में 15 बिलियन डॉलर है, जो 2021-22 में भारत के 7.26 बिलियन डॉलर के दोगुने से भी अधिक है।
इंडियन काउंसिल ऑफ वर्ल्ड अफेयर्स (आईसीडब्ल्यूए), नई दिल्ली के वरिष्ठ शोद्धार्थी फज्जुर रहमान सिद्दीकी ने अल जज़ीरा को बताया कि भारत वैश्विक दक्षिण में एक महत्वपूर्ण शक्ति के रूप में उभरने का इरादा रखता है।
सिद्दीकी ने कहा, "मोदी के सत्ता में आने के बाद से, भारत ने अपनी विदेश नीति की पहुंच को व्यापक बनाने की कोशिश की है। सिद्दीकी ने कहा, भारत ने अफ्रीकी महाद्वीप पर लगभग 20 नए मिशन खोले हैं। अब मिस्र के साथ गठबंधन करके, भारत अरब दुनिया, अफ्रीका और इज़राइल तक अधिक गहरी पहुंच बना सकता है।












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