कौन है मालदा हिंसा का 'मास्टरमाइंड' AIMIM नेता मोफक्करुल इस्लाम? गिरफ्तारी के बाद खुले कई राज, पेशे से है वकील
AIMIM Mofakkerul Islam (Malda Violence): पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में हुई हिंसा और न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाने की घटना में अब बड़ा मोड़ आ गया है। पुलिस ने इस पूरे मामले के कथित 'मास्टरमाइंड' मोफक्करुल इस्लाम को गिरफ्तार कर लिया है। यह गिरफ्तारी उस वक्त हुई, जब वह सिलीगुड़ी के पास बागडोगरा एयरपोर्ट से राज्य छोड़कर भागने की कोशिश कर रहा था। इस एक गिरफ्तारी ने कई ऐसे सवाल खड़े कर दिए हैं, जिनका जवाब अब जांच एजेंसियां तलाश रही हैं।
कौन है मोफक्करुल इस्लाम? (Who is Mofakkerul Islam)
मोफक्करुल इस्लाम पेशे से एक वकील है और ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन यानी AIMIM से जुड़ा एक सक्रिय चेहरा माना जाता है। उसने 2021 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में उत्तर दिनाजपुर जिले की इटाहार सीट से चुनाव भी लड़ा था।

राजनीतिक रूप से वह लंबे समय से सक्रिय रहा है और खासकर सीमावर्ती इलाकों में उसकी पकड़ मानी जाती है। स्थानीय स्तर पर वह अपने आक्रामक बयानों और विरोध प्रदर्शनों में सक्रिय भूमिका के लिए जाना जाता है।
कैसे हुआ गिरफ्तारी का ऑपरेशन?
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, इस्लाम के खिलाफ पर्याप्त सबूत मिलने के बाद से ही उसकी तलाश तेज कर दी गई थी। खुफिया एजेंसियों को जानकारी मिली थी कि वह गिरफ्तारी से बचने के लिए बागडोगरा एयरपोर्ट से फ्लाइट पकड़ने वाला है।
इसके बाद पुलिस की एक विशेष टीम ने जाल बिछाया और उसे एयरपोर्ट के टर्मिनल के पास से ही गिरफ्तार कर लिया। बताया जा रहा है कि वह राज्य से बाहर निकलने की पूरी तैयारी में था, लेकिन ऐन वक्त पर पुलिस ने उसे पकड़ लिया।
Listen to this provocative speech from yesterday’s protest in Malda.
— Megh Updates 🚨™ (@MeghUpdates) April 2, 2026
Speaker identified as Mofakkerul Islam, Calcutta High Court advocate and former AIMIM candidate (2021).
Police are probing his role in last night’s incident.pic.twitter.com/vkBIXPpYQJ
मोफक्करुल इस्लाम CID ने बागडोगरा एयरपोर्ट से हिरासत में लिया है। गिरफ्तारी के दौरान मोफक्करुल इस्लाम ने कहा कि जब तक वोटर लिस्ट से हटाए गए लोगों के नाम दोबारा शामिल नहीं किए जाते, तब तक विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा। सूत्रों के मुताबिर पश्चिम बंगाल सीआईडी ने अधिवक्ता मोफक्करुल इस्लाम को आज सुबह गिरफ्तार किया। वह राज्य से भागने की कोशिश में बागडोगरा एयरपोर्ट पहुंचा था, जहां उसे पकड़ लिया गया।
#WATCH | West Bengal | Mofakkarul Islam, the alleged mastermind of Kaliachak incident in Malda, was detained by CID at Bagdogra airport
— ANI (@ANI) April 3, 2026
He says, "The protest will continue till the names of the deleted voters get included in the list..." https://t.co/O4mgtTpRqY pic.twitter.com/xAHhjDMvkn
क्या है मालदा हिंसा में उसकी भूमिका?
जांच में सामने आया है कि हाल के दिनों में सुजापुर और कालियाचक इलाके में जो विरोध प्रदर्शन हुए, उनमें मोफक्करुल इस्लाम की अहम भूमिका थी। पुलिस का दावा है कि उसने इन प्रदर्शनों को संगठित किया और भीड़ को नेतृत्व दिया।
यही विरोध आगे चलकर उस बड़े घटनाक्रम में बदल गया, जिसमें सात न्यायिक अधिकारियों को करीब 9 घंटे तक बंधक बना लिया गया। यह घटना उस समय हुई, जब अधिकारी वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) से जुड़े काम के लिए BDO ऑफिस पहुंचे थे।
इस मामले में एक वीडियो भी सामने आया है, जिसने पुलिस की जांच को और मजबूत किया है। इस वीडियो में इस्लाम खुलेआम प्रशासन को चुनौती देता नजर आ रहा है। वह अधिकारियों को ललकारते हुए कहता है कि "डीएम, एसपी, सीआईडी, आईबी कहां हैं?" इस तरह की बयानबाजी के बाद से ही वह पुलिस के रडार पर आ गया था। पुलिस का मानना है कि इस तरह के बयानों ने भीड़ को उकसाने में बड़ी भूमिका निभाई और स्थिति हिंसक हो गई।
SIR विवाद: क्यों भड़का था गुस्सा?
मालदा में हिंसा की जड़ वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) से जुड़ी है। इस प्रक्रिया के तहत लाखों नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए और कई लोगों को 'एडजुडिकेशन' में रखा गया। बताया जा रहा है कि करीब 63 लाख नाम हटाए गए, जबकि 60 लाख से ज्यादा लोगों के नाम समीक्षा के लिए रखे गए। न्यायिक अधिकारियों को इन मामलों की जांच का जिम्मा दिया गया था।
जब अधिकारी कालियाचक के BDO ऑफिस पहुंचे, तो पहले प्रदर्शनकारियों ने उनसे मिलने की मांग की। लेकिन जब यह मांग नहीं मानी गई, तो भीड़ ने ऑफिस का घेराव कर लिया और सभी सात अधिकारियों को अंदर ही रोक लिया। करीब 9 घंटे बाद पुलिस ने उन्हें बाहर निकाला, लेकिन इस दौरान गाड़ियों पर पथराव और तोड़फोड़ भी हुई।
सुप्रीम कोर्ट की सख्ती और जांच
यह मामला सीधे सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा, जहां अदालत ने इसे गंभीर मानते हुए राज्य प्रशासन की कड़ी आलोचना की। कोर्ट ने इसे "क्रिमिनल फेल्योर" बताया और कहा कि यह न्यायिक व्यवस्था को चुनौती देने जैसा है।
मुख्य न्यायाधीश की बेंच ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया कि इस घटना की जांच CBI या NIA जैसी केंद्रीय एजेंसी से कराई जाए और न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। साथ ही राज्य के मुख्य सचिव, डीजीपी और जिला प्रशासन के अधिकारियों को 6 अप्रैल को कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया गया है।
अब आगे क्या?
फिलहाल मोफक्करुल इस्लाम पुलिस हिरासत में है और उससे लगातार पूछताछ की जा रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि क्या यह हिंसा किसी बड़ी साजिश का हिस्सा थी या फिर अचानक भड़की भीड़ का परिणाम। इस गिरफ्तारी ने साफ कर दिया है कि मामला सिर्फ स्थानीय विरोध तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे संगठित प्लानिंग की आशंका भी जताई जा रही है।
मालदा हिंसा अब सिर्फ एक कानून-व्यवस्था का मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह बंगाल की राजनीति और चुनावी माहौल पर गहरा असर डालने वाला मुद्दा बन चुका है। मोफक्करुल इस्लाम की गिरफ्तारी के बाद जांच की दिशा और तेज हो गई है। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि इस पूरे घटनाक्रम के पीछे असली कहानी क्या है और इसका असर पश्चिम बंगाल की सियासत पर कितना गहरा पड़ने वाला है।












Click it and Unblock the Notifications