Defence News: भारत को कब मिलेगा अपना Ghatak Drone? Dry Kaveri इंजन पर भड़का रक्षा मंत्रालय, दे डाली डेडलाइन
Defence News: भारत के रक्षा मंत्रालय (MoD) ने गैस टरबाइन रिसर्च एस्टैब्लिशमेंट (GTRE) के लिए एक बेहद सख्त टाइमलाइन तय की है। मंत्रालय चाहता है कि Dry Kaveri इंजन का सर्टिफिकेशन साल 2026 तक पूरा हो जाए। यह लक्ष्य इसलिए बेहद अहम माना जा रहा है क्योंकि इसी के आधार पर भारत के Ghatak Unmanned Combat Aerial Vehicle (UCAV) प्रोग्राम को Cabinet Committee on Security (CCS) से मंजूरी मिल सकेगी।
कावेर और ड्राय कावेरी इंजन में फर्क
आसान शब्दों में कहें तो, कावेरी इंजन को लड़ाकू विमानों (जैसे तेजस) के लिए बनाया गया था जिसमें अतिरिक्त शक्ति की जरूरत होती है, जबकि ड्राय कावेरी को बिना आफ्टरबर्नर के, मुख्य रूप से ड्रोन (UCAV) के लिए डिवेलप किया गया है।

कावेरी इंजन (K9): यह एक 'आफ्टरबर्निंग टर्बोफैन' इंजन है। इसमें एक आफ्टरबर्नर सेक्शन होता है जो ईंधन को सीधे निकास (exhaust) में स्प्रे करता है, जिससे कम समय के लिए बहुत अधिक थ्रस्ट (शक्ति) पैदा होती है। यह सुपरसोनिक गति (ध्वनि से तेज) प्राप्त करने के लिए जरूरी है।
ड्राय कावेरी (Dry Kaveri): इसमें आफ्टरबर्नर सेक्शन नहीं होता। यह केवल इंजन के मुख्य भाग (Core) का उपयोग करता है। इसलिए इसे "ड्राय" कहा जाता है क्योंकि इसमें अतिरिक्त ईंधन जलाकर एक्स्ट्रा थ्रस्ट पैदा करने वाली प्रणाली हटा दी गई है।
CCS की मंजूरी Dry Kaveri की प्रगति पर टिकी
Oneindia Hindi को मिले इनपुट के मुताबिक, सरकार मौजूदा अप्रूवल साइकल के अंत तक यानी 2026 में Ghatak UCAV प्रोग्राम को CCS की हरी झंडी देना चाहती है। लेकिन इसकी शर्त साफ है-स्वदेशी Dry Kaveri इंजन में ठोस और दिखने वाली प्रगति। अगर इंजन सर्टिफिकेशन में देरी होती है, तो पूरे प्रोजेक्ट की मंजूरी भी अटक सकती है।
L&T को मिला बड़ा रोल, लेकिन इंजन बना सबसे बड़ा चैलेंज
सूत्रों के अनुसार, Larsen & Toubro (L&T) को Ghatak UCAV के लिए Development Cum Production Partner (DCPP) के रूप में चुना गया है। एयरफ्रेम और अन्य सिस्टम्स पर काम समानांतर रूप से आगे बढ़ रहा है, लेकिन पूरे प्रोग्राम की रफ्तार इस समय Dry Kaveri इंजन पर ही टिकी हुई है। इस इंजन को आगे बढ़ाने से पहले रूस में एक आखिरी ट्रायल राउंड से गुजरना होगा, जिसके बाद ही इसे आगे के डेवलपमेंट और Ghatak में इंटीग्रेशन की मंजूरी मिलेगी।
49 kN थ्रस्ट वाला Dry Kaveri ही होगा फाइनल इंजन
Dry Kaveri इंजन की थ्रस्ट रेटिंग 49 किलो न्यूटन (kN) तय की गई है। MoD ने साफ कर दिया है कि Ghatak UCAV के लिए कोई अस्थायी या ट्रांजिशनल इंजन नहीं अपनाया जाएगा। मतलब शुरुआत से लेकर अंत तक सिर्फ स्वदेशी Dry Kaveri इंजन ही इस्तेमाल होगा। इसका मकसद है कि बीच प्रोग्राम में इंजन बदलने जैसी दिक्कतें न आएं और UCAV को शुरू से ही इंडिजिनस पावरप्लांट के आसपास डिजाइन किया जाए।
2026 में CCS मंजूरी मिली तो कब दिखेगा Ghatak?
अगर 2026 में CCS की मंजूरी मिल जाती है, तो तय टाइमलाइन के मुताबिक:
• पहला प्रोटोटाइप: 2029 के अंत या 2030 की शुरुआत
• पहली उड़ान (Maiden Flight): 2030 के अंत या 2031 की शुरुआत
Ghatak को एक 13 टन क्लास का स्टेल्थ UCAV बनाया जा रहा है, जिसे खासतौर पर डीप स्ट्राइक और हाई-रिस्क मिशनों के लिए डिजाइन किया गया है। इसमें ऑटोनॉमी और सर्वाइवबिलिटी को सबसे अहम फैक्टर माना गया है।
Tejas पर होगा Dry Kaveri का फ्लाइंग टेस्ट
GTRE, Dry Kaveri इंजन के लिए एक सीमित फ्लाइट वैलिडेशन कैंपेन की भी योजना बना रहा है। इसके तहत इस इंजन को एक पुराने Tejas Limited Series Production (LSP) एयरक्राफ्ट पर लगाया जाएगा। यह उड़ानें सिर्फ इंजन टेस्टिंग और वैलिडेशन के लिए होंगी, न कि ऑपरेशनल इस्तेमाल के लिए। यह प्रक्रिया 2030 के बाद शुरू होने की संभावना है, जब इंजन सभी जरूरी सर्टिफिकेशन स्टेज पार कर लेगा।
Tejas बनेगा फ्लाइंग टेस्टबेड, ऑपरेशनल रोल नहीं
MoD ने साफ किया है कि यह Tejas LSP विमान किसी भी कॉम्बैट रोल में इस्तेमाल नहीं होगा। इसका मकसद सिर्फ इतना है कि इंजन को उड़ान के दौरान टेस्ट किया जा सके, इंटीग्रेशन का रिस्क कम किया जा सके और पूरे फ्लाइट एनवेलप को सुरक्षित तरीके से एक्सपैंड किया जा सके।
MoD की बड़ी रणनीति: इंजन पहले, प्लेटफॉर्म बाद में
MoD का यह दबाव एक बड़ी नीति को दिखाता है, जिसमें इंजन की परिपक्वता (maturity) को प्लेटफॉर्म अप्रूवल से पहले सुनिश्चित किया जा रहा है। सरकार नहीं चाहती कि Ghatak जैसे फ्लैगशिप प्रोग्राम्स को CCS मंजूरी मिलने के बाद प्रोपल्शन से जुड़ी देरी झेलनी पड़े।
Dry Kaveri सिर्फ इंजन नहीं, Ghatak की चाबी
अगर Dry Kaveri इंजन 2026 तक सफलतापूर्वक सर्टिफाई हो जाता है, तो यह सिर्फ एक टेक्निकल अचीवमेंट नहीं होगा। यह भारत के ऑटोनॉमस कॉम्बैट एविएशन सपनों के लिए एक बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित होगा और Ghatak UCAV प्रोग्राम को जमीन से आसमान तक पहुंचाने की सबसे अहम कड़ी बनेगा।
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