मंगल ग्रह पर मिला 'दूसरी दुनिया' का मलबा क्या है ? NASA के इनजेनिटी हेलीकॉप्टर की पड़ी नजर
कैलिफोर्निया, 28 अप्रैल: अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के इनजेनिटी हेलीकॉप्टर को मंगल ग्रह की सतह पर बिखरा हुआ कुछ मलबा मिला है। उस मलबे से एक विशाल पैराशूट भी जुड़ा हुआ है। मलबे को देखकर लगता है कि यह कोई फ्लाइंग ऑब्जेक्ट होगा, जो लाल ग्रह की सतह पर क्रैश कर गया है। वैज्ञानिकों के मुताबिक मलबा अभी भी भौतिक रूप से काफी ठीक नजर आ रहा है और उसका सिर्फ अगला हिस्सा क्रैश की वजह से बिखर गया है। पैराशूट की चौड़ाई 70 फीट बताई गई है। मूल मलबा भी काफी बड़ा है। लेकिन, यह मलबा मंगल ग्रह के लिए बाहरी दुनिया का है और वैज्ञानिकों को इससे लाल ग्रह को बेहतर ढंग से समझने में मदद की उम्मीद है। (मलबे वाली तस्वीर सौजन्य-@NASAJPL ट्विटर से)

Recommended Video
मंगल ग्रह पर मिला 'दूसरी दुनिया' का मलबा क्या है ?
नासा के इनजेनिटी मार्स हेलीकॉप्टर ने हाल ही में मंगल की सतह पर एक फ्लाइंग ऑब्जेक्ट का मलबा देखा है। इस मलबे से मंगल ग्रह का अपना कोई लेना-देना नहीं है। यह उसके लिए दूसरी दुनिया की चीज है। इस मलबे में शंकु के आकार का बैकशेल और उसके साथ जुड़ा हुआ धूल से सना पैराशूट दिखाई दे रहा है। लेकिन, चौंकिए नहीं। यह किसी एलियंस से जुड़ा मसला नहीं है। मंगल पर दूसरी दुनिया का यह मलबा भी नासा के ही अभियान से जुड़ा हुआ है। दरअसल, यह पैराशूट और शंकु के आकार के बैकशेल ने पर्सवीरन्स रोवर को उसकी सतह पर उतरने में मदद की थी। जब रोवर लाल ग्रह पर लैंड कर रहा था तो यह दोनों उससे अलग हो गए थे और अब उसी पर इनजेनिटी हेलीकॉप्टर पर लगे कैमरों की नजर पड़ी है। लैंडिंग की यह घटना फरवरी, 2021 में हुई थी।

'यह दूसरी दुनिया से निकला है, है कि नहीं?'
न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक नासा के जेट प्रोपल्शन लैबोरेटरी की ओर से बुधवार को तस्वीरें जारी होने के बाद पर्सवीरन्स के पैराशूट सिस्टम के लिए काम कर चुके एक इंजीनियर इआन क्लार्क ने कहा है, 'इसमें निश्चित रूप से एक साइ-फाई तत्व है।' उन्होंने कहा है, 'यह दूसरी दुनिया से निकला है, है कि नहीं?' एक साल से मंगल के चट्टानों की खोज करते हुए पर्सवीरन्स रोवर उसी जगह से गुजरा है, जहां पर उसकी लैंडिंग हुई थी। रोवर का रोबोटिक साथी हेलीकॉप्टर इनजेनिटी लगातार उसके साथ बना हुआ है।
बैकशेल ने रोवर की लैंडिंग में मदद की थी
पिछले हफ्ते अपनी 26वीं उड़ान में इनजेनिटी ने 159 सेकंड तक हवा में चक्कर लगाते हुए 10 तस्वीरें खींची थी। इस दौरान उसने 1,181 फीट का दायरा कवर किया था। मलबे के रूप में बिखरे हुए बैकशेल या लैंडिंग कैप्सूल का अगला हिस्सा देखकर अंदाजा लग सकता है कि मंगल के वायुमंडल से गिरने के दौरान इसने किस तरह से पर्सवीरन्स रोवर और इनजेनिटी हेलीकॉप्टर को सुरक्षित रखने में सहायता की होगी। 70 फीट चौड़ा पैराशूट अभी भी उस मलबे से जुड़ा हुआ है। इस पैराशूट ने लैंडिंग के दौरान मंगल ग्रह पर उतरने वाले वाहन की गति को नियंत्रित रखा था।

लैंडिंग से करीब 3 किलोमीटर पहले अलग हुए थे
पैराशूट और बैकशेल रोवर से तब अलग हुए थे, जब वह 1.3 मील या करीब 3 किलोमीटर से ज्यादा ऊंचाई पर था। एक रॉकेट-संचालित सिस्टम स्काईक्रेन ने पर्सवीरन्स रोवर की बाकी दूरी पूरी करवाई थी। जबकि, बैकशेल और पैराशूट उससे उत्तर-पश्चिम की ओर 1 मील से ज्यादा दूरी पर गिरे और क्रैश लैंडिंग की वजह से वह मलबे के रूप में नजर आ रहा है।
125 किमी से भी ज्यादा रफ्तार से गिरा था बैकेशल
करीब 15 फीट व्यास वाला बैकशेल लगभग 125 किलोमीटर प्रति घंटे से भी ज्यादा रफ्तार से मंगल की धरती से टकराया था; जो कुछ हद तक बिखर गया। साल भर गुजरने के बाद भी देखा जाए तो वह अभी भी सही ही नजर आ रहा है। पैराशूट की रस्सियां भी बैकशेल से जुड़ी ही हुई हैं। हालांकि, इंजीनियर इन तस्वीरों के विस्तृत अध्ययन में जुट गए हैं। क्लार्क ने कहा है,'उनका कहना है कि एक तस्वीर 1,000 शब्दों के लायक है, लेकिन इंजीनियरों के लिए भी समझने के लिए इसमें अनंत संभावनाएं हैं।'

भविष्य के मंगल मिशन में आएगा काम
बैकशेल का अध्ययन नासा को भविष्य के अभियानों के लिए मददगार साबित हो सकता है, जैसे कि लाल ग्रह से चट्टान और मिट्टी पृथ्वी पर लाना और उसपर व्यापक अध्ययन करना। नासा के मार्स सैंपल रिटर्न मिशन के नाम से जाने वाले उस अभियान में मंगल की सतह पर दो लैंडर उतारना होगा। एक रोवर, जो कि पर्सवीरन्स से ड्रिल करके खोदी गई मिट्टी इकट्ठा करेगा और एक छोटा रॉकेट जो कि सैंपल को मंगल से लॉन्च करके उसकी ऑर्बिट तक पहुंचाए, जहां से दूसरा स्पेसक्राफ्ट उसे वापस पृथ्वी तक लेकर आए।

रोवर अपने काम में जुटा हुआ है
उधर पर्सवीरन्स अपने अभियान में लगातार जुटा हुआ है। 2 अप्रैल को इसने मंगल की छोटी चंद्रमा फोबोस की तस्वीरों की पूरी सीरीज उतार ली, जब वह सूर्य के आगे से गुजर रहा था और आंशिक ग्रहण की स्थिति पैदा हुई थी। फोबोज के ऑर्बिट की विस्तृत गणना से मंगल की आंतरिक संरचना के बारे में काफी कुछ संकेत मिलने की उम्मीद है।












Click it and Unblock the Notifications