PM मोदी की कूटनीति का फैन बना पश्चिमी मीडिया, घोषणापत्र जारी होने पर हुआ हैरान, भारत को लेकर बदले सुर
भारत की राजधानी नई दिल्ली में G20 समिट का आज समापन हो गया है। जी20 लीडर्स घोषणा पत्र पर सभी देशों की सहमति बन गई। एक दिन पहले PM मोदी ने बतौर अध्यक्ष सभी सदस्य देशों की सहमति से नई दिल्ली डिक्लेरेशन पारित किया था।
पीएम मोदी ने खुद इसकी जानकारी देते हुए कहा,"हमारे टीम के हार्ड वर्क से और आप सभी के सहयोग से नई दिल्ली जी20 लीडर्स घोषणा पत्र पर आम सहमति बन गई है।" इसमें जोर देते हुए कहा गया कि परमाणु का उपयोग या उपयोग की धमकी दिया जाना भी स्वीकार नहीं किया जाएगा।

भारत सरकार की इस कूटनीति की खबर दुनिया भर की मीडिया में प्रमुखता से छाई हुई है। दरअसल यूक्रेन युद्ध के चलते संयुक्त घोषणा पत्र पर आम सहमति बनाना चुनौतीपूर्ण था लेकिन भारत ने अपने कूटनीतिक कौशल से इस मुश्किल काम को भी अंजाम दे दिया।
विदेशी मीडिया में लिखे गए लेखों में भारतीय कूटनीति को खूब प्रशंसा हो रही है। न्यूयॉर्क टाइम्स के एक लेख में लिखा गया है कि नई दिल्ली में जी20 सम्मेलन में विश्व नेताओं ने उम्मीद से एक दिन पहले यूक्रेन में युद्ध पर एक संयुक्त बयान जारी करके जी20 शिखर सम्मेलन पर नजर रखने वालों को आश्चर्यचकित कर दिया है।
द गार्जियन ने लिखा है, नरेंद्र मोदी ने शनिवार को घोषणा की कि जी20 नेता एक संयुक्त घोषणा पर सहमत हो गए हैं, जिससे यह आशंका कम हो गई है कि रूस-यूक्रेन युद्ध पर असहमति पहली बार आम सहमति को रोक देगी। यह घोषणा भारत के लिए एक बड़ी जीत का प्रतीक है, जिसके पास इस साल की जी20 की अध्यक्षता है।
गार्जियन ने आगे लिखा जी20 ग्रुप के लिए यह साल विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण रहा है, क्योंकि रूस और चीन यूक्रेन युद्ध, जलवायु और ऊर्जा के आसपास चर्चा में अड़ियल साबित हुए थे, जिससे पिछली मंत्रिस्तरीय बैठकों में आम सहमति के प्रयास पटरी से उतर गए थे।
अमेरिकी मीडिया ने लिखा है कि पीएम मोदी ने दुनिया के सामने भारत की क्षमताओं को अच्छे से प्रस्तुत किया है। उन्होंने भारत को दुनिया की सबसे तेजी से विकास करती अर्थव्यवस्था और युवा कार्यशक्ति वाले देश के रूप में जी20 देशों के सामने पेश किया।
पीएम मोदी की कूटनीति की प्रशंसा करते हुए लिखा गया है कि भारत ने संयुक्त घोषणा पत्र में रूस या चीन का विरोध नहीं किया है। इसके साथ ही यूक्रेन युद्ध को लेकर रूस की आलोचना भी नहीं की गई है। भारत ने संयुक्त घोषणापत्र में सभी पक्षों को साधने का प्रयास किया।












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