इस्लाम में क्या है '72 हूर' का मतलब? अमेरिकी टीचर बोले- इजराइली सेना की औरतें हमास के लिए 72 हूर डेटिंग सर्विस
अमेरिका के एक ब्रुकलिन शिक्षक ने इजराइल और हमास के बीच जारी जंग को लेकर '72 हूर' (72 hoorain) से जुड़ा हुए एक ऐसा बयान दिया है, जो विवादों में आ गया है। फोर्ट हैमिल्टन स्कूल के शिक्षक रॉबर्ट रॉसिकोन ने अपने एक बयान में कथित तौर पर कहा है कि, ' इजराइली सेना की महिला सैनिक हमास के लिए 72 हूर डेटिंग सर्विस है।' शिक्षक पर हेट स्पीच देने का भी आरोप है और उनके खिलाफ जांच की जा रही है।
शिक्षक रॉबर्ट ने सोशल मीडिया पर "गाजा को जलने दो" और "वहां कोई निर्दोष नहीं है" जैसे भी विवादित कमेंट किया है। लेकिन उनके '72 हूर' वाला कमेंट विवादों में आ गए है। एक बार फिर से इस्लाम में '72 हूर' का क्या मतलब है, इसको लेकर लोग सोशल मीडिया पर चर्चा कर रहे हैं। ऐसे में कई यूजर्स ने ये सवाल उठाया है कि आखिर 72 हूरों का सच क्या है? तो आइए जानते हैं कि इस्लाम में '72 हूर' का क्या मतलब है?

असल में आपने इस्लामिक एक्सपर्ट को टीवी-अखबार पर कई बार देखा या पढ़ा होगा, जिसमें वो कहते हैं कि 'मौत के बाद जन्नत मिलेगी और वहां 72 हूरें तुम्हारा स्वागत करेंगी।'
कुरान और हदीस दोनों में जन्नत कैसा होता है, उसकी नेमतों और दोजख (नरक) के बारे में लिखा गया है। हदीसे बुखारी और सहीह मुस्लिम में लिखा है कि, 'जन्नत में ऐसी -ऐसी बरकतें होंगी, जो किसी ने आंखों से नहीं देखी होगी, जो किसी ने कानों से सुनी नहीं होगी और किसी ने मन में ऐसा कुछ ख्याल आया होगा।'
कई इस्लामिक एक्सपर्ट का कहना है कि कुरान में 'हूर' का जिक्र है, लेकिन ये 'हूर' 72 है या 75...इसकी संख्या का जिक्र नहीं है। बता दें कि
जानिए अलग-अलग इस्लामिक एक्सपर्ट क्या कहते हैं?
- इस्लामिक स्कॉलर शोएब जमई के मुताबिक, 'कुरान और हदीस दोनों में हूरों का जिक्र है। लेकिन कोई संख्या नहीं दी गई है।' जमई ने अपने एक इंटरव्यू में कहा था कि, 'जैसे वैदिक ग्रंथों महाभारत, पुराणों में अप्सराओं का जिक्र है...उसी को हूर भी कहा जाता है। जो स्वर्ग में पाई जाती हैं। स्वर्ग की अप्सराएं मतलब जन्नत की हूरें।'
- वकील, एक्टिविस्ट और कबीर फाउंडेशन की संस्थापक सुबुही खान का कहना है कि, ''मैंने कुरान में कहीं भी 72 हूरों के बारे में नहीं पढ़ा है। हूरों का जिक्र है। इसलिए मैं मुसलमान बच्चों और युवाओं से कहना चाहती हूं कि जन्नत और दोजख की ग्राफिक डीटेल्स सिर्फ और सिर्फ आपके दिमाग को कंट्रोल करने के लिए बनाई गई हैं।''
- मुस्लिम एक्सपर्ट मुमताज आलम की मानें तो, ''कुरान में कहीं नहीं लिखा है कि हूरें मर्दों के लिए हैं। हूरें मतलब हैरत में डालने वाली कोई भी चीज। इसलिए हूरें पुरुष या महिला, दोनों हो सकते हैं। बस हदीस में यह रवायत मिलती है '72 की' उसी से जोड़कर ये नंबर आया है।''
- गार्जियन के पत्रकार इब्र वकार ने अपने एक लेख में लिखा था कि, 'कैसे नौजवानों को आतंकी बनाने के लिए 72 हूरों के सपने दिखाए जाते हैं। यह कट्टरपंथियों के ब्रेनवॉश का तरीका बन गया है।'












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