क्यों चीन में मुस्लिम घरों के बाहर लगाए जा रहे हैं क्यूआर कोड?
बीजिंग। ह्यूमन राइट्स वॉच में एक रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन अब झिंजियांग प्रांत में रहने वाले मुस्लिम समुदायों के लोगों के घरों के बाहर क्यूआर कोड सिस्टम लगाया जा रहा है। चीन में उइगर मुसलमानों पर नजर रखने के लिए वहां के सरकारी अधिकारियों बॉयोमीट्रिक और सर्विलैंस टेक्नॉलोजी का इस्तेमाल कर रही है। अब सिस्टम के जरिए चीन के अधिकारी उइगर मुस्लिमों की हर गतिविधियों को ट्रैक करेंगे।

हर गतिविधी पर रहेगी नजर
हालांकि, अधिकारियों का दावा है कि क्यूआर कोड - उइगर के अलावा अन्य इलाकों के घरों पर भी लगाए जा रहे हैं। उनके अनुसार, इससे वे जनसंख्या नियंत्रण के साथ-साथ उनके दैनिक जीवन पर निगरानी रखी जाएगी। शिनजियांग में बड़ी संख्या में तुर्की भाषा बोलने वाले उइगर मुस्लिम रहते हैं। ह्यूमन राइट्स वॉच के अनुसार, अधिकारी निवासियों की निगरानी बनाए रखने के लिए घरों में प्रवेश करने से पहले मोबाइल उपकरणों के साथ 'स्मार्ट' दरवाजे प्लेटों को स्कैन करते हैं।

कैडर आकर क्यूआर कोड स्कैन करते हैं
स्थानीय निवासी नूरमुहेमेट (बदला हुआ नाम) ने कहा, 2017 से शुरू हर घर, जहां कोई प्रवेश करता है, वहां एक क्यूआर कोड होता है। फिर हर एक या दो दिन बाद कैडर आते हैं और क्यूआर कोड स्कैन करते हैं, इसलिए वे जानते हैं कि कितने लोग यहां रहते हैं। नूरमुहेमेट कहते हैं कि कैडर यह भी देखते हैं कि अगर इलाके में कोई नया शख्स देखा जाता है, तो उससे पूछा जाता है कि वह यहां क्या कर रहा है?

प्रिडिक्टिव पुलिस प्रोग्राम का भी इस्तेमाल
रिपोर्ट के मुताबिक, क्यूआर कोड के अलावा, चीन झिंजियांग में बड़े डेटा और मशीन लर्निंग विश्लेषण के आधार पर प्रिडिक्टिव पुलिस प्रोग्राम का भी इस्तेमाल कर रहे हैं। इसे "एकीकृत संयुक्त संचालन प्लेटफार्म" (आईजेओपी) के रूप में जाना जाता है, यह टूल लोगों के बारे में डेटा एकत्र करता है। इसके बारे में लोगों को पता भी नहीं चलता है और उनका डेटा सरकार के पास पहुंचता रहता है। इससे पता लगाया जाता है कि कौन सरकारी नियमों का पालन नहीं कर रहा है और किन्हें कम्युनिस्ट सरकार पर विश्वास नहीं है।
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