पश्चिमी देशों से श्रीलंका की गुहार, रूस पर न लगाए प्रतिबंध, हम सड़कों पर आ जाएंगे!
श्रीलंका के अंतरिम राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे ने रविवार को पश्चिम से कहा कि यूक्रेन में उसकी आक्रामकता के लिए रूस पर प्रतिबंध मास्को को उसके घुटनों पर नहीं लाएगा, बल्कि भोजन की कमी और बढ़ती कीमतों के मामले में बाकी के
कोलंबो, 18 जुलाई : श्रीलंका के कार्यवाहक राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे (acting president of sri lanka ranil Wickremesinghe) ने कहा कि, रूस पर पश्चिमी प्रतिबंधों का सबसे बुरा असर कम विकसित राष्ट्रों को होगा। रानिल विक्रमसिंघे ने आगे चिंता प्रकट करते हुए कहा कि, रूस पर लगाए जा रहे अलग-अलग प्रतिबंधों से खाद्य संकट उत्पन्न हो जाएगा, सामानों की कीमतें बढ़ जाएंगी, जिसका सबसे बुरा प्रभाव कम विकसित देशों पर पडे़गा। उन्होंने आगे कहा कि, यूक्रेन युद्ध के मद्देनजर पश्चिमी देश जिस तरह से रूस पर ताबड़तोड़ प्रतिबंध लगा रहे हैं, इससे मास्को को घुटने पर नहीं लाया जा सकता है।

रूस पर प्रतिबंध का असर कम विकसित देशों को होगा
श्रीलंका घोर आर्थिक संकट से जूझ रहा है। इस वजह से देश में नया राजनीतिक संकट उत्पन्न हो गया है। जनता परेशान है, राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे सिंगापुर भाग गए हैं और उन्होंने वहीं से अपना इस्तीफा ईमेल के जरिए भेज दिया है। इसके बाद रानिल विक्रमसिंघे को अगले राष्ट्रपति के चुनाव होने तक देश का अंतरिम राष्ट्रपति की कमान सौंपी गई है। श्रीलंका के कार्यवाहक राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे ने पश्चिमी देशों से साफ कह दिया है कि, रूस पर प्रतिबंध लगाने से कोई फायदा नहीं होगा, बल्कि इससे गरीब देश प्रभावित होंगे। संकटग्रस्त द्वीप राष्ट्र के अंतरिम राष्ट्रपति की यह टिप्पणी विश्व खाद्य कार्यक्रम के कुछ दिनों के बाद आई है, जिसमें उन्होंने खाद्य सामग्री और ईंधन की बढ़ती कीमतों का जिक्र किया है। उन्होंने कहा कि, भोजन और ईंधन की कीमतें आसमान छू रही हैं। आवश्यक वस्तुओं की कमी के कारण श्रीलंका के छह मिलियन से अधिक की आबादी संकट का सामना कर रही है। खाद्य सामग्री के दाम बढ़ने से श्रीलंका संकट की ओर बढ़ रहा है और भोजन श्रीलंकाई जनता के पहुंच के बाहर हो गई है।

वैश्विक संकट जिम्मेदार
रानिल विक्रमसिंघे ने अपने संबोधन में श्रीलंका के खराब हालात के लिए आंशिक तौर पर वैश्विक संकट और यहां के हालात को जिम्मेदार ठहराया है।

अगला राष्ट्रपति कौन होगा?
श्रीलंका को राजनीतिक संकट से उबारने के लिए16 जुलाई को संसद की बैठक बुलाई गई थी। बैठक में देश का अगला राष्ट्रपति कौन होगा इस पर विचार-विमर्श हुआ था। बता दें कि, देश को घोर आर्थिक और राजनीतिक संकट या कहें बीच मझधार में छोड़कर सिंगापुर भागने वाले राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे ने गुरुवार को इस्तीफा दे दिया था, जिसकी आधिकारिक घोषणा शुक्रवार को की गई थी। इसके तुरंत बाद श्रीलंका के मुख्य न्यायाधीश जयंत जयसूर्या ने रानिल विक्रमसिंघे को देश का कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में शपथ दिलाई गई।

सांसद बनाएंगे राष्ट्रपति
द्वीप राष्ट्र के इतिहास में यह पहली बार है जब लोकप्रीय जनादेश की बजाय राष्ट्रपति की नियुक्ति सांसदों द्वारा की जाएगी। स्पीकर महिंदा यापा अभयवर्धने (Mahindra Yapa Abhaywardene) ने शुक्रवार को कहा कि 225 सदस्यीय संसद 20 जुलाई को गुप्त वोट से नए राष्ट्रपति का चुनाव करेगी. 1978 के बाद से राष्ट्रपति पद के इतिहास में कभी भी संसद ने राष्ट्रपति के चुनाव के लिए मतदान नहीं किया था।

नए राष्ट्रपति को लेकर तैयारियां शूरू
वहीं, संसद के स्पीकर ने ऐलान किया है कि गोटाबाया के इस्तीफा मंजूर होने के बाद अब 7 दिन के भीतर नए राष्ट्रपति की नियुक्ति की जाएगी। जानकारी के मुताबिक, नए राष्ट्रपति चुनाव को लेकर राजनीतिक पार्टियों ने तैयारियां शुरू कर दी है।

एक्शन में रानिल विक्रमसिंघे
देश के कार्यवाहक राष्ट्रपति बनने के तुरंत बाद, रानिल विक्रमसिंघे ने कड़ा एक्शन लेना शुरू कर दिया। उन्होंने देश की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूती प्रदान करने के लिए विशेष समिति का गठन कर दिया। यह समिति बिना किसी राजनीतिक हस्तक्षेप के किसी भी मुद्दे पर कड़ा फैसला ले सकती है।












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