PM मोदी से मानवाधिकार पर 'असहज' बात करेगा अमेरिका, बाइडेन से मुलाकात से पहले व्हाइट हाउस का बड़ा बयान
White House on PM Modi US Visit: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का अमेरिका दौरा शुरू हो गया है और देर रात भारतीय प्रधानमंत्री न्यूयॉर्क पहुंचे हैं, जहां आज उन्होंने अमेरिकी उद्योगपतियों और अलग अलग क्षेत्रों के लीडर्स से मुलाकात की है। वहीं, पीएम मोदी न्यूयॉर्क में यूनाइटेड नेशंस के अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस कार्यक्रम में भी शामिल हो रहे हैं।
वहीं, पीएम मोदी के दौरे के बीच अमेरिका के कुछ संगठनों ने विरोध प्रदर्शन भी किया है और पीएम मोदी के सामने भारत में मानवाधिकार के मुद्दे को उठाने की मांग की है। वहीं, कुछ संगठनों और नेताओं ने भारतीय लोकतंत्र पर भी सवाल उठाने की कोशिश की, जिसका व्हाइट हाउस ने दिया है।

भारतीय लोकतंत्र पर क्या बोला व्हाइट हाउस
व्हाइट हाउस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की राजकीय यात्रा के बीच कहा है, कि अमेरिका की तरह भारत भी एक जीवंत लोकतंत्र है और दोनों देश अपने द्विपक्षीय संबंधों पर काम करना जारी रखेंगे। राष्ट्रपति जो बाइडेन और प्रथम महिला जिल बिडेन के निमंत्रण पर मोदी 21-24 जून तक अमेरिका का दौरा कर रहे हैं और रिपोर्ट के मुताबिक, आज रात में बाइडेन परिवार के साथ पीएम मोदी डिनर कार्यक्रम में शामिल हो सकते हैं।
प्रधानमंत्री कल अमेरिकी संसद के संयुक्त सत्र को भी संबोधित करेंगे, जिसमें राष्ट्रपति बाइडेन के अलावा अमेरिका के तमाम बड़े नेता मौजूद रहेंगे।
वहीं, अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के कॉर्डिनेटर जॉन किर्बी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, कि "लोकतंत्र एक कठिन व्यवस्था है और हम वह जानते हैं। हमने अमेरिका में भी लोकतंत्र को देखा है, और अमेरिका में भी लोकतंत्र कठिन है और आपको लगातार इसपर काम करना पड़ता है।"
उन्होंने आगे कहा, कि "भारत में एक जीवंत लोकतंत्र है, और वे भी इस पर काम करते हैं। कोई भी लोकतंत्र किसी भी समय में पूर्णता तक नहीं पहुंचता है।"
जॉन किर्बी ने कहा, कि लोकतंत्र का विचार यह है कि "आप और अधिक परिपूर्ण बनने की कोशिश करते हैं ... इसलिए हम दुनिया में इन दो जीवंत, प्रासंगिक, मजबूत और प्रभावशाली लोकतंत्रों के बीच इस द्विपक्षीय संबंध पर काम करना जारी रखेंगे।"
उन्होंने कहा, कि इसका मतलब है. कि ऐसा करने में, "हम भी बातचीत करने जा रहे हैं, हम कर सकते हैं और हमें अपने सहयोगियों और अपने दोस्तों और अपने सहयोगियों के साथ कुछ असहज बातचीत करने की जरूरत है।" उन्होंने कहा।
किर्बी ने कहा, "जब आप साथी और मित्र और सहयोगी हों, तो आप यही कर सकते हैं, असहज मुद्दों के बारे में बातचीत करें।" वहीं, एक सवाल के जवाब में किर्बी ने कहा, कि राष्ट्रपति बाइडेन दुनिया भर में जहां भी जाते हैं, और जिस भी नेता से बात करते हैं, मानवाधिकारों पर चिंता जताते हैं।
जॉन किर्बी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा, कि "मानवाधिकार इस (बिडेन) प्रशासन की विदेश नीति का एक मूलभूत तत्व है, और आप निश्चित रूप से उम्मीद कर सकते हैं, कि राष्ट्रपति, जैसा कि वह हमेशा करते हैं और जैसा कि आप भारत में प्रधानमंत्री मोदी जैसे दोस्तों और भागीदारों के साथ कर सकते हैं, मानवाधिकार के बारे में हमारी चिंताओं को उठाएंगे।"
ज़ॉन किर्बी ने कहा, कि अमेरिका अपने दोस्तों, सहयोगियों, साझेदारों और यहां तक कि उन देशों के साथ भी नियमित रूप से मानवाधिकारों की चिंताओं को उठाता है, जिनके साथ वह इतना दोस्ताना नहीं है।
उन्होंने कहा, "हम उन चिंताओं को उठाने में शर्माते नहीं हैं और हम ऐसा करना जारी रखेंगे।"












Click it and Unblock the Notifications