Imran Khan: सेना के चहेते इमरान खान कैसे बने विलेन, अब आर्मी ही क्यों लेना चाहती है पूर्व प्रधानमंत्री की जान?

इमरान खान की गिरफ्तारी उस वक्त की गई, जब उन्होंने सीधे तौर पर देश की शक्तिशाली सेना और उसकी जासूसी एजेंसी आईएसआई पर हमला बोला था और उन्होंने आईएसआई के एक वरिष्ठ अधिकारी पर अपने उपर जानलेवा हमला करवाने का आरोप लगाया था।

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Imran Khan News: पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बनने के दो महीने बाद, इमरान खान ने नवंबर 2018 में कहा था कि उनकी सरकार और देश की सेना "सभी एक पृष्ठ पर" हैं।

इमरान खान का ये बयान बता रहा था, कि वो कितने आरान से सत्ता चला रहे हैं, जिन्हें सेना का पूरा समर्थन हासिल है। विपक्ष भी यही कह रहा था, कि सेना ही इमरान खान को सत्ता में लेकर आई है। बिलावल भुट्टो ने देश की संसद में इमरान खान को 'सलेक्टेड प्रधानमंत्री' करार दिया। हालांकि,उस समय, क्रिकेटर से राजनेता बने "नया पाकिस्तान" का नारा बुलंद करने वाले इमरान खान से देश की जनता को बहुत उम्मीदें थीं।

साल 2020 में जब कोविड महामारी फैली, उस वक्त भी इमरान खान ने एक बार फिर जोर देकर कहा, कि उनके पाकिस्तानी सेना के अधिकारियों के साथ "सबसे सामंजस्यपूर्ण" संबंध हैं।

हालांकि, तब से बहुत कुछ बदल गया है। सेना ने इमरान खान का साथ छोड़ा और उसके साथ ही इमरान खान की सत्ता भी चली गई। पिछले साल उनके ऊपर हमला किया गया, पैरों में तीन गोलियां लगीं और उसके बाद से इमरान खान को गिरफ्तार करने की दर्जन भर से ज्यादा कोशिशें की गईं और आखिरकार मंगलवार को उन्हें गिरफ्तार कर ही लिया गया।

पाकिस्तान में इसी साल चुनाव होने हैं और पाकिस्तानी राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है, कि "खेल साफ है। सरकार चाहती है, कि इमरान समर्थक बवाल करें, सेना पर हमला करें, संपत्ति को नुकसान पहुंचाएं, ताकि उसका हवाला देकर इमरान खान की पार्टी को ब्रतिबंधित कर दिया जाए। इमरान खान के चुनाव रोकने पर रोक लगा दिया जाए और उसके बाद चुनाव करवाएं जाएं, ताकि शहबाज शरीफ या उनके भाई नवाज शरीफ फिर से देश के प्रधानमंत्री बन सकें।"

सेना के साथ कैसे हुए संबंध खराब

जुलाई 2018 में इमरान खान की पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) ने नेशनल असेंबली में 116 सीटों पर जीत हासिल की थीं। उस साल के आम चुनाव में इमरान खान की पार्टी ने 270 सीटों पर उसने चुनाव लड़ा था। उस समय पूर्व प्रधान मंत्री नवाज शरीफ को भ्रष्टाचार के एक मामले में 10 साल की जेल की सजा सुनाई गई थी, लेकिन उनकी पार्टी, पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) फिर भी 64 सीटें हासिल करने में कामयाब रही।

नवाज शरीफ और उनकी बेटी मरियम ने बार-बार दावा किया, कि सेना और इमरान खान ने उन्हें पद से हटाने की साजिश रची थी। हालांकि, उस वक्त इमरान खान अपनी जीत से उत्साह में थे और सेना में उनका विश्वास चरम पर था। उम्मीदें भी जगीं, पहली बार, एक पाकिस्तानी पीएम पूरे पांच साल का कार्यकाल पूरा कर सकता है।

इमरान खान ने अपनी जीत के बाद जुलाई 2018 में एक राष्ट्रीय संबोधन में कहा था, "जब मैं राजनीति में आया, तो मैं चाहता था, कि पाकिस्तान उस तरह का देश बने जैसा हमारे नेता (पाकिस्तान के संस्थापक) मुहम्मद अली जिन्ना चाहते थे।"

लेकिन सितंबर 2020 में अल जज़ीरा के साथ एक इंटरव्यू में, इमरान खान ने कहा, कि "माना जाता है कि यह देश में राजनीति को निर्देशित करने वाली संस्था है"।

इमरान खान स्वीकार करते हुए कहा, कि सेना और पिछली असैन्य सरकारों के बीच एक "विचित्र इतिहास" रहा है। उन्होंने कहा, कि "मुझे ईमानदारी से लगता है, कि यह सबसे सामंजस्यपूर्ण संबंध है (उस वक्त का)। हमारे पास पूरा समन्वय है, हम एक साथ काम करते हैं, सेना पूरी तरह से लोकतांत्रिक सरकार की सभी नीतियों के साथ खड़ी है, चाहे वह भारत के साथ हो, चाहे वह अफगानिस्तान में शांतिपूर्ण समाधान के लिए हो"।

लेकिन, इसके ठीक बाद इमरान खान और सेना के बीच दरार दिखने शुरू हो गये। तत्कालीन सैन्य प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा और इमरान खान के बीच 'सबकुछ ठीक नहीं है' की खबरें आने लगीं।

इमरान के पतन की शुरूआत

2020 में कोविड संकट के बाद पाकिस्तान की वित्तीय स्थिति डगमगाने लगी और कोविड कंट्रोल करने में नाकाम रहने के लिए विपक्ष इमरान खान पर हमलावर होने लगी। आर्थिक मोर्चे पर भी इमरान सरकार नाकाम नजर आने लही थी।

साल 2021 तक इमरान खान का मजाक उड़ाया जाने लगा और उनके ऊपर मीम्स बनने लगे। इमरान खान का 'आपने घबराना नहीं है' के मीम्स आज तक बन रहे हैं। और धीरे धीरे इमरान खान की सरकार दबाव में आने लगी। एक के बाद एक कई वित्तमंत्रियों को बदल दिया गया, लेकिन स्थिति नहीं सुधरी।

अक्टूबर 2021 में पहली बार पाकिस्तानी सेना और इमरान खान के बीच का झगड़ा उस वक्त सामने आया, जब तत्कालीन आईएसआई प्रमुख फैज हमीद को लेकर इमरान खान और जनरल बाजवा आमने-सामने आ गये।

फैज हमीद का आईएसआई प्रमुख के तौर पर कार्यकाल खत्म होने वाला था और इमरान खान उन्हें एक्सटेंशन देना चाहते थे। फैज हमीद, इमरान खान के काफी करीबी माने जाते हैं, लेकिन जनरल बाजवा को ये मंजूर नहीं था।

ये तकरार बढ़ने लगा और साल 2022 की शुरूआत में इमरान खान सेना के खिलाफ मुखर होने लगे, लेकिन ऐसा माना गया, कि इमरान खान सेना को संदेश भेजने की कोशिश कर रहे हैं।

जनवरी 2022 में एक वीडियो संबोधन में, इमरान खान ने चेतावनी दे थी, कि अगर किसी ने उन्हें हटाने की कोशिश की, तो वह खतरनाक हो जाएंगे।

विपक्षी नेताओं ने इसे इमरान खान की "हार" बताया, जबकि कई राजनीतिक विश्लेषकों का मानना था, कि वह सेना को संकेत दे रहे हैं, कि अगर उन्हें बर्खास्त कर दिया गया तो वे परिणाम भुगत सकते हैं।

सत्ता से बाहर होने के बाद क्या हुआ?

अप्रैल 2022 में इमरान खान को प्रधानमंत्री पद से हटा दिया गया और उसके बाद इमरान खान एक घायल सांप की तरफ सेना पर फुंफकारने लगे। इमरान खान ने दर्जनों विदेशी मीडिया संस्थानों को 'खतरनाक' इंटरव्यू दिए। उन्होंने अमेरिका पर बार बार तख्तापलट का आरोप लगाया।

जून 2022 में, उन्होंने दावा किया, कि विपक्ष को डर था कि वह अक्टूबर 2021 में लेफ्टिनेंट जनरल फ़ैज़ हमीद को पाकिस्तान सेना प्रमुख नियुक्त करेंगे।

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    धीरे धीरे इमरान खान अपने समर्थकों से सरकार और सेना के खिलाफ जिहाद का आह्वान करने लगे। उन्होंने देश की विदेश नीति को बर्बाद बताया, भारत से सीख लेने की बात कही और इशारा सीधा सेना पर था। ये झगड़ा बढ़ता चला गया।

    अक्टूबर 2022 में इमरान खान को देश के चुनाव आयोग ने पांच सालों के लिए चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगा दिया। उनपर तोषाखाना भ्रष्टाचार का दोषी करार दिया गया, जिसने इमरान खान को और भी आग बबूला कर दिया। लेकिन, दूसरी तरफ इमरान खान का समर्थन भी बढ़ता जा रहा था।

    नवंबर 2022 में, वजीराबाद में एक रैली के दौरान एक बंदूकधारी ने उन पर गोलियां चलाईं, जिससे उनके दाहिने पैर में तीन गोलियां लगीं। इस रैली के दौरान वह पाकिस्तान में मध्यावधि चुनाव कराने की मांग कर रहे थे। इस घटना के बाद इमरान खान के समर्थन में जनता की बाढ़ आ गई। वहीं, पाकिस्तान की सरकार ने देश के टीवी चैनलों को इमरान खान का भाषण दिखाने पर प्रतिबंध लगा दिया।

    इस दौरान इमरान खान पर 80 से ज्यादा मुकदमे दर्ज किए गये, जिनमें मर्डर और आतंकवादी धाराओं के तहत भी मुकदमें दर्ज हैं। अप्रैल तक, इमरान खान अपने खिलाफ कई मामलों में जमानत के लिए लड़ने के लिए अदालत में पेश होने लगे। स्थिति ये बन गई, कि उन्हें हर दूसरे दिन अदालत में पेश होना पड़ रहा था। इस दौरान उन्हें गिरफ्तार करने की भी कोशिश की गई, लेकिन अपने समर्थकों की बदौलत बचते रहे।

    लेकिन, ऐसा ज्यादा दिनों तक नहीं चला और मंगलवार को पूर्व प्रधानमंत्री गिरफ्तार कर लिए गये और उनकी गिरफ्तारी के साथ ही पाकिस्तान जल उठा है। पाकिस्तान में आगे क्या होगा, कहना मुश्किल है, अंदाजा लगाना मुश्किल है, लेकिन जानकारों का मानना है, कि देश की सरकार अगर स्थिति को कंट्रोल करने में नाकाम रहती है, तो पाकिस्तान गृहयुद्ध में फंस जाएगा, जिसके काफी खतरनाक अंजाम होंगे, क्योंकि देश पहले से ही आर्थिक संकट से जूझ रहा है।

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