कौन थे पत्रकार जमाल खशोगी, जिनकी हत्या करवाने का आरोप सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस पर है?
जून 2017 में पत्रकार जमाल खशोगी सऊदी अरब छोड़ अमेरिका शिफ्ट हो गये। जहां उन्होंने वाशिंगटन पोस्ट के लिए मासिक कॉलम लिखना शुरू कर दिया, जिसमें वो सऊदी राजपरिवार को निशाने पर लेते थे।
जेद्दा, जुलाई 16: अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन इस वक्त सऊदी अरब के दौरे पर हैं और उन्होंने कहा कि, सऊदी अरब क्राउन प्रिंस से बातचीत के दौरान उन्होंने पत्रकार जमाल खशोगी की हत्याकांड का मुद्दा उठाया। लेकिन, सऊदी क्राउन प्रिंस ने तमाम आरोपों को नकार दिया। लेकिन, जब पत्रकारों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान क्राउन प्रिंस मोहम्मद सलमान से जमाल खशोगी को लेकर पूछा, कि क्या वो माफी मांगेंगे, तो उस वक्त वो मुस्कुरा रहे थे। अमेरिका और सऊदी अरब के बीच रिश्तों में आई खटास की सबसे बड़ी वजह जमाल खशोगी हत्याकांड है, जिनकी बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। आईये जानते हैं, कि पत्रकार जमाल खशोगी कौन थे, सऊदी क्राउन प्रिंस से उनकी क्या दुश्मनी थी और दूतावास के अंदर उनकी हत्या कैसे की गई?

अमेरिकी इंटेलीजेंस रिपोर्ट में सनसनीखेज दावे
पिछले साल 20 जनवरी को जो बाइडेन ने अमेरिका की सत्ता संभाली थी और फरवरी महीने में अमेरिकी इंटेलीजेंस की वो रिपोर्ट जारी की गई, जिसमें जमाल खशोगी हत्याकांड की पूरी कहानी दर्ज थी और दर्ज था एक नाम, मोहम्मद बिन सलमान।अमेरिकी इंटेलीजेंस की रिपोर्ट में साफ तौर पर सबूतों के हवाले से कहा गया है कि अमेरिकी अखबार वाशिंगटन पोस्ट में कॉलम लिखने वाले पत्रकार जमाल खशोगी की हत्या सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान की मंजूरी के बाद ही की गई थी। रिपोर्ट में कहा गया है, कि साल 2018 में पत्रकार जमाल खशोगी की हत्या तुर्की की राजधानी इस्तांबुल में धोखे से की गई थी लेकिन इस हत्याकांड की पूरी कहानी दिल दहलाने और सऊदी प्रिंस की क्रूरता को बयां करने के लिए काफी है। इस हत्याकांड को स्टेस स्पॉंसर्ड किलिंग भी कहा गया है यानि राज्य आधारित हत्याकांड।

सऊदी प्रिंस और जमाल में दुश्मनी क्यों?
सऊदी अरब के रहने वाले पत्रकार जमाल खशोगी अमेरिकी अखबार वाशिंगटन पोस्ट के लिए कॉलम लिखा करते थे और उनके कॉलम को सऊदी शाही परिवार के खिलाफ माना जाता था। अपने कॉलम में पत्रकार जमाल खशोगी सऊदी सरकारी की नीतियों की जमकर आलोचना किया करते थे और माना जाता है कि क्राउन प्रिंस सलमान की आंखों में पत्रकार जमाल खशोगी खटकने लगे थे। साल 2017 से पहले तक सऊदी की सरकार पर क्राउन प्रिंस का प्रभुत्व नहीं था और उस वक्त उनके पिता किंग सलमान की सऊदी का पूरा कामकाज देखते थे लेकिन, साल 2017 के बाद क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान को सऊदी की सिक्योरिटी और इंटेलीजेंस का कंट्रोल हासिल हो गया। सऊदी सिक्योरिटी ऑफिस और इंटेलीजेंस बिना शाही परिवार के हुक्म के एक भी कदम नहीं उठा सकता है और इस इंटेलीजेंस को अब MBS यानि क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के अंदर काम करना था। क्राउन प्रिंस के हाथ सिक्योरिटी कंट्रोल आने के बाद पत्रकार जमाल खशोगी ने सऊदी अरब छोड़ने का मन बना लिया।

जमाल खशोगी ने छोड़ दिया सऊदी अरब
जून 2017 में पत्रकार जमाल खशोगी सऊदी अरब छोड़ अमेरिका शिफ्ट हो गये। जहां उन्होंने वाशिंगटन पोस्ट के लिए मासिक कॉलम लिखना शुरू कर दिया और उन्होंने अपने कॉलम में सऊदी सरकार, उसकी नीतियां, महिलाओं के कम होते अधिकार और सामान्य मानवाधिकार को लेकर कई सख्त कॉलम लिखे, जिनमें सऊदी सरकार से देश की शासन व्यवस्था में तब्दिली लाने की मांग की गई और रिपोर्ट में कहा गया है, कि इसने सऊदी शाही परिवार को काफी ज्यादा नाराज कर दिया। इस बीच मई 2018 में पत्रकार जमाल खशोगी की मुलाकात तुर्की की रहने वाली 36 साल की पीएचडी स्टूडेंट Hatice Cengiz से हुई और दोनों ने प्यार के बाद शादी करने का फैसला कर लिया। 28 सितंबर 2018 को पत्रकार जमाल खशोगी तुर्की स्थिति सऊदी अरब दूतावास पहुंचे थे, जहां उन्हें अपनी पहली पत्नी से तलाक से जुड़े कागजात लेना था, ताकि वो Hatice Cengiz से शादी कर सकें।

सऊदी दूतावास में ही कर दी गई हत्या
2 अक्टूबर 2018 को पत्रकार जमाल खशोगी को फिर से तुर्की स्थिति सऊदी अरब के वाणिज्य दूतावास में बुलाया गया और सीसीटीवी कैमरे में उन्हें सऊदी दूतावास के अंदर जाते हुए देखा जाता है। वहीं, उनकी मंगेतर Hatice Cengiz काउंसलेट के बाहर उनका इंतजार कर रही थीं। मंगेतर Hatice Cengiz को पत्रकार जमाल ने कहा था, कि अगर उन्हें कुछ भी गड़बड़ लगे तो वो फौरन Yasin Aktay नाम के शख्स को फोन करे, जो तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब इर्दुगन के बेहद करीबी हैं। तीन घंटे तक Hatice Cengiz तुर्की में सऊदी दूतावास के बाहर पत्रकार जमाल खशोगी का इंतजार करती रहीं और जब वो बाहर नहीं निकले तो फिर वो खुद दूतावास में गईं, जहां उन्हें बताया गया कि जमाल खशोगी काफी पहले ही दूतावास के पिछले दरवाजे से बाहर जा चुके हैं।

फैलने लगी जमाल के गायब होने की खबर
पत्रकार जमाल खशोगी के गायब होने की खबर अब धीरे धीरे पूरी दुनिया में फैलने लगी थी। जिसके बाद सऊदी अरब प्रशासन को एक बयान जारी करना पड़ा। बयान में बार बार इसी बात पर जोर दिया गया, कि खशोगी तुर्की स्थिति सऊदी दूतावास से बाहर चले गये थे। सऊदी सरकार के स्टेटमेंट में कहा गया कि 'जमाल खशोगी अपने तलाक से जुड़े कागजात लेने आये और उन कागजातों को लेकर वो फौरन बाहर चले गये'। जबकि, तुर्की राष्ट्रपति भवन एक अधिकारी ने अपने बयान में कहा कि, जमाल खशोगी दूतावास से बाहर नहीं निकले थे। वहीं, 4 अक्टूबर 2018 को तुर्की विदेश मंत्रालय ने सऊदी अरब एंबेसडर को जबाव देने के लिए समन भेजा और 5 अक्टूबर को सऊदी क्राउन प्रिंस ने एक बयान जारी कर कहा, कि खशोगी दूतावास के अंदर नहीं थे और तुर्की सरकार अगर जांच कराना चाहती है तो करवा ले। वहीं 7 अक्टूबर को तुर्की के राष्ट्रपति ने अपने बयान में कहा कि वो उम्मीद कर रहे हैं कि पत्रकार जमाल सही सलामत हों। हालांकि कई मीडिया रिपोर्ट्स में अबतक कहा जाने लगा था कि पत्रकार जमाल की हत्या की जा चुकी है। तुर्की स्थिति सऊदी अरब के दूतावास के अंदर तो पत्रकार खशोगी जाते दिखाई दे रहे थे, मगर दूतावास से बाहर आने के एक भी सबूत नहीं मिले थे। वहीं, तुर्की के राष्ट्रपति के करीबी Yasin Aktay ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को कहा कि, पत्रकार जमाल की हत्या सऊदी दूतावास के अंदर ही की जा चुकी है। Yasin Aktay ने ये भी दावा किया 15 लोगों की एक टीम ने पत्रकार जमाल खशोगी की हत्या की है।

पत्रकार जमाल खशोगी की हत्या
9 अक्टूबर 2018 को वाशिंगटन पोस्ट ने दावा किया कि, कि अमेरिकी खुफिया एजेंसी के हाथ ऑडियो क्लिप लगा है जिसमें सऊदी अरब के अधिकारी और इंटेलीजेंस एजेंसी के अधिकारी पत्रकार खशोगी की हत्या की प्लानिंग कर रहे थे। वहीं 10 अक्टूबर 2018 को तुर्की मीडिया ने एक रिपोर्ट में दावा किया कि सऊदी अरब दूतावास के बाहर 15 लोगों की टीम थी, जिसने पत्रकार जमाल की हत्या की है। तुर्की मीडिया ने सबूत के तौर पर वीडियो फुटेज जारी किया था, जिसमें दिख रहा था कि 15 लोग सऊदी दूतावास के बाहर हैं और उनकी हरकत संदिग्ध लग रही थी। तुर्की मीडिया ने उन सभी 15 लोगों की तस्वीरें भी जारी कर दीं, जो इस ऑपरेशन को अंजाम देने आये थे। वहीं अमेरिकन इंटेलीजेंस ने भी उन 15 लोगों के नाम पर मुहर लगा दी थी। हालांकि, सऊदी अरब की तरफ से बार बार दूतावास के अंदर 'कुछ होने' की बात से इनकार किया जा रहा था। 15 अक्टूबर को तुर्की की जांच टीम सऊदी अरब दूतावास के अंदर जाती है जिसके हाथ पत्रकार जमाल की हत्या से जुड़े कई सबूत लगते हैं और तुर्की की तरफ से आधिकारिक तौर पर बयान दिया जाता है, कि पत्रकार जमाल की हत्या तुर्की स्थिति सऊदी अरब दूतावास में ही की गई है।

सऊदी अरब ने कैसे कबूला, हुई हत्या?
तमाम सबूत सऊदी अरब के खिलाफ थे और उसपर अंतर्राष्ट्रीय दबाव भी काफी ज्यादा बनने लगा था। जिसके बाद 20 अक्टूबर 2018 को सऊदी अरब की तरफ से पहली बार पत्रकार जमाल खशोगी की हत्या की बात कबूल की गई। सऊदी अरब की तरफ से जारी बयान में स्वीकार किया गया, कि 2 अक्टूबर को जर्नलिस्ट जमाल खशोगी की हत्या सऊदी अरब दूतावास के अंदर की गई थी। जिसमें 18 लोंगो को गिरफ्तार किया गया है जिनमें पांच अधिकारी शामिल थे। सऊदी अरब ने आधिकारिक बयान देते हुए समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया कि, 15 सदस्यीय टीम को तुर्की पत्रकार जमाल खशोगी को किडनैप करने के लिए भेजा गया था, मगर उन लोगों ने जमाल खशोगी की हत्या कर दी। सऊदी अरब पत्रकार जमाल खशोगी की हत्या नहीं करवाना चाहता था। वहीं तुर्की के राष्ट्रपति ने सीधे सीधे सऊदी अरब पर आरोप लगाया, कि सऊदी अरब ने ही पत्रकाम जमाल की बेरहमी से हत्या करवाई है और तुर्की के राष्ट्रपति ने सऊदी अरब से उस शख्स का नाम सार्वजनिक करने को कहा जिसका हाथ इस कत्ल के पीछे था।

हत्याकांड में आया प्रिंस सलमान का नाम
10 नवंबर 2018 को तुर्की की जांच एजेंसी ने तमाम सबूत, जिनमें कई ऑडियो रिकॉर्डिंग, वीडियो फुटेज और दूसरे तरह के सबूत थे उसे तुर्की सरकार को सौंप दिया। वहीं, अमेरिकन जांच एजेंसी CIA ने जांच के बाद अपनी रिपोर्ट में कहा कि, सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस ने पत्रकार जमाल की हत्या करवाई है। मोहम्मद बिन सलमान ने ही पत्रकार जमाल की हत्या करने का आदेश दिया था। वहीं, डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका के फॉक्स न्यूज को दिए गये इंटरव्यू में कहा था कि, उन्होंने कोई ऑडियो टेप नहीं सुना है और उन्हें ऑडियो टेप सुनने की जरूरत भी नहीं है। पत्रकार जमाल खशोगी हत्याकांड की जांच के लिए यूनाइटेड नेशंस की भी टीम बनाई गई। इस टीम ने काफी विस्तारपूर्वक जांच की। टीम ने सऊदी अरब दूतावास का भी दौरा किया। इस टीम का काम ये पता करना था कि क्या एक देश एक आम आदमी की हत्या में शामिल है? जून 2019 को UN की रिपोर्ट में कहा गया कि पत्रकार जमाल की हत्या के पीछे कई लोगों का हाथ है और सऊदी क्राउन प्रिंस MBS और सऊदी के अधिकारियों की जांच होनी चाहिए। यूनाइटेड नेशंस की रिपोर्ट में जमाल की हत्या को राज्य द्वारा प्रायोजित हत्या बताते हुए सऊदी अरब को सीधे सीधे जिम्मेदार बताया था। हालांकि सऊदी अरब ने तमाम सबूतों को खारिज कर दिया था।

कुछ आरोपियों को सऊदी ने सुनाई सजा
3 दिसंबर 2019 को 11 आरोपियों में से जांच के दौरान 8 को सऊदी अरब ने कत्ल का दोषी माना और पांच आरोपियो को फांसी की सजा सुनाई। हालांकि, बाद में पांचों की फांसी की सजा माफ कर दी गई। माफी देने के पीछे कहा गया कि, मई 2020 में खशोगी के बेटे ने एक ट्वीट के जरिए अपने पिता के कातिलों को माफ करने की अपील की थी और इस्लामिक कानून के मुताबिक अगर पीड़ित का परिवार दोषी को माफ कर दे तो उसे माफी मिल जाती है।












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