ख़ाशोज्जी पर सऊदी अरब ने क्यों की अमरीका की निंदा?
सऊदी अरब सरकार ने अमरीकी सीनेट के एक प्रस्ताव को अपने आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप क़रार दिया है.
अमरीकी सीनेट ने बीते गुरुवार को एक प्रस्ताव पास किया था.
इसमें ये मांग उठाई गई कि यमन में सऊदी अरब के नेतृत्व वाली सेनाओं को मिल रही अमरीकी सैन्य मदद को वापस ले लिया जाए.
इसके साथ ही सऊदी पत्रकार जमाल ख़ाशोज्जी की मौत के लिए क्राउन प्रिंस सलमान पर आरोप लगाया गया है.
अमरीकी सीनेट में पास किया गया ये प्रस्ताव प्रतीकात्मक है और इससे क़ानून में परिवर्तित होने की संभावना कम है.
लेकिन इस प्रस्ताव के पास होने से राष्ट्रपति ट्रंप को इस बात का अंदाज़ा हो गया है कि सऊदी सरकार की नीतियों पर अमरीकी सीनेट कितनी नाराज़ है.
आख़िर सऊदी अरब ने क्या कहा है?
सऊदी प्रेस एजेंसी ने सऊदी अरब के विदेश मंत्रालय के हवाले से लिखा है, "सऊदी अरब सरकार अमरीकी सीनेट के हालिया रुख़ की आलोचना करती है. ये रुख़ झूठे आरोपों के आधार पर अख़्तियार किया गया है और सऊदी अरब अपने आंतरिक मामलों में किसी भी तरह के हस्तक्षेप को ख़ारिज करता है."
"सऊदी अरब सरकार ने इससे पहले भी कहा है कि सऊदी नागरिक जमाल ख़ाशोज्जी की हत्या एक निंदनीय अपराध है. ये सरकार की नीतियों और संस्थाओं को दर्शाता है. इसके साथ ही यह सऊदी अरब में इस मामले में से जुड़ी न्याय प्रक्रिया को प्रभावित करने के सभी प्रयासों की निंदा करती है."
अमरीकी सरकार ने अब तक सऊदी अरब के इस बयान को लेकर किसी तरह की प्रतिक्रिया नहीं दी है.
अमरीकी सीनेट के प्रस्ताव में क्या था?
इतिहास में ये पहला मौक़ा है जब अमरीकी संसद के किसी भाग ने साल 1973 में पास किए गए क़ानून वॉर पॉवर्स एक्ट के तहत सैन्य संघर्ष में भेजी गईं अमरीकी सेनाओं को वापस बुलाने के लिए मतदान किया है.
इस प्रस्ताव के लिए वोटिंग के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप की पार्टी के भी कुछ नेताओं ने उनके ख़िलाफ़ जाकर मतदान किया. इसके बाद ये प्रस्ताव 56-41 से पास किया.
इस प्रस्ताव के तहत अमरीकी सीनेट ने राष्ट्रपति ट्रंप से यमन में लड़ रही सभी अमरीकी टुकड़ियों को वापस बुलाने की मांग की है.
हालांकि, इसमें इस्लामिक स्टेट के साथ संघर्ष कर रही अमरीकी टुकड़ियों को वापस बुलाने की बात नहीं की गई है.
मगर अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप इस प्रस्ताव को मानने के लिए बाध्य नहीं हैं.
अमरीका ने बीते महीने से सऊदी अरब के युद्धक विमानों को तेल भरने से रोक दिया है.
इसके साथ ही गुरुवार को पास हुआ प्रस्ताव अगर क़ानून में बदलता है तो ये क़ानून इसे पूरी तरह बंद कर देगा.
सीनेट ने सर्वसम्मति से दो अक्टूबर को अमरीकी अख़बार वॉशिंगटन पोस्ट के लिए लिखने वाले सऊदी पत्रकार जमाल ख़ाशोज्जी की हत्या का आरोप क्राउन प्रिंस सलमान पर लगाया है और हत्या के लिए ज़िम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय करने की बात कही है.
जमाल ख़ाशोज्जी को तुर्की के इस्तांबुल शहर में सऊदी अरब के दूतावास में मार दिया गया था.
सऊदी अरब के सरकारी वक़ील ने बताया था कि एक बेलगाम ख़ुफिया एजेंट के आदेश पर ख़ाशोज्जी की हत्या को अंजाम दिया गया था.
हालांकि, तुर्की के अधिकारियों का कहना है कि उनके पास इस मामले से जुड़े सुबूत एवं ऑडियो रिकॉर्डिंग्स हैं और इस हत्या को सऊदी एजेंट्स ने बहुत ऊपर से आए आदेश पर अंजाम दिया है.
क्या ये प्रस्ताव क़ानून बन सकता है?
राष्ट्रपति ट्रंप ने इस प्रस्ताव को हाउस ऑफ़ रिप्रजेंटेटिव में रोकने की क़सम खाई है.
अमरीकी संसद के इस सदन में बुधवार को इसी मामले पर प्रस्तावित किए गए एक मतदान को रोक दिया गया था.
हालांकि, इस प्रस्ताव को पेश करने वाले निर्दलीय सीनेटर बर्नी सेंडर्स ने कहा है कि आगामी जनवरी में ये प्रस्ताव पास होने की उम्मीद है क्योंकि तब मध्यावधि चुनावों में जीतकर आए नेताओं की वजह से हाउस ऑफ़ रिप्रजेंटेटिव में डेमोक्रेटिक पार्टी के पास बहुमत होगा.
ट्रंप प्रशासन का तर्क है कि इस प्रस्ताव की वजह से ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के ख़िलाफ़ सऊदी नेतृत्व वाली सेनाओं की लड़ाई कमज़ोर होगी.












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