चीन में बच्चे पैदा करने से क्यों भाग रहे हैं लोग? अंदर की बात जानिए
चीन में एक गजब ट्रेंड देखा जा रहा है। बड़ी संख्या में युवा आबादी बच्चा पैदा ही नहीं करना चाहती। कहते हैं कि सामाजिक माहौल ही ऐसा बन गया है। पिछले साल चीन की आबादी 6 दशकों बाद घट गई है।

चीन में घटती जनसंख्या के लिए सिर्फ वहां की कम्युनिस्ट सरकार की नीतियां ही जिम्मेदार नहीं हैं। इसके पीछे वहां का सामाजिक माहौल भी कारण बन चुका है। लोगों की परिवारों में दिलचस्पी ही खत्म हो चुकी है। वहां का युवा वर्ग बड़े परिवार के नाम से ही भागने लगा है। जो सिंगल हैं, वो उसी में सुकून महसूस कर रहे हैं। परिवार उनके लिए बोझ बन चुका है। यह ट्रेंड सिर्फ चीन के लिए ही खतरनाक नहीं है। यह बाकी मुल्कों के लिए भी सजग होने वाली स्थिति है। क्योंकि, भारत में जनसंख्या असंतुलन के पीछे ऐसी ही आशंका हो सकती है। जहां कुछ वर्ग तो जन्म दर बढ़ाने पर तुले हुए हैं तो बड़े पैमाने पर एक शहरी कामकाजी वर्ग पैदा हो रहा है, जो बहुत ही छोटा परिवार रखना चाहता है। शुरुआत में इसका कारण आर्थिक हो सकता है।

चीन की घटती जनसंख्या का संकेत क्या है ?
चीन में 6 दशक में पहली बार ऐसा हुआ है कि जनसंख्या में गिरावट आई है। 17 जनवरी को चीन के नेशनल ब्यूरो ऑफ स्टैटिस्टिक्स ने कहा कि 2022 के अंत में उसकी जनसंख्या 141.1 करोड़ थी। चीन की आबाद में 8,50,000 की कमी दर्ज की गई और वहां जन्म दर में रिकॉर्ड गिरावट आ चुकी है। चीन में पिछले साल कुल 95.6 लाख बच्चों ने जन्म लिया। 2021 के मुकाबले इसमे 10% की कमी आई है। जबकि, मृत्यु की संख्या 104.1 लाख रही। मतलब जन्म और मृत्यु में भी काफी फासला हो चुका है। चीन की जनसंख्या में इतनी बड़ी गिरावट 1961 के अकाल के बाद दर्ज की गई है।

चीन में ज्यादा बच्चे पैदा करने की नीति हो रही है फेल
6 दशक पहले चीन में जो कुछ हुआ था, उसकी वजह माओ जेडॉन्ग की नाकाम नीतियां थीं, जिसके चलते वे अकाल की तबाही से मुल्क को बचा नहीं पाए। लेकिन, मौजूदा ट्रेंड अलग है। यहां के सामाजिक मूल्यों में बदलाव आया है। लोग कम बच्चे पैदा करना चाह रहे हैं। चीन की कम्युनिस्ट सरकार ने पहले जनसंख्या नियंत्रण के लिए 'वन चाइल्ड पॉलिसी' लागू की थी। लेकिन, पिछले कुछ वर्षों से वह जन्म दर बढ़ाने के लिए त्राहिमाम कर रही है। लेकिन, इस ट्रेंड को बदलने में वह पूरी तरह से फेल हो चुकी है। हालात ये हो गए हैं कि 2021 में बीजिंग के फैमिली प्लानिंक अथॉरिटी ने एक के बदले तीन-तीन बच्चे पैदा करने के लिए कहना शुरू कर दिया।

पहले अधिकतर लोगों ने आर्थिक वजहों को बताया था कारण
तीन बच्चों वाला कदम तब उठाना पड़ा, जब पांच साल पहले शुरू की गई 'टू चाइल्ड पॉलिसी' भी फेल हो गई और जन्म दर में सुधार नहीं हो पाया। यह नीति लागू करते वक्त 2015 में एक सर्वे कराया गया तो पता चला कि 70% लोगों ने ज्यादा बच्चा नहीं पैदा करने की वजहों में वित्तीय कारण बताए हैं। इसमें पढ़ाई का खर्च, स्वास्थ्य और घरों में होने वाले खर्च शामिल थे। लेकिन, चीन में आबादी को लेकर जो ताजा आंकड़े जारी किए गए हैं, उससे पता चलता है कि देश बूढ़ा हो रहा है और कामकाजी लोगों की आबादी घटती जा रही है।

बूढ़ा हो रहा है चीन, बच्चों के बगैर कहां से आएगी जवानी ?
2022 में 16 से 59 साल के लोगों की आबादी वहां 87.556 करोड़ या 62% थी। जबकि, 2010 में यह आबादी 95 करोड़ थी। जबकि, बुजुर्गों की बात करें तो पिछले साल वहां 60 साल से ज्यादा उम्र की लोगों की जनसंख्या 28 करोड़ पाई गई है। जो कि 2010 के 24.9 करोड़ से 19.8% अधिक है। चीन का यह ट्रेंड अगले कई दशकों के लिए परेशानी पैदा करने वाली हालात बयां कर रहा है।

चीन में बच्चे पैदा करने से क्यों भाग रहे हैं लोग?
एजेंसियों की रिपोर्ट के मुताबिक चीन के ज्यादातर युवाओं का कहना है कि सामाजिक माहौल की वजह से वह बच्चे पैदा करने से कन्नी काटने लगे हैं। 1980 में जन्मीं होवांग नाम की एक महिला ने कहा कि 'वह खुद ही में काफी हैं और उन्हें पार्टनर की जरूरत महसूस ही नहीं होती। उन्होंने यह भी बताया कि बहुत सारे लोग ऐसा ही महसूस करते हैं।' होवांग अकेली नहीं हैं। लगता है कि चीन के युवा वर्ग ने ऐसा ही जीवन जीने की आदत डाल ली है। (तस्वीरें सौजन्य-यूट्यूब वीडियो)












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