ट्रंप के 'अवैध टैरिफ' पर अमेरिकी कोर्ट का बड़ा फैसला, US राष्ट्रपति बोले- 'आखिर में हम ही जीतेंगे'
President Donald Trump: अमेरिका की एक फेडरल अपील कोर्ट ने डोनाल्ड ट्रंप के उन टैरिफ (आयात कर) को लगभग गैरकानूनी करार दिया है, जो उन्होंने लगभग पूरी दुनिया के देशों पर लगा दिए थे। हालांकि कोर्ट ने इन टैरिफ को तुरंत खत्म नहीं किया है और ट्रंप प्रशासन को सुप्रीम कोर्ट में अपील करने का समय दिया है। अदालत ने फैसला सुनाया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से लगाए गए ज्यादातर टैरिफ अवैध हैं।
अदालत के इस फैसले पर राष्ट्रपति ट्रंप ने भी प्रतिक्रिया दी है। ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा -"हमारे सभी टैरिफ पूरी तरह लागू हैं। आज एक पक्षपाती कोर्ट ने गलत तरीके से कहा है कि इन्हें हटाया जाना चाहिए, लेकिन सच ये है कि आखिर में जीत अमेरिका की ही होगी।"

क्या कहा कोर्ट ने?
अमेरिका की एक अपीलीय अदालत ने साफ कहा कि ट्रंप ने 1977 के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर एक्ट (IEEPA) का गलत इस्तेमाल किया। कोर्ट ने लिखा - "ये मानना मुश्किल है कि कांग्रेस ने राष्ट्रपति को असीमित अधिकार देने का इरादा किया था ताकि वो मनचाहे तरीके से टैक्स लगा सके।"
ट्रंप ने 2 अप्रैल को 'Liberation Day' घोषित करते हुए लगभग सभी देशों पर टैरिफ लगा दिए थे। जिन देशों से अमेरिका को ट्रेड डेफिसिट है, उन पर 50% तक टैक्स। बाकी लगभग सभी देशों पर 10% का बेसलाइन टैक्स। बाद में उन्होंने कई बार इन दरों में बदलाव भी किया, और भारत जैसे देशों पर अतिरिक्त टैक्स भी लगाए।
इन टैरिफ से अब तक 159 बिलियन डॉलर की कमाई हुई है, जो पिछले साल से दोगुनी है। अमेरिकी न्याय विभाग ने भी चेतावनी दी है कि अगर टैरिफ खत्म हुए तो देश को "वित्तीय तबाही" झेलनी पड़ सकती है।
अटॉर्नी जनरल पैम बॉन्डी ने कोर्ट पर आरोप लगाया कि उसने राष्ट्रपति के विदेश नीति संबंधी अधिकार में दखल दिया है। ट्रंप प्रशासन अब इस फैसले को सीधे अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगा।
व्हाइट हाउस की दलील
कोर्ट के फैसले पर ट्रंप भड़क गए। उन्होंने कहा कि अगर ये टैरिफ हटे तो "अमेरिका बर्बाद हो जाएगा"। उनका दावा है कि ये टैक्स हटने से अमेरिकी किसान, मैन्युफैक्चरर्स और इकॉनमी कमजोर हो जाएगी।
व्हाइट हाउस प्रवक्ता कुश देसाई ने कहा -"ट्रंप ने बिल्कुल कानून के मुताबिक काम किया है और हम इस मामले में आखिरकार जीतेंगे।"
ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर बयान जारी करते हुए कहा,
"आज एक बेहद पक्षपाती अपीलीय अदालत ने गलत तरीके से कहा कि हमारे टैरिफ हटाए जाने चाहिए, लेकिन उन्हें पता है कि अंत में अमेरिका ही जीतेगा। अगर ये टैरिफ़ कभी हटाए गए, तो यह देश के लिए पूरी तरह से तबाही साबित होगी। इससे हम आर्थिक रूप से कमजोर हो जाएंगे, जबकि हमें मजबूत रहना है। अमेरिका अब किसी भी हाल में भारी ट्रेड घाटे, अनुचित टैरिफ और दूसरे देशों-चाहे वे दोस्त हों या दुश्मन-द्वारा लगाए गए गैर-टैरिफ व्यापारिक अवरोधों को बर्दाश्त नहीं करेगा, जो हमारे उद्योगपतियों, किसानों और बाकी सभी को नुकसान पहुंचाते हैं। अगर यह फैसला ऐसे ही कायम रहा, तो यह सचमुच संयुक्त राज्य अमेरिका को तबाह कर देगा।"
अब आगे क्या होगा?
इस फैसले से अब कानूनी टकराव की स्थिति बन सकती है, जिससे ट्रंप की विदेश नीति की योजनाओं पर असर पड़ना तय है। यह आदेश ट्रंप के उस 'रेसिप्रोकल टैरिफ' पर भी लागू होता है, जो उन्होंने दुनिया के ज्यादातर देशों पर लगाया था, जिनमें चीन, मेक्सिको और कनाडा जैसे देश भी शामिल हैं।
7-4 के बहुमत से आए इस निर्णय में अमेरिका की फेडरल सर्किट अपीलीय अदालत ने ट्रंप सरकार के इस दावे को खारिज कर दिया कि टैरिफ आपातकालीन आर्थिक शक्तियों के तहत लगाए गए थे। अदालत ने साफ कहा कि ट्रंप का यह कदम "कानून के खिलाफ और अमान्य" है। हालांकि यह फैसला तुरंत लागू नहीं होगा। इसे 14 अक्टूबर तक टाल दिया गया है, ताकि ट्रंप सरकार सुप्रीम कोर्ट में अपील दाखिल कर सके।












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