बांग्लादेश को इस्लामिक खिलाफत में बदलने की डेडलाइन खत्म, जनवरी में बांग्लादेश छोड़कर भाग जाएंगे मोहम्मद यूनुस?

Bangladesh News: व्हाइट हाउस में 20 जनवरी को डोनाल्ड ट्रंप की वापसी हो रही है और उनके शपथ ग्रहण की तारीख जैसे जैसे सामने आ रही है, वैसे वैसे दुनिया भर में आशंकाएं बढ़ती जा रही हैं, कि डोनाल्ड ट्रंप आने के साथ ही अपने फैसलों से दुनिया को कैसे प्रभावित करने वाले हैं!

लेकिन, जैसे जैसे 20 जनवरी करीब आता जा रहा है, बांग्लादेश में बेचैनी बढ़ती जा रही है, क्योंकि देश में जो अराजकता का माहौल है और इस्लामिक कट्टरपंथियों ने जिस तरह से पूरे देश में उपद्रव मचा रखा है, उसे देखने के बाद भी बाइडेन प्रशासन चुप्पी साधे बैठा रहा है, लेकिन डोनाल्ड ट्रंप की टीम मुंह में पान दबाकर बैठने वाली नहीं है।

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बांग्लादेशी पत्रकार और विश्लेषक सलाहउद्दीन शोएब चौधरी ने यूरेशियन टाइम्स में लिखा है, कि बांग्लादेश में राजनीतिक साजिशों में और चरमपंथियों की महत्वाकांक्षा की वजह से खतरनाक इस्लामिक जिहादी ताकतों का उदय हुआ है। और इस उथल-पुथल के केंद्र में मुहम्मद यूनुस हैं, जो एक विवादास्पद व्यक्ति हैं, जिनके कट्टरपंथी तत्वों से कथित संबंध और बांग्लादेश में एक इस्लामी गणराज्य स्थापित करने की आकांक्षाओं ने दुनिया का ध्यान खींचा है।

बांग्लादेश में संविधान बदलने का ऐलान (Bangladesh News)

सलाहउद्दीन शोएब चौधरी के मुताबिक, मोहम्मद यूनुस और उनके सहयोगियों ने बांग्लादेश को अस्थिरता के कगार पर धकेल दिया है। देश के धर्मनिरपेक्ष संविधान को पलटने और इसे "क्रांतिकारी" शासन से बदलने की उनकी कोशिश, इस्लामवादी गुटों और चरमपंथी विचारधाराओं के एक खतरनाक गठबंधन को दर्शाती है।

बांग्लादेशी पत्रकार के मुताबिक, यूनुस और उनके साथियों के लिए समय बीतता जा रहा है। डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन के सत्ता में आने के साथ ही, मोहम्मद यूनुस के खतरनाक एजेंडे को खत्म करने और अराजकता के कगार पर खड़े देश में स्थिरता बहाल करने की कोशिशें शुरू होने जा रही है। बाइडेन-हैरिस प्रशासन की विनाशकारी नीतियों ने बांग्लादेश सहित कई देशों को अराजकता में धकेल दिया है और कट्टरपंथी इस्लामवादी, जिहादी और खिलाफत-उन्मुख ताकतों का खतरनाक उदय हुआ है। कई खतरनाक आतंकवादी संगठनों ने पूरे क्षेत्र और उसके बाहर आतंक फैलाने के साथ-साथ कुख्यात 'गजवा-ए-हिंद' एजेंडे को लागू करने की आड़ में, भारत पर "आक्रमण" करने के अपने इरादे की खुलेआम घोषणा तक कर डाली है।

इस बीच, मोहम्मद यूनुस के वफादार छात्रों ने 31 दिसंबर को देश के संविधान को पलटने और उसकी जगह एक "क्रांतिकारी" शासन लाने की योजना की घोषणा की है।

इस तरह के कदम का मकसद बांग्लादेश को इस्लामी गणराज्य या खलीफा शासन बनाना हो सकता है। और इस कार्यक्रम को यूनुस के समर्थकों के साथ-साथ हिज़्ब उत-तहरीर, अलकायदा से जुड़े अंसार अल इस्लाम, हिफा्जत-ए-इस्लाम और जमात-ए-इस्लामी जैसे चरमपंथी समूह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रचार कर रहे हैं।

बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के एक गुट ने भी कथित तौर पर इस खतरनाक कोशिश को मौन समर्थन दिया है। लेकिन, रिपोर्ट के मुताबिक, मोहम्मद यूनुस को अपने अमेरिकी संपर्कों से ठोस जानकारी मिली है, कि अगर बांग्लादेश में इस्लामिक चरमपंथी शासन लाने की कोशिश की जाती है, तो उनके खिलाफ, उनके छात्र संगठनों, सैन्य अधिकारियों के खिलाफ ट्रंप का प्रशासन कठोर प्रतिबंध लगा सकता है, जिसकी वजह से उनका 'क्रांतिकारी' शासन को बहाल करने की योजना एक हास्यास्पद तमाशा बन सकती है।

लिहाजा, मोहम्मद यूनुस को गंभीर चिंता सताने लगी है और बांग्लादेशी पत्रकार सलाहउद्दीन शोएब चौधरी का मानना है, कि 15 जनवरी तक मोहम्मद यूनुस खराब स्वास्थ्य का बहाना बनाकर देश छोड़कर भाग सकते हैं।

डोनाल्ड ट्रंप से बांग्लादेशी यूनुस सरकार को क्या क्या डर?

सलाहउद्दीन शोएब चौधरी ने विश्वसनीय सूत्रों के हवाले से लिखा है, कि डोनाल्ड ट्रंप, जो बाइडेन, कमला हैरिस, बराक ओबामा, क्लिंटन और जॉर्ज सोरोस जैसे लोगों से जुड़ी साजिशों को बर्दाश्त नहीं करेंगे, जिन्होंने बांग्लादेश को कट्टर इस्लामिक शासन बनाने की तरफ आगे बढ़ाया है। क्योंकि इन लोगों की वजह से देश में अल कायदा, हिज्ब उत-तहरीर और ISIS जैसी इस्लामी-जिहादी ताकतों का उदय हुआ है, और हिंदुओं, ईसाइयों और बौद्धों सहित धार्मिक अल्पसंख्यकों पर लगातार हमले हो रहे हैं।

लिहाजा, डोनाल्ड ट्रंप बांग्लादेश की यूनुस सरकार से उम्मीद कर रहे हैं, कि वो इन घटनाओं में सुधार लाए। और नाकाम रहने पर, बांग्लादेश में भयावह स्थिति से निपटने के लिए, संभवतः क्लिंटन के सहयोगी मुहम्मद यूनुस और उनके इस्लामवादी साथियों सहित जिम्मेदार लोगों पर कड़े प्रतिबंध लगाएंगे। और यह सुनिश्चित करने की कोशिश करेंगे, कि बांग्लादेश आतंकवादियों के लॉन्चपैड या ड्रग तस्करी का केंद्र न बन जाए।

इसके अलावा, पाकिस्तान की कुख्यात खुफिया एजेंसी ISI ने बांग्लादेश को आतंकवाद और नशीली दवाओं के व्यापार के लिए आधार के रूप में इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है और इसके भी परिणाम भुगतने होंगे। लिहाजा मोहम्मद यूनुस बातचीत करने और खुद को और अपने सहयोगियों को अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबंधों से बचाने की कोशिश कर रहे हैं। खासकर वो ग्रामीण अमेरिका में चलने वाले अपने उपक्रमों को लेकर टेंशन में हैं, जहां हिलेरी क्लिंटन उनके प्रमुख सहयोगी हैं।

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बांग्लादेश को इस्लामिक रिपब्लिकन में बदलने की साजिश क्या है?

मोहम्मद यूनुस और उनके सहयोगियी संविधान को कमजोर करके बांग्लादेश को "इस्लामिक गणराज्य" या "खिलाफत" में बदलना चाहते हैं। वे कथित तौर पर ईरान के IRGC की तर्ज पर एक "इस्लामिक रिवोल्यूशनरी आर्मी (IRA)" बनाने के लिए काम कर रहे हैं। जो निश्चित तौर पर डोनाल्ड ट्रंप को बर्दाश्त नहीं होंगे।

रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप की टीम को पहले से ही इस बारे में पर्याप्त सबूत मिल चुके हैं।

  • बांग्लादेश में अलकायदा और ISIS के झंडों का सार्वजनिक प्रदर्शन
  • इस्कॉन के सदस्यों और हिंदुओं के खिलाफ हिंसा का खुला आह्वान
  • धार्मिक अल्पसंख्यकों पर बढ़ते हमले
  • कई पत्रकारों को जेल में डाला जाना
  • देश में इस्लामी-जिहादी ताकतों का बढ़ता प्रभाव
  • मानवाधिकारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का घोर उल्लंघन
  • अमेरिकी वित्तपोषित गैर सरकारी संगठनों की पक्षपातपूर्ण गतिविधियां, जो खुले तौर पर यूनुस और उसके चरमपंथी सहयोगियों का समर्थन करती हैं।
  • जिहादियों और इस्लामी ताकतों की तरफ से भारत पर आक्रमण करने और "गजवा-ए-हिंद" सिद्धांत को लागू करने की धमकियां
  • भारत के विभिन्न हिस्सों में बांग्लादेश से अलकायदा के गुर्गों की गिरफ्तारी

मोहम्मद यूनुस के बांग्लादेश से भागने की आशंका क्यों बन गई है?

शेख हसीना की सरकार को गिराने वाले छात्र संगठन, जो मोहम्मद यूनुस के वफादार हैं, उन्होंने बांग्लादेश के संविधान को खत्म करने और एक क्रांतिकारी सरकार स्थापित करने की समय सीमा 31 दिसंबर 2024 तय की थी। इससे धर्मनिरपेक्ष बांग्लादेश, एक "इस्लामिक गणराज्य" या "खिलाफत" में बदल जाता। लेकिन, बढ़ते आंतरिक और बाहरी दबाव की वजह से यूनुस ने अपने छात्र नेताओं से अपनी योजनाओं को फिलहाल टालने का आग्रह किया। हालांकि, छात्र नेताओं ने अपनी मांगों को पूरा करने के लिए 15 जनवरी 2025 की नई समय सीमा तय की है।

जिसके बाद मोहम्मद यूनुस के पास दो विकल्प रह गए हैं।

पहला, कि छात्र नेताओं की मांगों को पूरा करें और संविधान को फाड़कर फेंक दे और देश में शरिया आधारित कट्टर इस्लामिक शासन की स्थापना करें, लेकिन इससे उन्हें अंतरराष्ट्रीय समुदाय के विरोध का सामना करना होगा।

संविधान को अगर खत्म किया जाता है, तो राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन और सेना प्रमुख जनरल वेकर उज ज़मान सहित सभी संवैधानिक पदों को खाली करना होगा, जिससे यूनुस के सहयोगियों को अपने चुने हुए व्यक्तियों को स्थापित करने का मौका मिल जाएगा।

लेकिन, अगर ऐसा किया जाता है, तो अमेरिका और पश्चिमी देश, मोहम्मद यूनुस के आंदोलन को आतंकवादी संगठन घोषित करते हुए फौरन प्रतिबंध लगा सकते हैं।

इसके अलावा, आने वाले दिनों में अमेरिका में मोहम्मद यूनुस के खिलाफ कई तरह के जांच शुरू हो सकते हैं, जहां उनके खिलाफ आपराधिक आरोप लग सके हैं, जिससे मोहम्मद युनूस का खतरनाक नेटवर्क ध्वस्त हो सकता है।

लेकिन, कट्टरपंथी विचारधाराओं को बढ़ावा देने से लेकर धर्मनिरपेक्ष शासन को कमजोर करने तक, यूनुस ने खुद को एक ऐसे आंदोलन के केंद्र में स्थापित कर लिया है, जो न सिर्फ बांग्लादेश, बल्कि क्षेत्रीय और वैश्विक स्थिरता के लिए भी खतरा है। लिहाजा, आतंकवाद का मुकाबला करने, धार्मिक अल्पसंख्यकों की रक्षा करने और अस्थिर क्षेत्रों में व्यवस्था बहाल करने के लिए ट्रंप से मजबूत कदम उठाने की उम्मीद की जानी चहिए, चाहे प्रतिबंधों के रास्ते ही ऐसा हो। ऐसे में ट्रंप प्रशासन, निश्चित तौर पर बांग्लादेश को आतंक और अराजकता का अड्डा बनने से रोकने के लिए निर्णायक रूप से कार्य करेगा। ऐसे में मोहम्मद यूनुस के खिलाफ देश छोड़कर भागने के अलावा कोई और रास्ता नहीं बचेगा।

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