इमरान खान पाकिस्तान में इतने लोकप्रिय क्यों हैं? सेना से खुलकर ऐसे ही टक्कर नहीं ले रहे पूर्व प्रधानमंत्री

इमरान खान की लोकप्रियता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है, कि दर्जनों सैन्य अधिकारियों की पत्नियां भी उनकी फैन हैं। सेना के अंदर उनके नाम पर विभाजन हो चुका है।

imran khan popularity reasons

Imran Khan News: मंगलवार को जब इमरान खान को गिरफ्तार किया गया होगा, शायद ही उस वक्त प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और आर्मी चीफ जनरल आसिम मुनीर को इस बात का अहसास होगा, कि पूर्व प्रधानमंत्री के समर्थन में लाखों लोग सड़कों पर उतर आएंगे।

पाकिस्तान में पिछले तीन दिनों में करोड़ों रुपये की संपत्ति को इमरान समर्थकों ने फूंक दिया और जैसा कभी किसी ने सोचा भी नहीं था, आर्मी के हेडक्वार्टर तक पर हमला कर दिया गया। कई कोर कमांडर्स के घर जला दिए गये, पाकिस्तान बनाने वाले जिन्ना का घर तोड़ दिया गया, शहबाज शरीफ का निजी आवास जला दिया गया और रेडियो पाकिस्तान को भी इमरान समर्थकों ने आग के हवाले कर दिया।

पाकिस्तान से आई इन तस्वीरों ने पूरी दुनिया को झकझोर दिया, क्योंकि पाकिस्तान की जनता अपनी ही सेना के खिलाफ खड़ी हो जाएगी, ये एक अवास्तविक घटना सा लगता है। लेकिन, यह पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) प्रमुख को अपने फॉलोवर्स के बीच भारी लोकप्रियता का संकेत देता है।

लेकिन, इमरान खान इतने लोकप्रिय क्यों हैं, कि सेना और सरकार, लाख हाथ-पैर मारकर भी उन्हें घुटनों पर नहीं ला पा रही है? आईये डिकोड करते हैं।

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मसीहा जैसी शख्सियत

आउटलुक ने कहा है, कि इमरान खान अपने अनुयायियों के लिए सिर्फ एक राजनीतिक नेता नहीं हैं, बल्कि उन्होंने उनके बीच एक 'मसीहा जैसी शख्सियत' बनाई है। द एक्सप्रेस ट्रिब्यून के अनुसार, पीटीआई अध्यक्ष के समर्थक "उन्हें न केवल एक राजनीतिक नेता के रूप में देखते हैं, बल्कि राजनीतिक मसीहा के रूप में देखते हैं। उनका मानना है, कि इमरान खान ही एक मात्र आशा हैं, अन्यथा मुल्क बर्बाद हो जाएगा।

डेली टाइम्स ने गैलप पाकिस्तान द्वारा किए गए एक राष्ट्रव्यापी सर्वेक्षण का हवाला देते हुए बताया, कि इमरान खान पाकिस्तान में सबसे लोकप्रिय नेता हैं, जिनके बारे में 61 प्रतिशत लोगों के सकारात्मक विचार हैं।

जाहिर है, शहबाज शरीफ का गठबंधन और सेना के लिए इमरान की ये लोकप्रियता अच्छी नहीं है।

एएनआई के साथ पोडकास्ट में पाकिस्तान मामलों के जानकार सुशांत शरीन कहते हैं, कि "इमरान खान किसी भी मुद्दे पर फौरन यूटर्न लेने में माहिर हैं। वो झूठ बोलने में माहिर हैं, उनके सेक्स क्लिप्स बाहर आए, फिर भी उनके समर्थकों ने यही माना, कि सब गलत है"। वहीं, भारत के कैबिनेट सेक्रेटरी रह चुके तिलक देवासर कहते हैं, कि "इमरान खान के खिलाफ जो सबूत हैं, वो डॉक्यूमेंटेड हैं, वो शीशे की तरफ साफ हैं, फिर भी इमरान खान ने अपनी कल्ट इमेज बरकरार रखी है।"

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गैलप के सर्वे में पता चला है, कि पिछले साल अप्रैल में जिस तरह से इमरान खान को सत्ता से बाहर किया गया, उसने उनकी लोकप्रियता को रॉकेट की रफ्तार से बढ़ाया है।

1996 में पीटीआई का गठन करके राजनीतिक कदम उठाने से पहले, इमरान खान पहले से ही पाकिस्तान में एक सम्मानित क्रिकेट आइकन थे, जिन्होंने 1992 के विश्व कप में अपने देश को ऐतिहासिक जीत दिलाई थी।

यूनिवर्सिटी ऑफ वेस्टर्न ऑस्ट्रेलिया में सेंटर फॉर मुस्लिम स्टेट्स एंड सोसाइटीज की निदेशक समीना यास्मीन ने टाइम पत्रिका को बताया, कि "उनके समर्थक सोचते हैं, कि इमरान खान कुछ गलत कर ही नहीं सकते हैं"। उन्होंने कहा, कि "वह जो भी कहानी लेकर आते हैं, सही या गलत, तर्कसंगत या तर्कहीन, लोग उनका समर्थन करते हैं।"

"उनके पास लोगों को यह समझा देने की आदत है, कि वह पूरे देश में एकमात्र ईमानदार व्यक्ति हैं।"

द एक्सप्रेस ट्रिब्यून के स्तंभकार रज़ा हबीब राजा ने अपने एक आर्टिकिल में लिखा है, कि "पाकिस्तान तहरीक-ए- इंसाफ वास्तव में एक राजनीतिक दल नहीं है, जो समय के साथ स्वाभाविक तौर पर विकसित हुआ है, बल्कि ये एक मसीहा केन्द्रित पार्टी है। इसके कोर समर्थक इसके विचार से बंधे हुए लगते हैं, क्योंकि उन्हें पाकिस्तान में काफी प्रचलित राष्ट्रवाद की चाशनी में छाना गया है। वो इमरान खान के सामने मंत्रमुग्ध होते हैं, जो उनकी राय में देशभक्ति और धार्मिक अवतार हैं।"

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नाम लेकर आरोप लगाना

द एक्सप्रेस ट्रिब्यून का कहना है, कि इमरान खान की रणनीति देश के भ्रष्ट राजनीतिक दलों पर लगातार कहानियां बनाकर समाज को 'शुद्ध लोगों' और 'भ्रष्ट अभिजात वर्ग' में बांटकर दबाव बनाए रखने की रही है। वो नाम लेकर आरोप लगाते हैं, बार बार आरोप लगाते हैं, जिससे लोगों को लगता है, कि उनमें भ्रष्टाचारियों से लड़ने की हिम्मत है।

हालांकि, सत्ता में चार साल तक रहने के दौरान वो एक भी भ्रष्टाचार को सजा नहीं दिलवा पाए और उनके खिलाफ खुद ही भ्रष्टाचार के कई संगीन आरोप लगे हैं, जिनके पर्याप्त सबूत सरकार के पास हैं। इस बार भी उन्हें भ्रष्टाचार के ही आरोप में गिरफ्तार किया गया।

टाइम पत्रिका ने समीना यास्मीन के हवाले से लिखा है, कि "तथ्य यह है कि इमरान खान को मानहानि या किसी अन्य आरोप के बजाय भ्रष्टाचार के मामले में गिरफ्तार किया गया था, और शायद ये कोशिश उनके कल्ट फिगर को धूमिल करने के लिए है।"

हालांकि, उन्होंने कहा, कि यह कदम "बैकफायर" कर सकता है। वास्तविकता यह है, कि उन्हें पाकिस्तान में बहुत ज्यादा समर्थन प्राप्त है। और उनकी लोकप्रियता अब उस प्वाइंट पर आ चुका है, जहां शायद आप तर्क की बात नहीं कर सकते हैं।"

इमरान खान पर कथित तौर पर मानहानि, आतंकवाद और भ्रष्टाचार सहित 140 से अधिक मामलों में मामला दर्ज किया गया है। लेकिन, जो नई तस्वीर बनी है, उसमें उनके समर्थक एक स्वर में कहते हैं, कि बदला लेने के लिए उनके खिलाफ इतने मामले दर्ज किए गये हैं। कुछ एक्सपर्ट्स का कहना है, कि डेढ़ सौ के करीब मुकदमे ठोककर सरकार ने बड़ी गलती कर दी है, क्योंकि हकीकत ये है, कि वो कम से कम आतंकवादी नहीं हैं।

पाकिस्तान की राजनीति को समझने वाले जानकारों का कहना है, कि अगर उन्हें सजा दी जाती है, फिर भी उनके समर्थकों की संख्या में कमी नहीं आएगी, हो सकता है वो बढ़ ही जाए।

ओपिनियन पोल से पता चलता है, कि अगर आज की तारीख में पाकिस्तान में चुनाव करवाए जाते हैं, को इमरान खान की पार्टी लैंडस्लाइड जीत हासिल करेगी और उनके विपक्षी उनकी लहर में पत्तों की तरह उड़ जाएंगे। ये बात शहबाज शरीफ, उनका गठबंधन और सेना समझती है, इसीलिए चुनाव नहीं करवाए जा रहे हैं। इसीलिए इमरान खान चुनाव करवाने के लिए अड़े हुए हैं।

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युवाओं के बीच मजबूत पकड़

इमरान खान ने 'नया पाकिस्तान' के वादे के साथ देश के युवाओं के बीच काफी गहरी पकड़ बनाई है। पाकिस्तान की एक स्वतंत्र राजनीतिक और सुरक्षा विश्लेषक सितारा नूर ने आउटलुक को बताया, कि उनकी पार्टी ने युवाओं को जोड़ने के लिए प्रभावी ढंग से सोशल मीडिया का इस्तेमाल किया है, जो कुल आबादी का लगभग 65 प्रतिशत है।

वहीं, द एक्सप्रेस ट्रिब्यून के स्तंभकार जीशान अहमद कहते हैं, कि "पीटीआई का उदय पाकिस्तानी नागरिकों की प्रचलित राजनीति से मोहभंग होने की वजह से हुई है, जिनमें से कई मध्यवर्गीय शहरी युवाओं का प्रतिनिधित्व करते हैं।"

अहमद ने कहा, कि इमरान खान की लोकप्रियता सेना से अलग "स्वतंत्र रूप से" विकसित हुई है। यह व्यापक रूप से माना जाता है कि नवाज शरीफ से छुटकारा पाने के लिए इसी सेना ने 2018 में इमरान खान को सहारा दिया था। हालांकि, पीटीआई प्रमुख सर्व-शक्तिशाली सेना की कृपा से ही सत्ता से भी बाहर किए गये, क्योंकि उन्होंने अपने शासन के चौथे साल में सेना को ही लपेटना शुरू कर दिया था। सत्ता से बाहर होने के बाद उन्होंने, यहां तक कि पूर्व सेना प्रमुख क़मर जावेद बाजवा को अपनी बर्खास्तगी के लिए दोषी ठहराया।

मंगलवार को इस्लामाबाद हाईकोर्ट के बाहर अर्धसैनिक रेंजरों ने इमरान खान को जिस तरह से गिरफ्तार किया, वो उनके लिए एक आशीर्वाद की तरह काम किया। इमरान खान खुद भी यही चाहते थे। जबकि, दिलचस्प बात यह है, कि इमरान खान लगातार आईएसआई के नंबर-2 अधिकारी के खिलाफ आरोप लगा रहे थे, जिसका सेना ने जवाब दिया और उसके अगले दिन उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। इमरान खान ने आईएसआई अधिकारी पर उनकी हत्या की कोशिश करने का आरोप लगाया है।

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    हालांकि, पाकिस्तान की जो अब स्थिति बन रही है, वो इमरान खान बनाम सेना और शहबाज शरीफ से आगे निकलता जा रहा है, क्योंकि जून में इस बात की पूरी संभावना है, कि देश डिफॉल्ट कर जाएगा। आईएमएफ और पाकिस्तान सरकार के बीच कर्ज को लेकर बात बनने की संभावना अब नगन्य हो चुकी है।

    लिहाजा, डिफॉल्ट होने के बाद पाकिस्तान के जो हालात होंगे, उसके बारे में अंदाजा लगाना भी मुश्किल होगा और उस वक्त देश की जनता अपने लिए सड़कों पर उतर सकती है, जैसा हम पिछले साल श्रीलंका में देख चुके हैं और अगर वैसी स्थिति बनती है, तो सेना के लिए भी देश को संभालना असंभव की तरह होगा, क्योंकि इमरान खान देश की जनता का सेना को लेकर विश्वास बहुत हद तक तोड़ चुके हैं।

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