यूक्रेन के बाद किसका नंबर? एक और देश ने की रूसी हमले से बचने की तैयारी

लिथुआनिया से साज ओ सामान यूक्रेन को भेजा जा रहा है

कीव, 18 अप्रैल। यूक्रेन में जो कुछ हो रहा है, उस पर लिथुआनिया के लोग बारीक नजर रखे हुए हैं. बहुत से लोग तो तैयारियों में भी जुट गए हैं जिनमें हथियारों की ट्रेनिंग से लेकर अपने साज ओ सामान की रखरखाव तक शामिल हैं.

39 साल के लिथुआनियावासी पॉलिअस लिस्काउकस तीन साल से हथियार चलाने की ट्रेनिंग ले रहे थे. इस ट्रेनिंग का मकसद था किसी खतरे के लिए तैयार रहना. वह कहते हैं कि अब खतरा जितना करीब महसूस हो रहा है, उतना कभी नहीं हुआ.

रूस-यूक्रेन युद्ध: नाटो का अगला कदम क्या होगा

डीडब्ल्यू से बातचीत में लिस्काउकस बताते हैं, "रूस ने जब 2014 में क्रीमिया पर हमला किया और उसे यूक्रेन से छीन लिया, मैं तभी लिथुआनियन राइफलमैन यूनियन का सदस्य बनना चाहता था. क्रीमिया को छीनना पहला संकेत था कि रूस यूक्रेन पर हमला करेगा. तब भी रूसी प्रॉपेगैंडा में लिथुआनिया निशाने पर था. इसका अर्थ है कि अगला नंबर हमारा हो सकता है."

विवादित संगठन

जहां लिस्काउकस ट्रेनिंग ले रहे हैं, वहीं उनकी पत्नी समेत कई महिलाएं भी हैं. पति-पत्नी दोनों राइफलमैन्स यूनियन की हरी वर्दी पहने हैं. यह संस्था सरकार समर्थित है और देश की सेना की मदद के रूप में तैयार एक अर्धसैनिक बल है. इसे लोगों ने ही मिलकर बनाया था और इसके सदस्य नियमित रूप से हथियार चलाने का अभ्यास करते हैं.

लिथुआनियन राइफलमैन्स यूनियन का इतिहास लंबा और विवादों भरा है. इस संस्था को 20वीं सदी की शुरुआत में तब स्थापित किया गया था जब लिथुआनिया की आजादी की लड़ाई चल रह थी. तब इस संस्था ने नात्सी जर्मनी का साथ दिया था. लिथुआनिया जब सोवियत संघ का हिस्सा बन गया, तो इस समूह के सदस्यों ने सोवियत रूस के खिलाफ लड़ाई छेड़ दी. कई सदस्य स्टालिन के अत्याचारों का शिकार भी बने.

1990 के दशक में लिथुआनिया ने सोवियत संघ से अलग होने का ऐलान किया तो राइफलमैन्स यूनियन का जैसे पुनर्जन्म हुआ. और अब यूक्रेन के युद्ध की शुरुआत के बाद से तो यह संगठन तेजी से ताकतवर हुआ है. अब इस संगठन के 14,000 सदस्य हैं.

लिथुआनिया और रूस में संभावित विवाद

राइफलमैन्स यूनियन के काफी सदस्य उस इलाके में हैं जो रूस के साथ रणनीतिक विवाद की वजह बन सकता है. लिस्काउकस भी उसी तथाकथित सुवाल्की गैप इलाके में रहते हैं, जो सुवाल्की कस्बे के करीब है. सुवाल्की गैप एक पतली सी पट्टी है जो लिथुआनिया को पोलैंड से जोड़ती है. यह पट्टी रूसी नियंत्रण वाले कालिनग्राद और बेलारूस के बीच पिचकी हुई है. यानी एक तरफ रूस है तो दूसरी तरफ उसका सबसे घनिष्ठ मित्र बेलारूस.

सुवाल्की गैप सिर्फ 65 किलोमीटर लंबा है. बाल्टिक देशों और उनके नाटो सहयोगियों के बीच जमीन से यह एकमात्र संपर्क है. यहां रहने वाले लोगों को यह भय सताता रहता है कि संकट खड़ा हुआ तो रूस सबसे पहले इस रास्ते को बंद करेगा. इस वजह से यहां रहने वाले लोगों में रूस के प्रति खासा गुस्सा भी है. पेशे से वकील लिस्काउकस कहते हैं कि रूसी जनता और रूसी राजनेताओं की सोच में फर्क है. वह कहते हैं, "मेरे कई ग्राहक रूसी हैं. मैं अब भी उनके संपर्क में हूं. उनके प्रति मेरे अंदर कोई नफरत नहीं है. यह बस रूसी सरकार और उसके दुष्प्रचार के प्रति है."

तैयारी का समय

45 साल तक रूस और लिथुआनिया सोवियत संघ का हिस्सा रहे. सोवियत संघ से अलग होने के बाद लिथुआनिया ने 2004 में नाटो की सदस्यता ग्रहण की थी. हाल के सालों में तनाव लगातार बढ़ता रहा लेकिन यूक्रेन पर हमले के बाद लोग यूं चौकस हो गए हैं जैसे उन्हें किसी ने सोते से जगा दिया हो. लिथुआनिया के सांसद लॉरयान्स काचिउनास कहते हैं, "यूक्रेन युद्ध आंखें खोलने वाला है. हमारे पास तैयारी के लिए कुछ ही साल बचे हैं. इसलिए हमें नाटो की ज्यादा शक्तिशाली मौजूदगी चाहिए ताकि डर बना रहे."

रूसी इलाकों पर हमला कर रहा है यूक्रेनः रूस

विलिनिअस यूनिवर्सिटी में राजनीति-शास्त्री पढ़ाने वाले टोमास यानेलिउनास कहते हैं कि यूक्रेन यु्द्ध के कारण लिथुआनिया को तैयारी का समय मिल गया है. वह कहते हैं कि जब यूक्रेन पर हमला हुआ था तो कुछ लोग इतना डर गए थे कि वे लिथुआनिया छोड़कर भागने के बारे में सोचने लगे थे. उन्होंने बताया, "यूक्रेन युद्ध जैसी घटनाएं हमारे लिए अच्छा सबक हैं. वे हमें तैयारी का वक्त देती हैं. यूक्रेनी हमारे लिए समय बचा रहे हैं और हमें उसे अच्छे से इस्तेमाल करना होगा व तैयार होना होगा."

रिपोर्टः यूरी रेषेटो

Source: DW

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