George Soros: एंटी-इंडिया एजेंडा चलाने वाले कारोबारी जॉर्ज सोरोस कौन हैं? बीजेपी ने राहुल से जोड़ा रिश्ता
Who is George Soros: भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर पर एक वीडियो शेयर किया है, जिसमें राहुल गांधी को निशाना बनाया है और उनका रिश्ता, लंबे वक्त से एंटी-इंडिया एजेंडा चलाने के लिए कुख्यात रहे, अमेरिका के अरबपति कारोबारी जॉर्ज सोरोस से जोड़ा है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अमेरिका की राजकीय यात्रा से पहले राहुल गांधी ने यूएस का दौरा किया था और अपनी यात्रा के दौरान राहुल गांधी ने दर्जनों सभाएं की थी, विश्वविद्यालयों के कार्यक्रम के अलावा कई निजी कार्यक्रम में भी शामिल हुए। वहीं, बीजेपी ने आरोप लगाया है, कि भारत विरोधी ताकतों के साथ मिलकर राहुल गांधी एंटी-इंडिया एजेंडा को बढ़ावा दे रहे हैं।

बीजेपी-कांग्रेस में टकराव बढ़ा
बीजेपी और कांग्रेस के बीच टकराव तब शुरू हुआ, जब कर्नाटक पुलिस ने बुधवार को अमित मालवीय पर आईपीसी की विभिन्न धाराओं 153 (ए), 120 (बी), 505 (2) और 34 के तहत "विभिन्न सामाजिक समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देने" के आरोप में मामला दर्ज किया।
अमित मालवीय के खिलाफ "सौहार्द बनाए रखने के लिए प्रतिकूल कार्य करना" और साजिश रचने का भी आरोप लगाया गया है। कार्रवाई पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए, बीजेपी ने कांग्रेस पार्टी पर "सच्चाई को दबाने" के लिए सत्ता के दुरुपयोग का आरोप लगाया और केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने कहा, कि पार्टी को "राहुल गांधी की अमेरिका यात्रा के दौरान बीजेपी का जो स्टैंड है, उसको लेकर एफआईआर की गई है।"
बुधवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान, ईरानी ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने 30 मई को अपनी अमेरिकी यात्रा के दौरान, अरबपति निवेशक जॉर्ज सोरोस के करीबी सहयोगियों के साथ साथ, संदिग्ध साख वाले लोगों के साथ "कार्यक्रम किया", जो भारत में लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई सरकार को "अस्थिर" करना चाहते हैं।
केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने राहुल गांधी का नाम जॉर्ज सोरोस से जोड़ा है, लिहाजा जानना जरूरी हो जाता है, कि अमेरिका का ये अरबपति कारोबारी कौन हैं और इन्होंने हमेशा से भारत विरोधी एजेंडा को कैसे बढ़ाया है?
जॉर्ज सोरोस को जानिए...
1- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुखर आलोचक, जॉर्ज सोरोस ने हाल ही में 2023 म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन के दौरान यह कहकर विवाद पैदा कर दिया, कि उन्हें भारत में "लोकतांत्रिक पुनरुत्थान" की उम्मीद है। उन्होंने गौतम अदानी समूह-हिंडनबर्ग संकट का संदर्भ दिया था, जिसमें अमेरिकी शॉर्ट सेलर ने भारतीय औद्योगिक समूह पर व्यापारिक कदाचार का आरोप लगाया था।
2- जॉर्ज सोरोस अमेरिका के मशहूर व्यापारी, राजनीतिक और सामाजिक कार्यकर्ता हैं। वे मूलतः हंगरी मूल के अमेरिकी नागरिक हैं। जॉर्ज सोरोस का जन्म 1930 में हंगरी में हुआ था। ये वो दौर था जब यहूदियों के खिलाफ हिटलर का आतंक चरम पर था। सोरोस और उनका परिवार एक फर्जी आईडी के माध्यम से नाजियों को धोखा देकर बचने में सफल रहा। साल 1956 में सोरोस अमेरिका चले गए।
3- नास्तिक होने का दावा करने वाले जॉर्ज सोरोस खुद को दार्शनिक कहलाना पसंद करते हैं। उन्होंने एक दर्जन से ज्यादा किताबें भी लिखी हैं। राजनीति में सोरोस की काफी दिलस्चपी रहती है। वे अमेरिका सहित दुनिया भर के कई देशों में लिबरल सरकार बनाना चाहते हैं और इसके लिए प्रयास करते रहते हैं। इसके लिए वे फंडिंग भी करते हैं। साल 2004 में वह अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में जॉर्ज डब्ल्यू. बुश को हराने के लिए चंदे में एक बड़ी रकम दी थी।
4- जॉर्ज सोरोस दुनिया भर में कंजरवेटिव नेताओं के निशाने पर भी रहते हैं। उनपर 'बाहरी' होकर देशों के आंतरिक मामलों में दखलअंदाजी का आरोप लगता है। जॉर्ज सोरोस को करेंसी मैनिपुलेटर भी माना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि अपने फायदे के लिए उन्होंने बैंक ऑफ इंग्लैंड को नुकसान पहुंचाया।
5- नब्बे के शुरुआती दशक में उन्होंने पाउंड के खिलाफ सट्टेबाजी की और मोटा मुनाफा कमाया। उनपर सट्टेबाजी करके अर्थव्यवस्था को अस्थिर करने का आरोप लगता रहा है। केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने भी बिल्कुल इसी मुद्दे को उठाते हुए उन्हें बैंक ऑफ इंग्लैंड को बर्बाद करने वाला बताया है।












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