दावोस में क्यों जुटते हैं अरबपति कारोबारी और मोदी, ट्रंप जैसे नेता

दावोस
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कुछ बरस पहले जनवरी के महीने में पत्रकारों के लिए इस तरह के लेख के लिए कलम चलाना फैशन सा था कि दावोस के 'वर्ल्ड इकॉनॉमिक फोरम' में दुनिया भर के तथाकथित संभ्रांतों का मेला लग रहा है. लेकिन इस फोरम का असर धीरे-धीरे घटने लगा और कॉकटेल पार्टियों के बीच नीतियां तय करने का दौर ख़त्म होता दिखा.

वक्त ने करवट ली और वर्ल्ड इकॉनॉमिक फोरम में ए लिस्ट वाले चंद ही नाम दिखाई देने लगे. प्रभावी स्टार्ट अप्स इस सालाना कार्यक्रम से दूरी रखते हुए अपने सम्मेलनों के आयोजनों को प्राथमिकता देने लगे. इनके आयोजन कम खर्चीले होते हैं और उन तक पहुंच भी अपेक्षाकृत आसान होती है.

लेकिन इस साल वर्ल्ड इकॉनॉमिक फोरम ने आलोचकों के मुंह पर ताला जड़ दिया है. स्विट्जरलैंड का छोटा सा शहर फिर से चकाचौंध में है और तमाम बड़े नाम सालाना फोरम में शिरकत कर रहे हैं.

दुनिया के लिए दावोस इतना ज़रूरी क्यों?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दावोस जाने की क्यों सूझी?

डोनल्ड ट्रंप
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ट्रंप पर निगाहें

इस बार तमाम सुर्खियां अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के नाम हो सकती हैं जो 'अमरीका फर्स्ट' के संदेश के साथ शुक्रवार को पहली बार दावोस पहुंचेंगे.

इस सम्मेलन में वो दुनिया भर के नेताओं, व्यापारिक प्रमुखों और बैंकरों से मुखातिब होंगे.

ट्रंप के अलावा यहां भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, ब्रिटेन की प्रधानमंत्री टेरीज़ा मे, और जर्मन चांसलर एंगेला मर्केल भी होंगी.

मोदी करीब दो दशकों में सम्मेलन में शिरकत करने वाले भारत के पहले प्रधानमंत्री हैं.

अलीबाबा के जैक मा और जेपी मोर्गन के जैमी डिमोन समेत कई सीईओ भी होंगे.

सैंड्रा नविदी
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सैंड्रा नविदी

नीतिया तय करने वाली मीटिंग

47 साल पहले अर्थशास्त्री क्लॉस श्वाप ने जिस कॉन्फ्रेंस की शुरुआत की थी उसकी अहमियत सिर्फ स्टार पावर की वजह से नहीं है.

इस साल दुनिया भर में वर्ल्ड इकॉनॉमिक फोरम का बर्फीला परिदृश्य ही प्रमुखता से नज़र आएगा, लेकिन लोगों की नज़रों के परे होटलों के कॉरिडोर और भीड़ भरे कैफ़े में, तांक झांक करने वाले कैमरों और माइक्रोफोन की पहुंच से दूर बंद करने में होने वाले सत्रों में दावोस की मजबूती को बल मिलेगा.

दुनिया भर के फाइनेंसरों की आदतों का ब्यौरा देने वाली किताब 'सुपरहब्स' की लेखक सैंड्रा नविदी कहती हैं, "वर्ल्ड इकॉनॉमिक फोरम शायद हमारे दौर का सबसे प्रभावी और शक्तिशाली नेटवर्क प्लेटफॉर्म है."

वो कहती हैं कि ये राष्ट्र प्रमुखों, नीति निर्धारकों और बिजनेस प्रमुखों को लोगों की नज़रों में आने के डर के बिना रूबरू मुलाकात का मौका मुहैया कराती है जो इसके बिना शायद ही संभव होता.

ऐसी मुलाक़ातों में से खास मुलाकातों को दावोस की भाषा में "इनफॉर्मल गैदरिंग ऑफ वर्ल्ड इकॉनॉमिक लीडर्स (दुनिया भर के अर्थनीति के अगुवाओं की अनौपचारिक मुलाकात) " कहा जाता है.

इनमें सिर्फ प्रधानमंत्री, विदेश मंत्री, वित्त मंत्री और केंद्रीय बैंकों के गवर्नर शरीक होते हैं.

सीईओ मिलते हैं तो क्या बातें करते हैं?

टेरिज़ा मे
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टेरिज़ा मे

मिलेंगे टेरीज़ा और ट्रंप

इस साल टेरीज़ा मे और डोनल्ड ट्रंप के बीच ऐसी ही मुलाकात होनी है. ऐसी ही दूसरी मुलाकातें भी हो सकती हैं.

ऐसी मुलाकातें सिर्फ नेताओं तक सीमित नहीं हैं.

सैंड्रा कहती हैं, " उद्योगों और परस्पर हितों के मुद्दों पर चर्चा के लिए फाइनेंसरों के बीच भी मुलाकात होती है. वो इन मुद्दों को नीति निर्धारकों के सामने भी सीधे उठा सकते हैं."

दूसरी मीटिंगों में 'रिश्ते बनाने' की कोशिश होती है. ऐसे रिश्ते जो वक्त के साथ परस्पर हित साधने वाले हों और आने वाले बरसों में इनके जरिए विलय और अधिग्रहण सौदों की नींव तैयार हो.

द एम एंड ए एडवाइज़र के चीफ़ एक्ज़ीक्यूटिव डेविड फर्ग्यूसन कहते हैं, "ये एक ऐसा अवसर है, जहां आप देख सकते हैं कि दूसरे क्या कर रहे हैं."

डेविड फर्ग्यूसन लगातार चौथे साल दावोस आए हैं.

पॉल कगामे
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पॉल कगामे

हर कदम पर मौके

वो स्विस साइबर सिक्योरिटी फर्म WISeKey और रवांडा सरकार के बीच औपचारिक रिश्ते का जिक्र करते हैं जिसकी शुरुआत साल 2016 में देश के राष्ट्रपति पॉल कगामे के साथ ब्रेकफास्ट पर हुई थी.

संतरे के जूस की चुस्कियां लेते हुए राष्ट्रपति ने पूर्वी अफ्रीका के अपने देश में तकनीकी लाने का आमंत्रण दिया और बताया कि वहां उन्हें एक सहयोगी सरकार और व्यापारिक समुदाय मिलेगा.

करीब एक साल बाद WISeKey ने रवांडा में ब्लॉकचेन तकनीक के इस्तेमाल का एलान किया.

फर्ग्यूसन कहते हैं कि इस परियोजना की कामयाबी में स्विट्जरलैंड की पहाड़ियों में होने वाले सम्मेलन के आयोजकों, लोगों और परस्पर हितों का सौ फीसद योगदान है.

नई टेक फर्म भी अब दावोस से किनारा नहीं कर रही हैं.

वो कहते हैं, "साल 2014 में नॉन टेक कंपनियों ने 15 फीसद से कम टेक कंपनियों का अधिग्रहण किया था. बीते साल ये दर 58 फीसद थी."

यहां कतारों में या फिर शटल बसों का इंतज़ार करते हुए भविष्य के निवेशकों से मुलाकात के मौके हमेशा बन सकते हैं.

बस अपना बिजनेस कार्ड हमेशा अपने साथ रखिएगा.

दावोस में रंग जमाने वाले सबसे युवा उमर

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