अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने एशिया दौरे से क्या हासिल किया?

Posted By: BBC Hindi
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राष्ट्रपति ट्रंप
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राष्ट्रपति ट्रंप

सबसे पहले तो अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग-उन का माखौल उड़ाया और फिर कुछ ही घंटों के बाद कहा कि वे भविष्य में अच्छे दोस्त बन सकते हैं. ट्रंप के एशिया दौरे को लेकर कुछ ऐसे विरोधाभास देखने को मिले.

ट्रंप एशिया के पांच देशों की यात्रा पर हैं और कूटनीतिक पर्यवेक्षक अमरीकी राष्ट्रपति के रवैये को समझने की कोशिश में उलझे हुए हैं.

ट्रंप अभी आसियान बैठक के लिए फिलीपींस में हैं और एशिया दौरे से ट्रंप की जल्द ही घर वापसी हो जाएगी.

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विदेशी ज़मीन पर

इस इलाके में ऐसे लोग हो सकते हैं जो ट्रंप के दौरे से हुए बड़े फ़ायदे की बात पर यकीन रखते हों लेकिन ये ज़रूरी नहीं है कि अमरीका को भी इसका कुछ लाभ हो.

इसमें कोई शक नहीं कि ट्रंप जहां कहीं भी गए, वहां उनका स्वागत किसी राजा की तरह हुआ.

बेशक ट्रंप को अपनी तारीफ़ अच्छी लगती हो, ख़ासकर घरेलू मोर्चे पर हो रही आलोचनाओं के मद्देनज़र. विदेशी ज़मीन पर अगर ट्रंप का शाही स्वागत किया जाता है तो वे विनम्र मेहमान की तरह पेश आते हैं. मानवाधिकार और लोकतंत्र जैसे असहज करने वाले मुद्दों से ट्रंप किनारा कर चुके हैं.

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ट्रंप, शी जिनपिंग
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ट्रंप का दौरा

जब उत्तर कोरिया ने राष्ट्रपति ट्रंप को 'सठियाया हुआ' कहकर बार-बार मजाक उड़ाया तो ट्रंप ने जवाब में किम जोंग उन को 'नाटा और मोटा' कहा. ऐसा लग रहा था कि एशिया के जिन देशों के दौरे पर ट्रंप हैं, उनके नेताओं ने सादगी और भलमनसाहत से मेजबान की भूमिका अदा की.

लेकिन कहीं न कहीं इसका एहसास भी हो रहा है कि मानो वे ट्रंप के दौरे को लेकर तैयार थे, जैसे उन्हें ऐसा कुछ नहीं करना है जिससे ट्रंप भड़क जाएं या फिर खुशामद और तारीफ के हथियार से ट्रंप को निहत्था करने के बारे में उन्होंने पहले से सोच रखा था.

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'पसंदीदा साथी'

जापान के प्रधानमंत्री शिंज़ो आबे ने कहा कि गोल्फ़ खेलने के लिए ट्रंप उनके 'पसंदीदा साथी' हैं. दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति मून ने ट्रंप से कहा कि वे अमरीका को पहले से महान बना रहे हैं. यहां तक कि सोल की नेशनल एसेंबली में मून ने ट्रंप का 'विश्व नेता' कहकर परिचय कराया.

हनोई में स्वागत समारोह के बाद ट्रंप वियतनाम के राष्ट्रपति के बगल में खड़े हुए, लेकिन उन्होंने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और ब्लॉगरों की गिरफ़्तारी पर कुछ नहीं कहा. बीजिंग में वे राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ खड़े हुए और उन्होंने आलोचना में एक शब्द भी नहीं कहा.

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चीनी राष्ट्रपति

हालांकि चीन का दौरा ट्रंप के लिए थोड़ा अलग ज़रूर रहा. चीन में शी जिनपिंग ट्रंप की तारीफ़ नहीं कर रहे थे, बल्कि वहां इसका उलटा हो रहा था. ट्रंप ने अपनी पोती का एक वीडियो जारी किया जिसमें वो चीनी भाषा मंडारिन में गा रही थीं. ट्रंप ने शी को एक बहुत ख़ास शख्स कहा और उन्होंने चीनी राष्ट्रपति से कहा कि लोग उन पर गर्व करेंगे.

चीन में ऐसा कुछ भी नहीं हुआ कि ट्रंप को तारीफ के बदले तारीफ मिली हो. बीजिंग में इसका कोई मौका भी नहीं था कि उन्हें विश्व नेता कहकर बुलाया जाए.

अपनी उपलब्धि के तौर पर ट्रंप वियतनाम का नाम ले सकते हैं, जहाँ उनके दौरे को लेकर बहुत शोरशराबा था. इस पर वो शी जिनपिंग को उलाहना दे सकते हैं कि वहाँ बॉस कौन था?

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अमरीका फर्स्ट

एपेक समिट में उन्होंने चीन का नाम लिए बगैर व्यापार के गैरवाज़िब तौरतरीके अपनाने वाले देशों की आलोचना की और कहा कि अमरीका अब इसका कोई फ़ायदा नहीं उठाता है. उनका भाषण जबर्दस्त था, ऐसा भाषण जिसे वे घरेलू मोर्चे पर अपनी अमरीका फर्स्ट की नीति के तौर पर पेश कर सकें.

लेकिन जो बात दिलचस्प थी वो ट्रंप के भाषण के बाद हुई. इसी एपेक सम्मेलन में ट्रंप के बाद राष्ट्रपति शी जिनपिंग को बोलना था. शी जिनपिंग ने टेक्नॉलॉजी, जलवायु परिवर्तन, इनोवेशन के भविष्य जैसे मुद्दों पर बात की. अतीत में बहस का मुद्दा अमरीकी राष्ट्रपति की उम्मीद के मुताबिक़ हुआ करता था.

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साउथ चाइना सी

इसकी वजह शायद 'अमरीका फर्स्ट' की नीति है. अमरीका के लिहाज से उसकी विदेश नीति में ये बड़ा बदलाव कहा जा सकता है. अब सबकुछ इस बात पर निर्भर करता है कि कितनी साफगोई से और किन शर्तों पर सौदों को अंजाम दिया जाए.

जानकारों के मुताबिक़ ट्रंप ये समझते हैं कि चीन के साथ उलझने के ख़राब नतीज़े हो सकते हैं. लेकिन इन दिनों नेताओं के चेहरे पर जो मुस्कुराहट दिख रही है, उसके पीछे तगड़ी सौदेबाज़ी चल रही है. इसका अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि ट्रंप ने साउथ चाइना सी के मुद्दे पर मध्यस्थता की पेशकश की है.

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ट्रंप का इशारा

हालांकि साउथ चाइना सी के मुद्दे पर अमरीका ने अभी तक कोई स्टैंड नहीं लिया है, लेकिन वो बिना किसी रोकटोक के आने-जाने के अधिकार का समर्थन करता है और ये बात चीन को परेशान करती है. रणनीतिक तौर पर अमरीका ये कभी नहीं चाहेगा कि चीन इस इलाके को अपनी फौजी ताकत से प्रभावित करे.

लेकिन क्या ट्रंप इस ओर इशारा कर रहे हैं कि समझौता मुमकिन है? या फिर ये अमरीकी विदेश नीति में बदलाव का एक और उदाहरण है? हम ये जानते हैं कि चीन अमरीकी ताक़त की बराबरी नहीं कर सकता लेकिन ये हकीकत इस बात की तस्दीक नहीं करती कि अमरीका का असर पहले की तरह की बरकरार है.

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English summary
What did US President Donald Trump gain from the Asia tour
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