बांग्लादेश में विपक्ष का विशालकाय प्रदर्शन, चुनाव से पहले शेख हसीना सरकार के खिलाफ क्यों फूटा गुस्सा?
Bangladesh News: रविवार को बांग्लादेश में पुलिस, विपक्ष के समर्थकों के साथ झड़प कर रही थी, आंसू गैस और रबर की गोलियां चला रही थी, क्योंकि बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के समर्थकों ने प्रधान मंत्री शेख हसीना के इस्तीफे की मांग को लेकर राजधानी ढाका में प्रमुख सड़कों को जाम कर दिया था।
बीएनपी के मुताबिक, पुलिस के लाठी चार्ज में उसके दर्जनों समर्थक घायल हो गए हैं और 120 से ज्यादा सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है। बांग्लादेश में बढ़ती महंगाई और जीवनयापन के संकट के बीच, देश में आर्थिक संकट गहरा रही है और बीएनपी ने हाल के महीनों में कई बड़ी विरोध रैलियां आयोजित की हैं, और उसके हजारों पार्टी समर्थक सड़कों पर उतर आए हैं।

बांग्लादेश में मौजूदा उथल-पुथल सबसे गंभीर राजनीतिक संकटों में से एक है., जिसका हसीना और उनकी अवामी लीग पार्टी ने हाल के वर्षों में सामना किया है। लिहाजा, आइये जानते हैं, कि चुनाव से पहले बांग्लादेश में हो रहा विरोध प्रदर्शन, क्या शेख हसीना सरकार के लिए खतरे की घंटी है?
विपक्ष क्यों कर रहा है प्रदर्शन?
बीएनपी चाहती है, कि प्रधान मंत्री हसीना पद छोड़ दें और जनवरी 2024 में होने वाला अगला चुनाव एक तटस्थ कार्यवाहक सरकार के तहत हो।
शुक्रवार को एक रैली के दौरान, बीएनपी महासचिव मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर ने कहा कि "इस सरकार के तहत निष्पक्ष चुनाव होने की कोई गुंजाइश नहीं है।"
उन्होंने कहा, कि "देश की हर महत्वपूर्ण संस्था को नष्ट कर दिया गया है और लोगों के अधिकार छीन लिए गए हैं।" आलमगीर ने समर्थकों से कहा, "हर जरूरी चीज की कीमतों में बढ़ोतरी ने लोगों के जीवन को दयनीय बना दिया है।"
बीएनपी, जिसकी नेता और पूर्व प्रधान मंत्री खालिदा जिया भ्रष्टाचार के आरोप में प्रभावी रूप से घर में नजरबंद हैं, उन्होंने पहले प्रधानमंत्री शेख हसीना पर 2014 और 2018 में वोट में धांधली का आरोप लगाया है।
हालांकि, शेख हसीना की अवामी लीग पार्टी ने बार-बार आरोपों को खारिज कर दिया है।
साल 2009 में सत्ता में आने के बाद से शेख हसीना ने सरकार को सख्ती से नियंत्रित किया है और उनकी सरकार के ऊपर मानवाधिकार उल्लंघन के आरोप लगे हैं। इसके अलावा, फ्रीडम ऑफ स्पीच को दबाने और एक तानाशाह बनकर शासन करने के आरोप लगे हैं।
लेकिन, अवामी लीग का कहना है, कि फ्रीडम ऑफ स्पीच की आड़ में कट्टरपंथी ताकतों को देश में उभरने नहीं दिया जाएगा।
वहीं, बीएनपी, जिसे पाकिस्तान की तरफ से लगातार समर्थन दिया जाता है, शेख हसीना सरकार उसे सत्ता से बाहर रखना चाहती है, ताकि देश में पाकिस्तान की घुसपैठ पहले खालिदा जिया के पहले शासनकाल के दौरान जैसी ना हो जाए। शेख हसीना ने प्रधानमंत्री बनने के बाद पाकिस्तान के तमाम तार बांग्लादेश में काट दिए हैं।

सरकार की स्थिति क्या है?
अब तक, सरकार ने विपक्ष की मांगों को यह कहते हुए खारिज कर दिया है, कि कार्यवाहक सरकार स्थापित करना असंवैधानिक है।
पाकिस्तान में ऐसा ही होता है, जब चुनाव से पहले एक कार्यवाहक सरकार की स्थापना की जाती है और खालिदा जिया की बीएनपी उसी से प्रभावित है।
साल 2011 में बांग्लादेश की सुप्रीम कोर्ट ने 15 साल पुराने उस संवैधानिक प्रावधान को रद्द कर दिया था, जिसमें एक मौजूदा सरकार को, निष्पक्ष चुनाव करवाने के लिए एक अंतरिम सरकार का गठन करने की अनुमति देता था।
सुप्रीम कोर्ट ने 15 साल पुराने लिए गये इस फैसले को संविधान के खिलाफ बताया था।
अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की प्रतिक्रिया क्या है?
इस महीने की शुरुआत में, एमनेस्टी इंटरनेशनल में दक्षिण एशिया के क्षेत्रीय प्रचारक यास्मीन कविरत्ने ने कहा, कि बांग्लादेश में बढ़ता तनाव "खतरनाक" है।
उसने कहा, कि "लोगों को विरोध और असहमति के लिए स्वतंत्र होना चाहिए।" यास्मीन कविरत्ने ने पुलिस से "संयम बरतने" का आह्वान करते हुए कहा, "उनकी आवाज़ों को दबाकर, सरकार यह संकेत दे रही है, कि देश के भीतर अलग-अलग राजनीतिक विचारों को बर्दाश्त नहीं किया जाता है।"
वहीं, संयुक्त राज्य अमेरिका ने बांग्लादेशी सरकार से स्वतंत्र और भागीदारीपूर्ण चुनाव कराने का आह्वान किया है। अमेरिका का कहना है, कि बांग्लादेश में पिछले दो चुनावों में धांधली की गई थी, लेकिन शेख हसीना की सरकार ने इन आरोपों को सिरे से नकारा है।
हालांकि, शेख हसीना की सरकार के खिलाफ अमेरिका इसलिए भी आक्रामक है, क्योंकि वो खालिदा जिया को फिर से प्रधानमंत्री देखना चाहता है, लेकिन नई दिल्ली, शेख हसीना सरकार के समर्थन में हमेशा से रही है। लिहाजा, बांग्लादेश में भारत बनाम अमेरिका का अलग खेल भी चल रहा है।
इस सप्ताह की शुरुआत में, 14 अमेरिकी कांग्रेसियों ने संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी राजदूत को संयुक्त राष्ट्र और तटस्थ दलों की मध्यस्थता के तहत बांग्लादेश में निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए लिखा था।

लेकिन शेख हसीना सरकार के लिए नई दिल्ली का समर्थन लगातार बढ़ता जा रहा है और बांग्लादेश को आर्थिक संकट से बचाने के लिए मोदी सरकार ने कई समझौते किए हैं।
वहीं, बांग्लादेशी सरकार ने अमेरिका और उसके पश्चिमी सहयोगियों पर देश के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करने का आरोप लगाया है।
बांग्लादेश में शेख हसीना की पार्टी काफी मजबूत है और नई दिल्ली के हितों के मुताबिक है, लिहाजा अगले साल जनवरी में होने वाले चुनाव से पहले बांग्लादेश की राजनीति काफी गर्म हो चुकी है और अब देखना दिलचस्प होगा, कि शेख हसीना अपनी सत्ता को बरकरार रखती हैं, या खालिदा जिया सत्ता में फिर से लौटती हैं?












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