पाक को एफ-16 देने के बाद भारत के साथ रिश्तों पर क्या कहा अमेरिका ने
वाशिंगटन। पाकिस्तान को एडवांस फाइटर जेट एफ-16 बेचने और भारत की ओर से एक धार्मिक संस्था को वीजा न दिए जाने के मुद्दे पर अमेरिका का बयान आया है।
अमेरिका ने भारत के साथ संबंध बिगड़ने की बात से इनकार कर दिया है। अमेरिका ने कहा है कि भारत के साथ अच्छे और मजबूत संबंध है।
पाक को आतंकियों का स्वर्ग बताने के बाद दिए आठ एफ-16
अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता जॉन किर्बी की ओर से कहा गया है कि भारत के साथ और विशेषकर मोदी सरकार के साथ हमारा अच्छा और मजबूत संबंध रहा है और हम इस संबंध को बरकरार रखने की ओर बढ़ रहे हैं।
एफ-16 फाइटर जेट्स से जुड़े कुछ खास तथ्य
किर्बी से रूटीन मीडिया कांफ्रेंस में पूछा गया था कि क्या उन्हें लगता है कि पाक को एफ-16 फाइटर बेचने और वीजा के मुद्दे पर सवाल पूछा गया था।

क्या सबकुछ अब पहले जैसा नहीं
उनसे मीडिया ने पूछा था कि क्या पिछले दिनों तो कुछ हुआ उसके बाद अमेरिका और भारत के बीच सबकुछ पहले जैसा नहीं चल रहा, इस पर उन्होंने कहा कि नहीं, मैं दरअसल इससे असहमत हूं।

अमेरिका और भारत एक जैसी स्थितियों में
किर्बी ने कहा कि ऐसे बहुत से साझा मुद्दे, चुनौतियां और खतरे हैं जिनका सामना अमेरिका और भारत कर रहा है। ऐसे में निश्चित तौर पर वह इस बात को नहीं मानेंगे की दोनों देशों के बीच कुछ ठीक नहीं है।

मोदी सरकार के साथ रिश्ते
किर्बी की मानें तो अमेरिका का मोदी सरकार के साथ एक अच्छा, ईमानदार, निस्वार्थ और रचनात्मक संबंध है। अमेरिका इस संबंध को आगे बढ़ाने के लिए इच्छुक है।

वीजा मुद्दे पर दर्ज कराई चिंता
किर्बी ने जानकारी दी कि आयोग और वीजा जैसे मुद्दों पर अमेरिका की ओर से विभिन्न स्तरों पर चिंता दर्ज कराई गई है। अमेरिका ने इस मुद्दे पर अपनी निराशा को जाहिर करने में बिल्कुल भी संकोच या झिझक नहीं दिखाई है।

भारत ने भी दर्ज कराया था विरोध
भारत ने पाकिस्तान को लगभग 70 करोड़ डॉलर के आठ एफ-16 फाइटर जेट्स बेचने पर विरोध दर्ज कराया था। भारत ने कहा कि वह अमेरिका के इस तर्क को नहीं मानता है कि हथियारों के ऐसे स्थानांतरण आतंकवाद से निपटने में मददगार होंगे।

क्या हुआ था पिछले हफ्ते
अमेरिकी अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग (यूएससीआईआरएफ) के सदस्यों को भारत ने वीजा देने से इंकार कर दिया था। भारत ने अपने इस फैसले को सही ठहराया था। भारत ने पिछले हफ्ते कहा था कि इस कमीशन को भारत के नागरिकों के संवैधानिक रूप से संरक्षित अधिकारों पर अपना फैसला सुनाने या टिप्पणी करने का अधिकार नहीं है। भारत उन्हें वर्ष 2009 के बाद से वीजा नहीं दे रहा।












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