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Julian Assange: कहानी उस दिलेर पत्रकार की, जिसके खुलासे ने अमेरिका की चूलें हिला दीं.. कौन हैं जूलियन असाजें?

Julian Assange Story: विकीलीक्स के संस्थापक जूलियन असांजे को सोमवार को बेलमार्श मैक्सिमम सिक्योरिटी जेल से रिहा कर दिया गया है, और उनकी रिहाई उस वक्त हुई है, जब उन्होंने अमेरिकी जस्टिस डिपार्टमेंट के साथ एक याचिका समझौता किया है।

ब्रिटिश जेल में पांच साल से ज्यादा समय बिताने के बाद, असांजे ने अमेरिकी जासूसी कानूनों के उल्लंघन के लिए अपराध स्वीकार करने पर सहमति व्यक्त जताई। जिसके बाद उन्हें ब्रिटिश जेल से रिहा कर दिया गया और अब उन्हें अपने देश ऑस्ट्रेलिया जाने की इजाजत मिल गई है।

Julian Assange story

जूलियन असांजे और अमेरिका के बीच हुए समझौते के तहत अमेरिकी जस्टिस डिपार्टमेंट ने उनके लिए 62 महीने की जेल की सजा की मांग कोर्ट में की थी और चूंकी वो इससे ज्यादा समय जेल में काट चुके थे, लिहाजा उन्हें रिहा कर दिया गया।

अब जबकि जूलियन असांजे रिहा हो गये हैं, तो उनके बारे में जानना जरूरी हो जाता है, क्योंकि उन्होंने अपनी जासूसी पत्रकारिता से अमेरिकी सरकार को बेनकाब कर दिया था और हजारों दस्तावेज सार्वजनिक कर इराक और अफगानिस्तान में किए गये ऑपरेशंस को पोल खोलकर रख दी थी।

आइये जानते हैं ऑस्ट्रेलिया के इस दिलेर पत्रकार जूलियन असांजे की कहानी, जिन्होंने खोजी पत्रकारिता की नई मिसाइल कायम की।

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जूलियन असांजे कौन हैं?

जूलियन असांजे ऑस्ट्रेलिया के रहने वाले पत्रकार हैं, जिन्होंने खोजी वेबसाइट विकिलीक्स की साल 2006 में स्थापना की थी और जल्द ही एक के बाद एक सनसनीखेज खुलासे से उन्होंने दुनिया में सुर्खियां बटोरनी शुरू कर दी। उनके ज्यादातर खुलासे सरकारों के खिलाफ होते थे, जिसमें मानवाधिकार हनन, युद्ध अपराध जैसे मुद्दे सामने होते थे।

साल 2010 में जूलियन असांजे ने उस वक्त सनसनीखेज मचा दी थी, जब उनके वेबसाइट विकिलीक्स ने एक के बाद एक पांच लाख अमेरिकी सरकार के गोपनीय दस्तावेज जारी कर दिए और ये दस्तावेज इराक और अमेरिका से संबंधित थे। इन दस्तावेजों ने पूरी दुनिया में सनसनी मचा दी थी और पूरी दुनिया में अमेरिका की बदनामी हुई थी।

इन्हीं दस्तावेजों में एक में खुलासा किया गया था, कि कैसे बगदाद में अमेरिकी हेलीकॉप्टर ने एक हमले में दो पत्रकारों सहित एक दर्जन से ज्यादा लोगों को मार दिया था।

उनके लगातार खुलासे और गोपनीय दस्तावेज हासिल करने को लेकर उनकी सक्रियता ने उन्हें प्रेस स्वतंत्रता के समर्थकों के बीच एक मशहूर व्यक्ति बना दिया और उन्होंने उस वक्त कहा था, कि उनका मकसद इराक और अफगानिस्तान में अमेरिकी सेना की गतिविधियों की पोल खोलना है और उन्होंने कहा था, कि एक पत्रकार के तौर पर ये काम करना कुछ भी अलग नहीं है।

लेकिन, जूलियन असांजे के खुलासों ने अमेरिका को नाराज कर दिया और वो अमेरिका, जो फ्रीडम ऑफ प्रेस का चैंपियन बनने का दावा करता है, उसने जूलियन असांजे को कई फर्जी मुकदमों में फंसा दिया। अमेरिकी प्रॉसीक्यूटर्स ने साल 2019 में पहली बार जूलियन असांजे के खिलाफ आरोप जारी किया था, जिसमें असांजे पर - जो उस समय लंदन में इक्वाडोर के दूतावास में छिपे हुए थे, उनके खिलाफ एक सेना के निजी व्यक्ति के साथ मिलकर संवेदनशील सरकारी रिकॉर्ड को अवैध रूप से प्राप्त करने और प्रकाशित करने की साजिश रचने का आरोप लगाया।

उस वक्त जस्टिस डिपार्टमेंट के शीर्ष राष्ट्रीय सुरक्षा अधिकारी जॉन डेमर्स ने कहा था, कि "कोई भी जिम्मेदार अभिनेता, पत्रकार या कोई और, जानबूझकर उन व्यक्तियों के नाम प्रकाशित नहीं करेगा, जिन्हें वह युद्ध क्षेत्रों में गोपनीय मानव स्रोत के रूप में जानता हो, जिससे वे सबसे गंभीर खतरों में पड़ जाएं।"

अमेरिका ने आरोप लगाया, कि जूलियन असांजे के खुलासो ने अफगानिस्तान में काम करने वाले अमेरिकी अधिकारियों की जान को खतरे में डाल दिया।

जूलियन असांजे पर क्या आरोप थे?

डोनाल्ड ट्रंप के शासनकाल में अमेरकी जस्टिस डिपार्टमेंट ने जूलियन असांजे पर पूर्व सेना खुफिया विश्लेषक चेल्सी मैनिंग की मदद से अमेरिकी इतिहास में क्लासीफाइड जानकारी को चुराने का आरोप लगाया। ये आरोप विकीलीक्स द्वारा हजारों लीक सैन्य और राजनयिक दस्तावेजों के प्रकाशन से संबंधित हैं।

जस्टिस डिपार्टमेंट का आरोप है, कि चेल्सी मैनिंग की मदद से जूलियन असांजे ने क्लासीफाइड डिप्लोमेटिक केबल चुराए, जिसने अमेरिकी सुरक्षा को खतरे में डाल दिया। असांजे पर आरोप लगाया गया, कि असांजे ने चेल्सी मैनिंग के मिलकर डिफेंस डिपार्टमेंटड का पासवर्ड तोड़ा।

अमेरिकी प्रॉसीक्यूटर्स ने कहा, कि असांजे द्वारा प्रकाशित अफगानिस्तान और इराक युद्धों की रिपोर्टों में उन अफगानों और इराकियों के नाम शामिल थे, जिन्होंने अमेरिकी और गठबंधन सेनाओं को जानकारियां प्रदान की थीं। जबकि जूलियन असांजे ने जो डिप्लोमेटिक केबल्स जारी किए, उनमें दमनकारी देशों के पत्रकारों, धार्मिक नेताओं, मानवाधिकार वकीलों और असंतुष्टों के बारे में जानकारी सार्वजनिक कर दी थी, जिससे इनकी जान पर खतरा पैदा हो गया।

अमेरिका ने चेल्सी मैनिंग को जासूसी अधिनियम का उल्लंघन करने और विकीलीक्स को क्लासीफाइड सरकारी और सैन्य दस्तावेज लीक करने के अन्य अपराधों के लिए दोषी ठहराया और उन्हें 35 सालों की सजा सुनाई। हालांकि, राष्ट्रपति बराक ओबामा ने साल 2017 में उनकी सजा कम कर दी थी, जिससे उन्हें लगभग सात साल जेल में रहने के बाद रिहा कर दिया था।

दूतावास में असांजे, 5 सालों तक हाथ मलती रही पुलिस

जूलियन असांजे ने पिछले पांच साल ब्रिटेन की हाई सिक्योरिटी वाली जेल में बिताए हैं और वो लगातार अमेरिकी प्रत्यर्पण के खिलाफ कोर्ट में कानूनी लड़ाई लड़ रहे थे। उन्हें कई बार ब्रिटेन से अमेरिका प्रत्यर्पित करने की कोशिश की गई, लेकिन वो बार बार कोर्ट में चुनौती देते रहे और जीतते रहे, जिसकी वजह से उन्हें प्रत्यर्पित नहीं किया जा सका।

साल 2012 में जूलियन असांजे को दूसरे तरीके से फंसाने की कोशिश की गई और स्वीडिश सरकार ने उनके खिलाफ एक लड़की के साथ यौन शोषण करने का आरोप लगा दिया, और उस वक्त वो इक्वाडोर की दूतावास में मौजूद थे। यौन शोषण लड़ने के आरोप लगने के बाद उन्होंने लंदन स्थित इक्वाडोर की दूतावास में ही शरण ले ली। बिना इक्वाडोर की इजाजत के लंदन पुलिस दूतावास में घुस नहीं सकती थी और इक्वाडोर सरकार ने लंदन पुलिस को दूतावास में दाखिल होने की इजाजत नहीं दी।

साल 2019 में उन्होंने लंदन स्थित इक्वाडोर दूतावास उस वक्त छोड़ा, जब 2019 में डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने जूलियन असांजे के खिलाफ आरोप पत्र दायर कर दिए, उसके बाद दक्षिण अमेरिकी राष्ट्र इक्वाडोर ने उनकी राजनीतिक शरण रद्द कर दी और उसके बाद दूतावास से बाहर निकलते ही उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।

2021 में ब्रिटेन के एक न्यायाधीश ने इस आधार पर अमेरिका के प्रत्यर्पण अनुरोध को खारिज कर दिया, कि अगर असांजे को अमेरिका में कठोर जेल परिस्थितियों में रखा गया, तो वह आत्महत्या कर सकते हैं। उच्च न्यायालयों ने उनके इलाज के बारे में अमेरिका से आश्वासन मिलने के बाद उस फैसले को पलट दिया। ब्रिटिश सरकार ने जून 2022 में प्रत्यर्पण आदेश पर हस्ताक्षर किए।

लेकिन, पिछले महीने, हाईकोर्ट के दो जजों ने फैसला सुनाया, कि असांजे इस तर्क के आधार पर एक नई अपील दायर कर सकते हैं, कि क्या उन्हें फ्री स्पीच की सुरक्षा मिलेगी या वे अमेरिकी नागरिक नहीं होने के कारण नुकसान में रहेंगे। सुनवाई की तारीख अभी तय नहीं हुई है।

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जूलियन असांजे-अमेरिका डील क्या है?

अमेरिकी जस्टिस डिपार्टमेंट ने फेडरल कोर्ट में जो पत्र दिया है, उसके मुताबिक जूलियन असांजे को जासूसी अधिनियम के तहत संयुक्त राज्य अमेरिका की राष्ट्रीय रक्षा से संबंधित वर्गीकृत जानकारी को अवैध रूप से प्राप्त करने और प्रसारित करने की साजिश रचने के गंभीर आरोप में अपना दोष मानना पड़ेगा।

इस समझौते के तहत जूलियन असांजे ने अपना दोष मान लिया और जस्टिस डिपार्टमेंट ने उनके लिए 62 महीने की सजा की मांग की, और चूंकी जूलियन असांजे इससे ज्यादा समय तक जेल में रह चुके थे, इसलिए उन्हें रिहा कर दिया गया। अब माना जा रहा है, कि वो ऑस्ट्रेलिया लौट जाएंगे।

रिपोर्ट के मुताबिक, मारियाना द्वीप समूह के सबसे बड़े द्वीप साइपन में अब इस मामले में अगली सुनवाई होगी। यह सुनवाई वहां इसलिए हो रही है, क्योंकि असांजे ने अमेरिका की यात्रा करने का विरोध किया था और ये कोर्ट ऑस्ट्रेलिया के करीब है। सोमवार शाम को जूलियन असांजे ब्रिटिश जेल से बाहर आ गये हैं।

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