भारत, हमास को आतंकी संगठन क्यों नहीं मानता? इजराइल के हमले के बाद क्या मोदी सरकार बदलेगी अपना स्टैंड?

हमास ने इसी महीने 7 अक्तूबर को जमीन, आसमान और समंदर तीनों तरफ से इजराइल पर हमला कर तबाही मचा दी। इस हमले से इजराइल में 1400 से अधिक लोगों की जान गई और कई लोग घायल हुए। भारत सहित दुनियाभर के नेताओं ने हमास के इस हमले की निंदा की। कई देशों ने खुलकर इसे एक आतंकवादी हमला माना।

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस हमले की घोर निंदा करते हुए ट्वीट किया और इसे एक आतंकवादी हमला कहा। हालांकि उन्होंने अपने ट्वीट में कहीं भी हमास का जिक्र नहीं किया। आपको बता दें कि भारत ने आधिकारिक रूप से हमास को आतंकी संगठन नहीं माना है।

Why India has not designated Hamas as a terrorist organisation

यूरोपीय संघ, अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा जैसे पश्चिमी देश जहां हमास को एक आतंकवादी संगठन मानते हैं, भारत का रुख इस मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र की तरह है जो उनको आतंकी संगठन नहीं मानता है।

भारत में इजराइल के राजदूत नाओर गिलोन ने बीते दिनों मोदी सरकार से हमास को आतंकवादी संगठन घोषित करने की अपील की थी। उन्होंने कहा कि भारत आतंकवाद से पीड़ित है। वो इसकी गंभीरता समझता है। इसलिए यही समय है कि भारत हमास को एक आतंकवादी संगठन घोषित करना चाहिए।

आपको बता दें कि भारत की आतंकवाद के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति रही है। भारत गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत एक समूह को आतंकवादी संगठन के रूप में नामित करता है।

किसी व्यक्ति को आतंकवादी के रूप में नामित करने के प्रावधान को शामिल करने के लिए यूएपीए में 2019 में संशोधन भी किया गया था। इस साल फरवरी तक भारत ने 44 संगठनों को आतंक घोषित कर रखा था। हालांकि, इसमें हमास शामिल नहीं है।

भारत ने आखिरी बार 2015 में किसी प्रमुख अंतरराष्ट्रीय संगठन के रूप में ISIS को आतंकी संगठन घोषित किया था। बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की विदेश नीति में हमास और हिज्बुल्लाह जैसे संगठन आतंकवादी संगठन घोषित नहीं हैं। इस रिपोर्ट में इसकी कुछ वजहें बताई गई है।

पहला ये कि हमास या हिजबुल्लाह ने कभी भी भारत का सीधे नुकसान नहीं पहुंचाया है। दूसरी वजह है कि हमास ने साल 2006 में फलिस्तीनी प्रशासन के चुनाव में हिस्सा लिया था। तब सभी विदेशी देशों ने तब उसे एक चुनावी प्रतिद्वंद्वी के रूप में देखा था।

तब से हमास राजनीतिक रूप से सक्रिय होने के साथ फिलिस्तीनी प्रशासन का हिस्सा रहा है। उसने साल 2006 में फिलिस्तीन के कई इलाके में चुनाव जीता था। जाहिर है उसे वहां के लोगों ने ही चुना है। उसके बाद से फिलिस्तीन में भले ही चुनाव न हुआ मगर वह वहां अब तक आमलोगों के बीच हमास का खास विरोध भी नहीं दिखाई देता है।

ऐसे में भारत के लिए किसी राजनीतिक संगठन को आतंकी घोषित करना कूटनीतिक तौर पर सही नहीं है। भारत, हमास को फिलीस्तीनी प्रशासन के एक हिस्से के रूप में देखता है। हालांकि भारत का हमास से कोई आधिकारिक रिश्ता नहीं है।

इसके अलावा हमास को अब तक आतंकी संगठन घोषित न करने के पीछे एक वजह भारतीय विदेश नीति का तटस्थ रहना भी बताया जाता है। भारत की विदेश नीति हमेशा से तटस्थ रही है। भारत हमेशा से मध्यम मार्ग अपनाता रहा है। अमेरिका, यूरोपीय संघ, ब्रिटेन की तरह भारत की विदेश नीति आक्रामक नहीं हैं।

फिलिस्तीन के साथ भारत का संबंध इजराइल से भी अधिक पुराना हैं, इसलिए एक पुराने साझेदार के रूप में भारत फिलिस्तीन की आंतरिक राजनीति की इज्जत करता है और उसमें हस्तक्षेप नहीं करता।

7 अक्टूबर को इजराइल पर घातक हमले के बाद हमास को आतंकी संगठन घोषित किए जाने की मांग जोर पकड़ने लगी है। इस मुद्दे पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने बताया कि किसी भी संगठन को आतंकवादी संगठन घोषित करना है एक कानूनी मुद्द है। एक झटके में किसी को आतंकी संगठन घोषित नहीं किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि भारतीय कानूनों के तहत इसके लिए एक प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है।

हालांकि हमास को आतंकवादी संगठन घोषित करने की राजनीति "जितनी आसान दिखती है उससे कहीं अधिक जटिल" हो सकती है। ओआरएफ के एक लेख में स्ट्रैटेजिक स्टडीज प्रोग्राम के फेलो कबीर तनेजा लिखते हैं, कि फिलिस्तीनियों का समर्थन पुरी दुनिया के मुस्लिम करते हैं। ऐसे में दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी वाले देश के लिए ये कदम मुश्किल भरा हो सकता है।

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