एशिया का नॉर्ड स्ट्रीम! 'इस्लाम के चैम्पियन' पाकिस्तान ने की ईरान से धोखेबाजी, पाइपलाइन प्रोजेक्ट को किया रद्द
Pakistan Cancel Iran Pipeline Project: इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ पाकिस्तान, जो मुस्लिम समुदाय के हितों की वकालत करने का दावा करने में गर्व महसूस करता है, उसकी रीढ़ की हड्डी में कितना दम है, उसकी पोल एक बार फिर खुल गई है। डॉलर के लिए जमीन पर लोटने वाले जिन्ना का मुल्क, एक बार फिर से अमेरिका के सामने जमीन पर लेट गया और दूसरे इस्लामिक मूल के साथ धोखेबाजी करने में, जरा भी हिचकिचाहट नहीं दिखाई।
अमेरिका के प्रेशर के आगे लोटते हुए पाकिस्तान ने एक दशक पहले ईरान के साथ किए गये गैस पाइपलाइन प्रोजेक्ट को रद्द कर दिया है, जिसका अपने हिस्से का काम ईरान करीब करीब पूरा कर चुका था। पाकिस्तान की इस हरकत ने इस्लामिक बिरादरी को निराश कर दिया है और पाकिस्तान की धुर्तता एक बार फिर से जगजाहिर हो गई है।

पाकिस्तान ने ईरान को दिया धोखा
नेशनल असेंबली को दी गई एक लिखित गवाही के अनुसार, पाकिस्तान के पेट्रोलियम राज्य मंत्री डॉ. मुसादिक मलिक ने कहा, कि "पाकिस्तान ने गैस बिक्री और खरीद समझौते (जीएसपीए) के तहत ईरान को फ़ोर्स मेज्योर एंड एक्सक्यूज़िंग इवेंट का नोटिस जारी किया गया है। जिसके तहत GSPA के तहत पाकिस्तान के दायित्वों को निलंबित कर दिया गया है।"
आपको बता दें, कि ईरान ने गैस पाइपलाइन प्रोजेक्ट में देरी के लिए पाकिस्तान के ऊपर भारी जुर्माना लगाने की धमकी दी है, जिसको लेकर पाकिस्तान की नेशनल असेंबली के सदस्य, जमाल-उद-दीन ने शहबाज सरकार से सवाल पूछा था, कि क्या प्रोजेक्ट में देरी के लिए पाकिस्तान को जुर्माना भी देना होगा?
जिसपर पाकिस्तान के पेट्रोलियम मंत्री ने कहा, कि "ईरान पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के कारण जीएसपीए रुका हुआ है।" उन्होंने स्पष्ट किया, कि ईरान पर प्रतिबंध हटने के बाद परियोजना गतिविधियां शुरू हो जाएंगी और ऐसा कोई खतरा नहीं है, कि प्रतिबंधों से राज्य के स्वामित्व वाली संस्थाओं (एसओई) पर असर पड़ेगा।"
उन्होंने कहा, कि ईरान-पाकिस्तान गैस पाइपलाइन परियोजना के पूरा होने के लिए कोई तारीख और समय सीमा नहीं दी जा सकती है।
फ़ोर्स मेज्योर एंड एक्सक्यूज़िंग इवेंट क्या है?
फ़ोर्स मेज्योर एंड एक्सक्यूज़िंग इवेंट, जिस विकल्प का पाकिस्तान ने सहारा लिया है, वह अमेरिकी दबावों के आगे झुकने को तर्कसंगत बनाने की एक चाल है।
यह एक अंतरराष्ट्रीय कूटनीति को दर्शाता है, जिसमें किसी समझौते से पीछे हटने के लिए एक बहाना तलाशा जाता है।
आईएमएफ से लगभग 1.6 बिलियन अमेरिकी डॉलर के वित्तीय ऋण को मंजूरी मिलने के कुछ ही दिनों के भीतर पाकिस्तान सरकार ने दो महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं, जिसके तहत सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और चीन से भी पाकिस्तान को ऋण मिले हैं।
पहला कदम, पाकिस्तान ने अपने क्षेत्र में ईरान-पाकिस्तान गैस पाइपलाइन के निर्माण को रोक दिया है, जबकि ईरान ने अपने क्षेत्र में पाइपलाइन बिछाने का काम पूरा कर लिया है। पाकस्तान ने ईरान को धोखा देकर, वाशिंगटन में अधिकारियों को विश्वास हो दिलाने की कोशिश की है, कि पाकिस्तान ईरान के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों को नजरअंदाज नहीं करने पर सहमत हो गया है।
पाकिस्तान सरकार द्वारा उठाया गया दूसरा कदम नेशनल असेंबली में एक विधेयक को पारित करना है, जो पाकिस्तान के भीतर आतंकवाद के वित्तीय स्रोतों को रोकने का प्रावधान करता है।
पाकिस्तान के सामने आईएमएफ ने आतंकवादियों को दी जाने वाली फंडिंग रोकने की शर्त रखी थी, जिसके लिए पाकिस्तान ने अपने नेशनल असेंबली में बिल पास किया है।
ईरान की प्रतिक्रिया क्या है?
ईरान ने पाकिस्तान द्वारा 'फोर्स मेज्योर एंड एक्सक्यूज़िंग इवेंट' का नोटिस जारी करने की वैधता पर सवाल उठाया है, जिसके तहत पाकिस्तान ने अपने क्षेत्र में गैस पाइपलाइन बिछाने से रोकने के अधिकार का दावा किया था।
ईरानी विदेश मंत्री हुसैन अमीर अब्दुल्लाही इस्लामाबाद की तीन दिवसीय यात्रा पर थे, जहाँ उन्होंने अपने पाकिस्तानी समकक्ष से मुलाकात की। उन्होंने पाकिस्तान के विदेश मंत्री को परियोजना को पूरा करने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि यह दोनों देशों के राष्ट्रीय हितों की पूर्ति करेगा।
तेहरान का कहना है, कि उसने 1,150 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन का अपना हिस्सा पूरा कर लिया है, जिसके लिए मार्च 2013 में तत्कालीन राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी और डॉ. महमूद अहमदीनेजाद द्वारा संयुक्त रूप से चाहबहार के पास, गबद की ईरानी साइट पर करीब साढ़े 7 अरब डॉलर की लागत से ये काम पूरा किया गया है।
पाकिस्तान को जनवरी 2015 तक अपना काम पूरा करना था। लेकिन फरवरी 2014 में, पाकिस्तान के तत्कालीन पेट्रोलियम मंत्री शाहिद खाकन अब्बासी ने नेशनल असेंबली को बताया, कि अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के कारण यह परियोजना रूक गया है। पाकिस्तान के इस कदम से ईरान को अरबों डॉलर का नुकसान हो रहा है, जो पहले से ही आर्थिक संकट से जूझ रहा है।












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