ऋषि सुनक कौन हैं जो बन सकते हैं ब्रिटेन के नए प्रधानमंत्री? भारत के इस चर्चित रईस के हैं दामाद
लिज ट्रस के इस्तीफा देने के बाद अब एक बार फिर से ऋषि सुनक के पीएम बनने की संभावना बनने लगी है। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो भारतीय मूल के ऋषि सुनक इस बार भी सबसे फेवरेट नाम हैं।
ब्रिटेन में 6 जुलाई को लिज ट्रस के पीएम पद संभालते ही कई राजनीतिक दिग्गज ये भविष्यवाणी करने में जुट गए थे कि ये कुर्सी उनके लिए घातक साबित होने वाली है। हालांकि इसका किसी को भी अंदाजा नहीं था कि जिस लोकलुभावन वादों के बूते वो सत्ता में आईं उसका असर बस 45 दिनों तक ही रह पाएगा। बस 24 घंटे पहले पीएम पद से इस्तीफा देने से इनकार करने वाली ट्रस को आखिरकार पार्टी के दबाव के आगे झुकना पड़ा। लिज ने प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है। अब अगले पीएम चुने जाने तक वह पद पर बनी रहेंगी।

ऋषि सुनकअभी भी सबसे फेवरेट
अब सवाल यह उठता है कि लिज ट्रस के बाद कंजर्वेटिव पार्टी से प्रधानमंत्री किसे बनाया जाएगा? मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो भारतीय मूल के ऋषि सुनक इस बार भी सबसे फेवरेट नाम हैं। हालांकि पिछली बार भी वह सांसदों की वोटिंग में सबसे आगे रहे थे लेकिन कंजर्वेटिव पार्टी के सदस्यों के वे फेवरेट नहीं बन सके। 'द गार्डियन' ने एक रिपोर्ट में एक दिन पहले कहा भी है कि ब्रिटेन के लोगों और कंजर्वेटिव पार्टी के कई सांसदों की सोच यह है कि सितंबर में सुनक को ही प्रधानमंत्री बनाया जाना था। लिज को गलत चुना गया। हालांकि लिज ट्रस से हारने के 46 दिन बाद अब लगता है कि ऋषि सुनक पीएम बनने में सफल साबित होंगे।

नारायणमूर्मि के दामाद हैं सुनक
सुनक का भारत से गहरा नाता रहा है। उनकी शादी इंफोसिस के को-फाउंडर नारायण मूर्ति की बेटी अक्षता से हुई है। ऋषि सुनक की पढ़ाई ब्रिटेन के विंचेस्टर कॉलेज से स्कूल से हुई है। यह देश के सबसे प्रतिष्ठित स्कूलों में शामिल है। इसके बाद ऋषि ऑक्सफोर्ड और अमेरिका की स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी पहुंचे और यहां से आगे की पढ़ाई पूरी की। जब सुनक स्टैनफोर्ड में एमबीए की पढ़ाई कर रहे थे तभी उनकी मुलाकात अक्षता से हुई थी। इसके बाद दोनों में दोस्ती हुई और फिर दोनों ने साल 2009 में शादी कर ली।

बोरिस जॉनसन के फेवरेट थे सुनक
राजनीति में आने से पहले उन्होंने गोल्डमैन शैक्स जैसी कुछ बहुचर्चित कंपनियों में काम किया था। राजनीति में सुनक की एंट्री साल 2015 में हुई। वह नार्थ यॉर्कशायर में रिचमंड से सांसद हैं। ब्रिटेन की पीएम रही थेरेसा मे की कैबिनेट में ऋषि ने कनिष्ठ मंत्री के पद पर काम किया। कंजर्वेटिव पार्टी में रहकर सुनक ने ब्रेक्जिट का पुरजोर समर्थन कर जल्दी ही टोरी पार्टी में जगह बना ली। उन्होंने यूरोपीय संघ से ब्रिटेन के बाहर होने की बोरिस जॉनसन की रणनीति का समर्थन किया था। 2019 से 2020 तक सुनक ट्रेजरी के मुख्य सचिव रहे। कोरोना काल में देश को आर्थिक मंदी से सफलतापूर्वक उबारने के कारण सुनक का खूब नाम हुआ।

गुंजरावाला में हैं ऋषि की जड़ें
ऋषि सुनक का परिवार पंजाबी खत्री समुदाय से संबंध रखता है। ऋषि के दादा रामदास सुनक गुंजरावाला में रहते थे जो अभी पाकिस्तान का हिस्सा है। गुंजरावाला हिंदू-मुस्लिम के बीच संघर्ष चरम पर था ऐसे में रामदास ने सन् 1935 में गुंजरावाला छोड़ दिया और वो बेहतर जीवन की तलाश में केन्या की वर्तमान राजधानी नैरोबी आ गए। वहीं उनकी पत्नी सुहाग रानी सुनक, गुंजरावाला से दिल्ली आ गई थीं और उनके साथ उनकी सास भी थी। रामदास जब नैरोबी में कुछ जम गए तो उन्होंने अपने परिवार को वहां बुला लिया।

नैरोबी छोड़ पिता जा बसे लिवरपूल
रामदास नैरोबी में क्लर्क का काम करते थे। अपनी प्रतिभा के बलबूते वह वहां एडमिनिस्ट्रेटिव ऑफिसर के पद पर भी पहुंचे। रामदास और सुहाग रानी के छह बच्चे थे जिसमें तीन बेटे और तीन बेटियां थीं। ऋषि के पिता यशवीर सुनक इनमें से ही एक थे। यशवीर सुनक का जन्म नैरोबी में सन् 1949 में हुआ था। साल 1966 में यशवीर नैरोबी से लिवरपूल आ गए। उन्होंने यहां लिवरपूल यूनिवर्सिटी से मेडिसिन की पढ़ाई की। फिलहाल वो साउथ हैंपटन में रहते हैं। वहीं रामदास सुनक की तीनों बेटियों ने भारत में ही पढ़ाई की है।












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